नई दिल्ली। केरल कांग्रेस के आधिकारिक एक्स हैंडल से देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत के इस्तीफे की मांग करने वाला पोस्ट सोमवार को विवाद में घिर गया। बढ़ते विरोध के बीच पोस्ट हटा दिया गया। केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के अध्यक्ष सनी जोसेफ ने कहा कि पोस्ट नेतृत्व की जानकारी, सहमति या सलाह के बिना किया गया था। उन्होंने बताया कि इसके लिए जिम्मेदार व्यक्ति को उसकी जिम्मेदारियों से हटा दिया गया है।
पोस्ट में क्या लिखा गया था
रिपोर्टों के मुताबिक पोस्ट में सीजेआई को “डियर सूर्यकांत” कहकर संबोधित किया गया था। इसमें कहा गया था कि अगर कानून-व्यवस्था उनकी जिम्मेदारी नहीं है, तो वे इस्तीफा दे दें और उनकी जगह ऐसे व्यक्ति को लाया जाएगा जो इसे संभाल सके।
यह पोस्ट एक समाचार एजेंसी की उस खबर के जवाब में किया गया बताया जा रहा है, जिसमें कहा गया था कि दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन और उससे जुड़ी पाबंदियों का मामला कानून-व्यवस्था से जुड़ा है और यह सीजेआई के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। खबर में सीजेआई की टिप्पणी का मूल पाठ मैं नहीं देख सका, इसलिए उसे यहां अपने शब्दों में ही बताया गया है।
पृष्ठभूमि
सोमवार को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के नेतृत्व में INDIA ब्लॉक के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला। विपक्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का विरोध कर रहा है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार 11 अक्टूबर को सीजेआई ने विपक्षी नेताओं से मुलाकात से इनकार कर दिया था। इसके बाद केरल कांग्रेस का यह पोस्ट सामने आया। मार्च के दौरान ही राहुल गांधी समेत 11 नेताओं की ओर से याचिका दाखिल की गई, जिसमें रजिस्ट्री ने 14 खामियां बताई हैं।
कांग्रेस की सफाई
सनी जोसेफ ने कहा कि केपीसीसी इस बात की जांच करेगी कि पार्टी के आधिकारिक अकाउंट से यह पोस्ट किन परिस्थितियों में किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को न्यायपालिका की निष्पक्षता से कोई असहमति नहीं है।
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कहा कि पार्टी इस बयान से पूरी तरह असहमत है और इसे गलत मानती है। उनके मुताबिक कांग्रेस को न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और इसी वजह से विपक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है।
भाजपा का हमला
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने डिलीट किए गए पोस्ट का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए एक्स पर लिखा कि उन्होंने पहले भी कहा था कि कांग्रेस का अगला निशाना न्यायपालिका है। उनका आरोप है कि कांग्रेस देश के सभी संवैधानिक और लोकतांत्रिक संस्थानों को खत्म करना चाहती है। उन्होंने “भारत-विरोधी गिरोह” के एकजुट होने की बात भी कही। ये रिजिजू के आरोप और राजनीतिक बयान हैं।
भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी और तेजस्वी सूर्या ने भी पोस्ट की निंदा की। त्रिवेदी ने सीजेआई के लिए “डियर सूर्यकांत” संबोधन पर आपत्ति जताई और सवाल उठाया कि कांग्रेस की एक राज्य इकाई नए मुख्य न्यायाधीश के चयन की बात कैसे कर सकती है।
बार एसोसिएशन और सहयोगी दलों की प्रतिक्रिया
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) ने सीजेआई के इस्तीफे की मांग वाले सोशल मीडिया बयानों की निंदा की। उसने कहा कि ऐसे बयान न्यायपालिका को कमजोर करते हैं।
INDIA ब्लॉक के सहयोगी दलों ने भी इससे दूरी बनाई। झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माजी ने कहा कि वे इस नजरिए से सहमत नहीं हैं और गठबंधन को सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा है। समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने कहा कि वे न्यायपालिका पर ज्यादा कुछ नहीं कहेंगे, लेकिन देश को गहरी निराशा हुई है।
आगे क्या
अब नजर इस पर रहेगी कि केपीसीसी की जांच में क्या सामने आता है और पोस्ट के लिए जिम्मेदार व्यक्ति पर आगे क्या कार्रवाई होती है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अब तक नहीं आई है। विपक्ष की SIR संबंधी याचिका की सुनवाई अदालत के आदेश पर निर्भर करेगी।

