नेहा बोरा की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी, पीस बॉन्ड नोटिस पर शुक्रवार शाम 6 बजे आएगा फैसला

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नेहा बोरा मामले में दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला शुक्रवार शाम 6 बजे

दिल्ली हाई कोर्ट ने AISA (ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन) की अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका पर गुरुवार को सुनवाई पूरी कर ली। याचिका में स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के उस नोटिस को चुनौती दी गई है, जिसमें उन्हें 10,000 रुपये का बॉन्ड भरकर शांति बनाए रखने को कहा गया था। जस्टिस सुब्रहमण्यम प्रसाद की बेंच इस मामले में शुक्रवार शाम 6 बजे फैसला सुनाएगी।

क्या है पूरा मामला

नेहा बोरा को 16 अक्टूबर की शाम मंडी हाउस इलाके से हिरासत में लिया गया था। पुलिस के अनुसार उन्हें निवारक प्रावधानों के तहत हिरासत में लिया गया और दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद अगले दिन तड़के छोड़ा गया। दिल्ली में चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर चल रहे प्रदर्शनों के बीच यह कार्रवाई हुई।

उसी बीच 17 अक्टूबर को SEM ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 130 के तहत नोटिस जारी किया। नोटिस में नेहा बोरा से पूछा गया कि जांच की अवधि में शांति बनाए रखने के लिए एक जमानती के साथ 10,000 रुपये का निजी बॉन्ड क्यों न भरवाया जाए। उन्हें 19 अक्टूबर को SEM के सामने पेश होने को कहा गया था। नेहा बोरा ने इसी नोटिस के खिलाफ हाई कोर्ट का रुख किया। अदालत में दशहरा अवकाश के कारण नियमित कामकाज 26 अक्टूबर से शुरू होना है।

याचिकाकर्ता का पक्ष

नेहा बोरा की ओर से वकील गोपाल शंकर नारायण ने दलील दी कि नोटिस BNSS की धारा 126 और 130 के तहत जारी हुआ है। उनके मुताबिक नेहा बोरा AISA की सक्रिय नेता हैं और सरकारी नीतियों में सुधार की मांग करती रही हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लोगों से प्रदर्शनों में शामिल होने की अपील जरूर की, लेकिन कहीं भी हिंसा के लिए नहीं उकसाया। वकील ने कहा कि उनके प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे हैं।

वकील ने अदालत को बताया कि 15 अक्टूबर को प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई थी। इसके बाद 16 अक्टूबर को शाम चार बजे सोशल मीडिया पर पोस्ट डाली गई, जिसमें जंतर-मंतर को अचानक डीनोटिफाई किए जाने पर नाराजगी जताई गई थी और मंडी हाउस में जुटने की बात थी। उनका कहना था कि पोस्ट में हिंसा भड़काने, कानून तोड़ने, शांति भंग करने या अपराध के लिए भीड़ जुटाने जैसी कोई बात नहीं थी।

वकील के अनुसार मंडी हाउस पहुंचने के 10 से 15 मिनट के भीतर नेहा बोरा को हिरासत में ले लिया गया, जबकि उन्होंने केवल कुछ नारे लगाए थे। उन्होंने इसे पूरी तरह गैर-कानूनी हिरासत बताया। उनका यह भी कहना था कि रात में नेहा बोरा को आर.के. पुरम थाने ले जाया गया और सुबह तक किसी को पता नहीं था कि उन्हें कहां रखा गया है। याचिका में भी कहा गया है कि नोटिस में शांति भंग होने की कोई संभावना नहीं दिखती, क्योंकि सभी आरोप शांतिपूर्ण प्रदर्शन से जुड़े हैं।

अदालत ने उठाया स्वतंत्र जांच का सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने एक उदाहरण के जरिए पूछा कि अगर कोई मजिस्ट्रेट को सिर्फ यह बताए कि “X” नाम का व्यक्ति किसी जगह नारे लगा रहा था और उसी आधार पर धारा 126 के तहत बॉन्ड का नोटिस जारी हो जाए, तो क्या यह पर्याप्त होगा। अदालत ने कहा कि मजिस्ट्रेट ने यह तक नहीं देखा कि संबंधित व्यक्ति उस जगह मौजूद था भी या नहीं, जबकि उसी दिन के प्रेस विवरणों में उसके किसी और जगह भाषण देने का जिक्र था। अदालत ने पूछा कि क्या कार्रवाई से पहले मजिस्ट्रेट के लिए यह स्वतंत्र रूप से परखना जरूरी नहीं है कि उसे मिली जानकारी भरोसेमंद है या नहीं। ये सुनवाई के दौरान की गई टिप्पणियां और सवाल हैं, अंतिम फैसला नहीं।

दिल्ली पुलिस का पक्ष

दिल्ली पुलिस की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा ने याचिका की मेंटेनेबिलिटी, यानी सुनवाई योग्य होने पर सवाल उठाए। उनकी दलील थी कि शांति भंग होने की आशंका का मतलब केवल पारंपरिक अपराध की संभावना नहीं है। किसी व्यक्ति की गतिविधियों से शांति भंग होने या वैसी स्थिति बनने का अंदेशा भी कार्रवाई का आधार हो सकता है। उन्होंने कहा कि परिस्थितियों के आधार पर राय बनाना संबंधित अधिकारी की अपनी संतुष्टि का विषय है और इसमें व्यापक विवेकाधिकार शामिल है।

ASG ने दावा किया कि नेहा बोरा के खिलाफ नियम उल्लंघन के कुल 12 मामले सामने आ चुके हैं और ये खुलेआम तथा लगातार हुए हैं। उन्होंने अधिवक्ता प्रशांत भूषण की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का भी हवाला दिया, जिसमें नेहा बोरा के शामिल होने की बात कही गई। ASG के अनुसार उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसे सत्ता परिवर्तन की लड़ाई बताया गया था।

इस पर नेहा बोरा के वकील ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन की मांग करने में कुछ गलत नहीं है। अदालत ने पूछा कि क्या उसे इस मुद्दे में जाने की जरूरत है। ASG ने आपत्ति जताते हुए कहा कि सत्ता परिवर्तन वोट के जरिए होना चाहिए, न कि नई दिल्ली के बीचों-बीच असामाजिक तत्वों के जुटने से, और सरकार की चिंता शांति व कानून-व्यवस्था बनाए रखने की है।

नोटिस से पहले विवेक के इस्तेमाल पर क्या बोले ASG

मजिस्ट्रेट ने नोटिस जारी करने से पहले स्वतंत्र रूप से विचार किया या नहीं, इस पर ASG ने कहा कि मामले में जानकारी का स्पष्ट स्रोत मौजूद है। उन्होंने जनरल डायरी की प्रविष्टि, पहले की FIR, अपराधों के रिकॉर्ड और उस समय सड़कों के हालात का हवाला दिया। ASG के अनुसार जांच अधिकारी को भी बुलाकर मजिस्ट्रेट ने स्पष्टीकरण लिया था, जो एक तरह की सुनवाई थी।

ASG ने यह भी कहा कि शनिवार को SEM की अदालत में होने वाली सुनवाई में नेहा बोरा के पास कई विकल्प हैं। वह अपने वकील के साथ आ सकती हैं, अकेले पेश हो सकती हैं या वकील को भेज सकती हैं। साथ ही उन्होंने जोर दिया कि शांति भंग की आशंका के चलते नेहा बोरा को बॉन्ड देना ही पड़ेगा।

आगे क्या

अब सबकी नजर शुक्रवार शाम 6 बजे आने वाले फैसले पर है। इसी से तय होगा कि शनिवार को SEM के सामने होने वाली कार्यवाही किस रूप में आगे बढ़ेगी।

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