जंतर-मंतर से प्रदर्शन स्थल का दर्जा हटाने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, नए स्थलों की उपयुक्तता पर सवाल

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जंतर-मंतर प्रदर्शन स्थल हटाने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

नई दिल्ली। जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थलों की सूची से हटाने के दिल्ली पुलिस के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इस मामले में पहले से लंबित एक याचिका में अर्जी दाखिल कर 11 अक्टूबर के आदेश पर सवाल उठाए गए हैं। अर्जी में रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी ग्राउंड को नए प्रदर्शन स्थल बनाने पर भी आपत्ति जताई गई है।

क्या है दिल्ली पुलिस का आदेश

दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने 11 अक्टूबर को स्थायी आदेश जारी किया। इसके तहत जंतर-मंतर को प्रदर्शन के लिए अधिसूचित स्थल की सूची से हटा दिया गया। इसकी जगह रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी ग्राउंड को नए निर्धारित स्थल घोषित किया गया है।

आदेश में कहा गया है कि इन तीनों स्थानों पर धरना-प्रदर्शन आयोजित करने के लिए संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) अलग से जारी की जाएगी। यानी नए स्थलों पर प्रदर्शन के नियम और प्रक्रिया अभी सामने आना बाकी हैं।

बताया गया है कि यह फैसला एक समिति की समीक्षा के बाद लिया गया। समिति ने मौजूदा स्थल की जगह दूसरे स्थानों पर प्रदर्शन कराने की संभावनाएं परखी थीं। आदेश की प्रति दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्तों, संयुक्त आयुक्तों और अतिरिक्त आयुक्तों समेत संबंधित अधिकारियों को भेजी गई है।

याचिका में क्या कहा गया

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अर्जी में पुलिस आदेश की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। साथ ही नए स्थलों की उपलब्धता और उपयुक्तता पर आपत्ति जताई गई है। अर्जी में मुख्य रूप से ये बातें कही गई हैं:

  • सुप्रीम कोर्ट पहले ही जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल के रूप में मंजूरी दे चुका है।
  • रामलीला मैदान को इस उद्देश्य के लिए उपयुक्त विकल्प नहीं माना गया था।
  • प्रस्तावित कुछ वैकल्पिक स्थल दिल्ली के लैंडफिल (कूड़ा भराव क्षेत्र) के नजदीक हैं, इसलिए सार्वजनिक सभाओं के लिहाज से उनकी उपयुक्तता संदिग्ध है। साथ ही नागरिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिहाज से भी वे अनुकूल नहीं बताए गए हैं।

ये सभी बातें याचिका में किए गए दावे हैं। इन पर दिल्ली पुलिस या केंद्र सरकार का पक्ष अब तक सामने नहीं आया है। सुनवाई की तारीख या अदालत की किसी कार्रवाई की जानकारी भी फिलहाल उपलब्ध नहीं है। बताया जा रहा है कि दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश मुक्ता गुप्ता सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की कानूनी टीम का नेतृत्व कर सकती हैं।

कॉकरोच जनता पार्टी का विरोध

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सह-संयोजक सौरव दास ने सोमवार को इस फैसले पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के तौर पर गैर-अधिसूचित करने का फैसला “मंजूर नहीं है” और वे “इस मनमाने फैसले को नहीं मानते।” उन्होंने सवाल उठाया, “क्या गृह मंत्रालय ने भारत के लोगों से सलाह ली? क्या किसी हितधारक से सलाह ली गई? क्या किसी संगठन से सलाह ली गई?”

किस माहौल में आया फैसला

यह आदेश ऐसे समय आया है जब जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन के लिए जुटने के आह्वान के बाद राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि सीजेपी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर जाने की मांग कर रही है। हालांकि पुलिस के आदेश में आदेश और इस मांग के बीच किसी संबंध का उल्लेख नहीं है।

जंतर-मंतर और नए स्थलों के बीच दूरी

जंतर-मंतर लंबे समय से राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और अलग-अलग समूहों के धरना-प्रदर्शन का प्रमुख केंद्र रहा है। एक आकलन के मुताबिक इसे अब करीब तीन दशक बाद प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाया गया है।

अनुमानित दूरी के हिसाब से नए स्थलों में रामलीला मैदान जंतर-मंतर से सबसे नजदीक है, करीब 3 से 3.2 किलोमीटर। सीबीडी ग्राउंड की दूरी लगभग 11 से 12 किलोमीटर बताई गई है। रामलीला मैदान और सीबीडी ग्राउंड पहले से ही धरना-प्रदर्शन स्थल के रूप में घोषित रहे हैं।

आगे क्या

अब नजर इस पर रहेगी कि सुप्रीम कोर्ट अर्जी पर कब सुनवाई करता है और दिल्ली पुलिस या केंद्र से जवाब मांगता है या नहीं। इसके अलावा नए स्थलों के लिए संशोधित एसओपी जारी होने का इंतजार है, जिससे यह साफ होगा कि वहां प्रदर्शन की अनुमति और शर्तें क्या होंगी।

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