कानपुर। जाजमऊ थाना क्षेत्र के वाजिदपुर में एक ही परिवार के तीन सगे भाइयों की कुछ महीनों के भीतर एक के बाद एक मौत हो गई है। परिजनों और पड़ोसियों के हवाले से रिपोर्टों में इन्हें आत्महत्या बताया गया है, लेकिन इस खबर के लिखे जाने तक पुलिस की ओर से मौतों के कारणों पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इलाके में लोग सहमे हुए हैं।
क्या है मामला
रिपोर्टों के अनुसार वाजिदपुर निवासी रामशंकर के तीन बेटे थे। मंझले बेटे गोविंद निषाद (30) और सबसे छोटे बेटे अमन की मौत पहले हो चुकी थी। सबसे बड़े बेटे विकास निषाद (29) की मौत 10 अक्टूबर को हुई। विकास टेनरी में काम करते थे। उनके परिवार में पत्नी और दो साल का बेटा है। पिता रामशंकर लकवे से पीड़ित हैं।
9 अक्टूबर को सामने आई एक रिपोर्ट में पुलिस ने इस बारे में जानकारी न होने की बात कही थी। बाद की रिपोर्टों में विकास की मौत को “संदिग्ध हालात” में बताया गया है। इसलिए मौतों की वजह की आधिकारिक पुष्टि बाकी है।
परिजनों और पड़ोसियों का दावा
रिश्तेदार और पड़ोसी बताते हैं कि दोनों छोटे भाइयों की मौत के बाद विकास बेहद परेशान रहने लगे थे। उनके मुताबिक विकास कहते थे कि मृत भाई सपने में आकर उन्हें अपने पास बुलाते हैं। यही बात अमन ने भी गोविंद की मौत के बाद अपनी मां से कही थी, ऐसा परिजनों ने बताया।
पड़ोसियों के अनुसार परिवार ने इलाज और झाड़-फूंक, दोनों के रास्ते आजमाए, पर हालात नहीं संभले। ये सभी बातें परिजनों और पड़ोसियों की बताई हुई हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। सपनों में बुलाए जाने की बात से किसी अलौकिक कारण की पुष्टि नहीं होती।
मौतों के क्रम और समय पर रिपोर्टें अलग
अलग-अलग रिपोर्टों में इन मौतों की तारीखों और क्रम में अंतर है। किसी में मौतों का दौर छह महीने का बताया गया है तो किसी में आठ महीने का। इसलिए यहां सटीक तारीखें नहीं दी जा रही हैं। पुलिस के रिकॉर्ड से ही सही क्रम और समय स्पष्ट होगा।
इलाके में दहशत
वाजिदपुर के लोग इन घटनाओं के बाद डरे हुए हैं। पड़ोसियों के मुताबिक अब कुछ लोग शाम सात बजे ही दरवाजे बंद कर लेते हैं। दिन में लोग परिवार के घर के बाहर चबूतरे पर बैठकर घटना की चर्चा करते हैं।
आगे क्या
अब यह साफ होना बाकी है कि पुलिस मौतों की जांच किस दिशा में कर रही है, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या सामने आया और परिवार ने कोई तहरीर दी है या नहीं। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े दिशानिर्देशों में माना गया है कि किसी करीबी की मौत के बाद परिवार के अन्य सदस्यों में गहरे शोक और अवसाद का जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे में परिवार के बचे सदस्यों और पड़ोसियों के लिए काउंसलिंग और भावनात्मक सहारा अहम हो सकता है।
अगर आप या आपका कोई परिचित गहरे तनाव, निराशा या आत्महत्या के विचारों से गुजर रहा है, तो तुरंत किसी भरोसेमंद व्यक्ति, डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करें। भारत में टेली-मानस की निःशुल्क हेल्पलाइन 14416 पर मदद ली जा सकती है।

