फर्जी आधार का शक: यूपी के 131 जन्म प्रमाणपत्रों की सीबीआई जांच, 21 जिलों में पड़ताल, 15 अक्टूबर तक रिपोर्ट तलब

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131 जन्म प्रमाणपत्रों की सीबीआई जांच: यूपी के 21 जिलों में फर्जी आधार का शक

सीबीआई ने उत्तर प्रदेश से जारी 131 जन्म प्रमाणपत्रों की जांच कराने के लिए राज्य के चीफ रजिस्ट्रार, जन्म एवं मृत्यु से रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्टों के अनुसार, इन्हीं प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल करके देश के अलग-अलग हिस्सों में फर्जी आधार कार्ड बनवाए गए हैं। इसके बाद बागपत, मेरठ, सहारनपुर, बिजनौर, गाजियाबाद, कन्नौज, इटावा और ललितपुर समेत 21 जिलों में जांच शुरू हो गई है। यह रिपोर्ट 15 अक्टूबर तक भेजनी है।

क्या जांच हो रही है

बताया गया है कि ये प्रमाणपत्र वर्ष 2000 से 2024 के बीच जारी हुए हैं। इनके आधार पर सबसे ज्यादा आधार कार्ड पश्चिम बंगाल और असम में बनवाए जाने की बात सामने आई है। अन्य राज्यों में भी इनका इस्तेमाल हुआ है। इसी वजह से इन प्रमाणपत्रों के खुद फर्जी होने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल यह जांच का विषय है और किसी निष्कर्ष की पुष्टि नहीं हुई है।

जिलों को प्रमाणपत्रों के नंबर और संबंधित जिलों की सूची भेजी गई है। उन्हें यह बताना है कि संबंधित प्रमाणपत्र वहां से वास्तव में जारी हुआ है या नहीं। अगर जारी हुआ है, तो रिकॉर्ड के अनुसार असली जन्मतिथि और पता क्या दर्ज है।

कन्नौज से सबसे ज्यादा प्रमाणपत्र

जांच के दायरे में आए 131 प्रमाणपत्रों में से आधे से ज्यादा, यानी 73, कन्नौज से जारी बताए गए हैं। इसके बाद इटावा से 17 और ललितपुर से 10 प्रमाणपत्र हैं। कानपुर नगर, फतेहपुर और हमीरपुर से तीन-तीन, बागपत से पांच, बिजनौर और जालौन व सोनभद्र से दो-दो प्रमाणपत्र जांच में हैं। सहारनपुर, मेरठ, गाजियाबाद, औरैया, कुशीनगर, बदायूं, संत कबीरनगर, मिर्जापुर, कानपुर देहात, रामपुर और फर्रुखाबाद से एक-एक प्रमाणपत्र शामिल है।

कहां से जारी होते हैं जन्म प्रमाणपत्र

रिपोर्टों के अनुसार, अस्पताल में हुए जन्म का प्रमाणपत्र स्वास्थ्य विभाग से जारी होता है। शहरी क्षेत्र में घर पर हुए जन्म का प्रमाणपत्र नगर निकाय से और गांव में घर पर हुए जन्म का प्रमाणपत्र पंचायतीराज विभाग से जारी किया जाता है। जिन प्रमाणपत्रों के फर्जी होने का शक है, उनकी सच्चाई उसी स्थान के रिकॉर्ड से पता चल सकती है जहां से उन्हें जारी दिखाया गया है।

पहले भी सामने आ चुके हैं फर्जी प्रमाणपत्र के मामले

उत्तर प्रदेश में फर्जी जन्म प्रमाणपत्रों का मामला पहले भी सामने आ चुका है। जुलाई 2025 में हरदोई में दो ग्राम सभाओं के सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) पोर्टल की लॉगिन आईडी हैक कर 500 से ज्यादा फर्जी जन्म प्रमाणपत्र जारी किए जाने की जानकारी आई थी, जिसमें पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था। यह मामला मौजूदा जांच से जुड़ा है या नहीं, इसकी कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

सीबीआई जांच में अब तक क्या मिला है, इसकी आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। 15 अक्टूबर तक जिलों की रिपोर्ट आने के बाद तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

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