ईडी की जांच: भारत में दखल की आशंका वाली विदेशी फंडिंग का शक, 15 लाख डॉलर के लेनदेन की पड़ताल; सेंट किट्स की कंपनी, जर्मन ट्रस्ट और ब्रिटिश फर्म का जिक्र

3 Min Read
ED जांच: 15 लाख डॉलर की विदेशी फंडिंग पर शक, दो विदेशी संस्थाओं की पड़ताल

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भारत के घरेलू मामलों में कथित हस्तक्षेप और संदिग्ध विदेशी फंडिंग के आरोपों को लेकर दो विदेशी संस्थाओं के खिलाफ जांच शुरू की है। जांच के दायरे में करीब 15 लाख अमेरिकी डॉलर (मौजूदा विनिमय दर पर लगभग 13.5 से 14.1 करोड़ रुपये) के संदिग्ध लेनदेन हैं। ईडी को संदेह है कि यह रकम कई देशों से घुमाकर भारत की कुछ संस्थाओं और व्यक्तियों तक पहुंचाई गई। ये ईडी के संदेह हैं और अभी जांच के दायरे में हैं। इस मामले में किसी पर आरोप सिद्ध नहीं हुआ है।

जांच में क्या सामने आया

जांच से जुड़ी जानकारी के अनुसार, सेंट किट्स एंड नेविस में पंजीकृत कंपनी टीसीसी डिजिटल मार्केट्स लिमिटेड 10 लाख डॉलर की रकम का स्रोत पाई गई है। ईडी के अनुसार, इस रकम का वास्तविक स्रोत जर्मनी का डॉ. मैथियास कार्ल वोग्ट ट्रस्ट है। जांच एजेंसी का कहना है कि जर्मन ट्रस्ट ने पहले यह रकम लिथुआनिया की कंपनी एक्सबेस डिजिटल यूएबी को ट्रांसफर की, ताकि जर्मन कानूनों से बचा जा सके।

ईडी को संदेह है कि रकम को डिजिटल एसेट्स और हवाला के जरिए दुबई और लिथुआनिया से घुमाया गया। जानकारी के मुताबिक, सेंट किट्स एंड नेविस की कंपनी ने यह रकम अनुदान के रूप में दो किश्तों में ब्रिटेन की एक कंपनी को ट्रांसफर की।

कनाडा की कंपनी से भी रकम

ईडी को कनाडा में पंजीकृत जेडबेस डिजिटल इंक के जरिए भी 5 लाख डॉलर ट्रांसफर किए जाने का पता चला है। यह रकम फरवरी 2026 में उसी ब्रिटिश कंपनी के खाते में भेजी गई। दोनों संदिग्ध लेनदेन मिलाकर 15 लाख डॉलर के हैं। जानकारी के अनुसार, भारतीय एजेंसियां इन लेनदेन की पुष्टि पेमेंट प्लेटफॉर्म एयरवॉलेक्स से करा रही हैं।

अभी क्या स्पष्ट नहीं

रिपोर्टों में ब्रिटिश कंपनी के नाम, भारत में रकम पाने वाली संस्थाओं या व्यक्तियों और हस्तक्षेप के आरोप के आधार की जानकारी नहीं दी गई है। ईडी की ओर से इस संबंध में कोई औपचारिक बयान उपलब्ध नहीं हो सका है, और नामित विदेशी इकाइयों का पक्ष भी सामने नहीं आया है। जांच आगे बढ़ने पर खबर अपडेट की जाएगी।

Share This Article
Exit mobile version