भारत निर्वाचन आयोग ने उन 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं, जहां मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पूरा हो चुका है। इस अभियान का मकसद ऐसे योग्य मतदाताओं के नाम सूची में जोड़ना है, जो SIR के दौरान या उसके बाद छूट गए, और पहली बार वोट देने के पात्र युवाओं को शामिल करना है। बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर ऐसे लोगों से फॉर्म-6 भरवाएंगे। एक महीने में काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
आयोग का पत्र और उसकी तारीख
आयोग ने यह निर्देश राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) को पत्र लिखकर दिया है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के हवाले से आयोग ने यह निर्देश 29 सितंबर को लिखित रूप में दिया था। कुछ अन्य रिपोर्टों में पत्र की तारीख 1 अक्टूबर बताई गई है, इसलिए तारीख को लेकर आयोग की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। आयोग ने कहा है कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) और निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) मतदाता सूची के लगातार अपडेट होने की प्रक्रिया के तहत यह अभियान चलाएंगे।
यह कदम ऐसे समय आया है जब SIR के दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के आरोप लगते रहे हैं। आयोग ने अपने पत्र में नाम कटने के आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं की है। उसने इसे सामान्य और निरंतर चलने वाली प्रक्रिया बताया है। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने भी एक्स पर कहा कि जिला निर्वाचन अधिकारी और ERO छूटे हुए तथा पहली बार वोट देने वाले योग्य लोगों को सूची में जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाएंगे।
अभियान में क्या होगा
आयोग के निर्देशों के अनुसार SIR के दौरान BLO ने जो ASDD सूची (अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहरी प्रविष्टि) बनाई थी, उसे पंचायत भवन, नगर पालिका या BDO कार्यालय और CEO की वेबसाइट पर लगाया गया था। इसके बाद ड्राफ्ट रोल, दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया और फिर अंतिम मतदाता सूची जारी हुई। आयोग का कहना है कि अंतिम सूची में SIR से पहले की सूची की तुलना में कई नाम कटे हैं और कुछ नए जुड़े हैं। उसके अनुसार मतदाता बनना निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, इसलिए जिनके नाम कटे या छूटे हैं, उन्हें वापस जोड़ा जाना चाहिए।
BLO को क्या करना है
- SIR से पहले की मतदाता सूची और अब की अंतिम सूची का मिलान करना है।
- जिनके नाम पहले की सूची में थे लेकिन अब नहीं हैं, उनकी सूची बनानी है।
- ऐसे सभी पहचाने गए लोगों के घर जाकर सत्यापन करना है।
- व्यक्ति वहीं रहता है और मतदाता बनने योग्य है तो मौके पर ही फॉर्म-6 भरवाना है।
- घर-घर जाने के दौरान कोई युवा या पहली बार वोट डालने वाला व्यक्ति छूटा मिले तो उसका भी फॉर्म-6 भरवाना है।
- हर BLO को हफ्ते में कम से कम 20 से 25 मतदाताओं तक पहुंचना है, ताकि काम एक महीने में पूरा हो सके।
- BLO की बनाई सूची मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट (BLA) को भी दी जाएगी।
- पूरी सूची, भरे हुए फॉर्म-6 और फील्ड सत्यापन रिपोर्ट ERO को सौंपनी है।
अंतिम निर्णय ERO का होगा, जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 के तहत लिया जाएगा।
कैंप, जागरूकता और निगरानी
लोगों को आसानी से फॉर्म जमा करने का मौका देने के लिए बूथ स्तर पर कैंप लगाए जाएंगे। रैन बसेरों, मजदूर बस्तियों, बेघर और वंचित लोगों के लिए अलग से विशेष कैंप भी होंगे। CEO, DEO और ERO को स्कूल-कॉलेज, SVEEP कार्यक्रम और प्रेस ब्रीफिंग के जरिए जागरूकता फैलानी है। अभियान की समीक्षा CEO, DEO और ERO स्तर पर रोजाना होगी। सभी DEO, ERO और BLO को इस बारे में निर्देश जारी करने को कहा गया है।
अभियान पूरा होने के बाद ERO बूथवार सूची सभी राजनीतिक दलों को देंगे, ताकि कोई छूटा मतदाता रह गया हो तो उसका नाम जुड़वाया जा सके।
आम मतदाता क्या कर सकते हैं
आयोग ने इसी बीच कहा है कि SIR के दौरान या बाद में जिसका नाम छूटा है, वह लगातार अपडेट होने वाली प्रक्रिया के तहत संबंधित ERO के पास आवेदन कर सकता है। यानी BLO के आने का इंतजार किए बिना भी आवेदन किया जा सकता है।

