कांग्रेस की 1 नवंबर की ‘वोट चोरी’ रैली के बाद भाजपा का अभियान: अमित शाह 2 नवंबर को हैदराबाद और 5 नवंबर को करनाल में करेंगे पदयात्रा

Sujeet Upadhyay
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अमित शाह की पदयात्रा: 2 नवंबर हैदराबाद, 5 नवंबर करनाल, वोट चोरी पर भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने

भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के ‘वोट चोरी’ अभियान के जवाब में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ नाम से पदयात्राओं की घोषणा की है। भाजपा नेताओं के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 2 नवंबर को कांग्रेस शासित तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में और 5 नवंबर को हरियाणा के करनाल में पदयात्रा में शामिल होंगे। हैदराबाद की पदयात्रा ठीक उस दिन होगी, जिसके एक दिन पहले, यानी 1 नवंबर को, दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस और इंडिया गठबंधन की ‘वोट चोरी’ के खिलाफ रैली प्रस्तावित है।

किसने क्या बताया?

तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने सोमवार को बताया कि पार्टी इस थीम पर हैदराबाद में पदयात्रा करेगी और शाह उसमें शामिल होंगे। राव का आरोप है कि कांग्रेस राज्य और देश में अराजकता पैदा करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई टिप्पणी को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना साधा।

हरियाणा भाजपा अध्यक्ष अर्चना गुप्ता ने बताया कि शाह 5 नवंबर को करनाल में इसी नाम की पदयात्रा में हिस्सा लेंगे। उनके अनुसार, पार्टी कार्यकर्ता राज्य भर में लोगों तक जाकर चुनावी प्रक्रिया से जुड़े तथ्य रखेंगे। गुप्ता ने राहुल गांधी, इंडिया गठबंधन और कांग्रेस पर रोज नया झूठ फैलाने का आरोप लगाया।

कांग्रेस की 1 नवंबर की रैली

कांग्रेस और इंडिया गठबंधन 1 नवंबर को रामलीला मैदान में रैली की तैयारी कर रहे हैं। दिल्ली पुलिस इसके लिए अनुमति दे चुकी है। कांग्रेस महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल के मुताबिक, यह रैली ‘दिल्ली चलो मार्च’ का समापन होगी और उसमें कम से कम दस लाख लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। विपक्ष मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित गड़बड़ियों को मुद्दा बना रहा है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग कर रहा है। कांग्रेस ने इसी मुद्दे पर पिछले साल दिसंबर में भी रामलीला मैदान में रैली की थी।

एसआईआर पर क्या है विवाद?

विवाद के केंद्र में ‘13 करोड़’ का आंकड़ा है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि एसआईआर में 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कई नेताओं ने यह आरोप दोहराया है।

चुनाव आयोग का कहना है कि यह आंकड़ा अंतिम सूची से हटाए गए नामों का नहीं है। आयोग के मुताबिक, तीन चरणों में 95.40 करोड़ मतदाताओं की जांच हुई, जिनमें से 13.39 करोड़ को अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहराव वाले (एएसडीडी) जैसी श्रेणियों में रखा गया। आयोग का कहना है कि पात्र व्यक्ति अपना नाम दोबारा जुड़वा सकते हैं।

तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष राव ने भी यही तर्क दिया। उनके अनुसार, इन 13 करोड़ में करीब 2.8 करोड़ मृत हैं, तीन करोड़ ऐसे हैं जिनका बीएलओ को पता नहीं चला, 6.3 करोड़ स्थायी रूप से कहीं और जा चुके हैं और करीब एक करोड़ के नाम कई जगह दर्ज हैं। राव का यह भी कहना है कि एसआईआर में हटाए गए नाम को फिर जुड़वाने का विकल्प सभी वास्तविक मतदाताओं के पास है। उन्होंने हैदराबाद के एक व्यक्ति के बारे में दावा किया कि उसने खुद तीन जगह वोट डालने की बात मानी। उन्होंने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी को चुनौती दी कि वे उनके पैतृक गांव कोंडारेड्डीपल्ले चलकर देखें कि वहां कितने नाम हटे हैं। राव ने तेलंगाना के कांग्रेस मंत्रियों से कम से कम 10 ऐसे मतदाता सामने लाने को भी कहा, जिनके नाम हटाए गए हैं।

विपक्ष इस स्पष्टीकरण पर सवाल उठा रहा है। कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि भाजपा के 2.8 करोड़ मृत मतदाताओं के दावे को मान भी लिया जाए, तो बाकी करीब 10.2 करोड़ नामों का हिसाब सामने नहीं आता।

पुनरीक्षण की पुरानी गिनती पर भी बहस

अर्चना गुप्ता ने कहा कि एसआईआर देश में अब 12वीं बार हो रहा है और इनमें से 10 बार कांग्रेस के शासनकाल में हुआ। चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक, 1951 से 2004 के बीच एसआईआर 8 बार हुआ था और पिछला पुनरीक्षण 2002-2004 में हुआ था। यानी गुप्ता और आयोग की गिनती अलग-अलग है। गुप्ता ने अपनी गिनती का आधार नहीं बताया।

तेलंगाना और हरियाणा दोनों उन राज्यों में शामिल हैं, जहां चुनाव आयोग ने इस साल एसआईआर के तीसरे चरण की प्रक्रिया शुरू की थी। यही वजह है कि दोनों राज्यों में भाजपा की पदयात्राओं को इस मुद्दे से जोड़कर देखा जा रहा है।

आगे क्या?

1 नवंबर को रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली, 2 नवंबर को हैदराबाद और 5 नवंबर को करनाल में शाह की पदयात्रा, इन कार्यक्रमों से एसआईआर और ‘वोट चोरी’ पर दोनों दलों की सीधी राजनीतिक टक्कर तेज होने के आसार हैं। पदयात्राओं के रूट और कार्यक्रम का ब्योरा अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है।

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