आगरा। जिला महिला अस्पताल का ऑक्सीजन प्लांट पिछले करीब एक सप्ताह से खराब पड़ा है। इस दौरान अस्पताल में ऑक्सीजन की जरूरत बाहर से मंगाए गए सिलिंडरों से पूरी की जा रही है। अस्पताल में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एक सप्ताह में बड़े और छोटे सिलिंडरों पर लगभग 1,43,000 रुपये खर्च हो चुके हैं। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पुष्पलता ने जल्द प्लांट ठीक कराने की बात कही है।
नवजात इकाई में सबसे ज्यादा जरूरत
अस्पताल में सबसे अधिक ऑक्सीजन की जरूरत नवजात शिशु गहन देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में पड़ती है, जहां लगभग 16 मशीनें लगी हैं। इन मशीनों पर भर्ती गंभीर नवजात शिशुओं के लिए ऑक्सीजन की निरंतर आपूर्ति जरूरी होती है। प्लांट बंद होने से अस्पताल को बाहर से सिलिंडर मंगाने पड़ रहे हैं। एक सप्ताह में करीब 20 बड़े और 16 छोटे सिलिंडर मंगाए जा चुके हैं।
नवजात शिशुओं के अलावा सिजेरियन प्रसव और एनेस्थीसिया देने के दौरान भी मरीजों को ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है।
किस सिलिंडर का कहां इस्तेमाल
अस्पताल में दो तरह के सिलिंडर इस्तेमाल होते हैं।
- बड़ा जंबो सिलिंडर: इसकी क्षमता 46.7 लीटर है और कीमत लगभग 8,000 से 10,000 रुपये बताई गई है। किट और रेगुलेटर के साथ यह करीब 14,000 रुपये का पड़ता है। इसका उपयोग एसएनसीयू, ऑपरेशन थियेटर (ओटी) और बैकअप के लिए होता है।
- छोटा सिलिंडर: इसकी क्षमता लगभग 10 लीटर है और कीमत 4,500 से 6,500 रुपये है। यह इमरजेंसी वार्ड में और एम्बुलेंस से मरीज को दूसरी जगह ले जाने के दौरान काम आता है।
प्लांट की लागत और खर्च पर सवाल
अस्पताल में लगे ऑक्सीजन प्लांट को लाखों रुपये की लागत से स्थापित बताया गया है। एक सप्ताह में सिलिंडरों पर लाखों रुपये खर्च होने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि इतनी लागत से लगा प्लांट ठप क्यों पड़ा है और उसकी मरम्मत में देरी क्यों हुई। प्लांट कब से लगा है और खराबी का सटीक कारण क्या है, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
अस्पताल प्रशासन का पक्ष
डॉ. पुष्पलता ने बताया कि प्लांट को जल्द ठीक करा लिया जाएगा। उनके अनुसार मैकेनिक को सूचना दे दी गई है। वह प्लांट की मोटर निकालकर ले गया है। उन्होंने कहा कि जल्द ही ऑक्सीजन आपूर्ति सुचारु कर दी जाएगी।

