नेपाल: तिब्बत सीमा के पास हिमलुंग हिमाल बेस कैंप में हिमस्खलन, लापता लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे, राहत में मुश्किलें

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नेपाल: तिब्बत सीमा के पास हिमलुंग हिमाल बेस कैंप में हिमस्खलन, लापता लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे, राहत में मुश्किलें

पश्चिमी नेपाल के मनांग जिले में तिब्बत सीमा से सटे हिमलुंग हिमाल के बेस कैंप पर रविवार सुबह हिमस्खलन आ गया, जिसकी चपेट में आने से कई पर्वतारोही और सहयोगी स्टाफ लापता हो गए हैं। यह घटना ऐसे समय हुई है जब भारी बर्फबारी और खराब मौसम के चलते नेपाल के कई हिस्सों में पहले से ही अलर्ट जारी था।

कितने लोग लापता — आंकड़ों में अंतर

लापता लोगों की संख्या को लेकर शुरुआती रिपोर्टों में भिन्नता सामने आई है। अभियान आयोजक कंपनी हिमालयन हॉलिडेज के महाप्रबंधक बरुण भंडारी ने शुरुआत में करीब छह नेपाली कर्मियों के लापता होने की बात कही। वहीं एक्सपीडिशन ऑपरेटर्स एसोसिएशन नेपाल के महासचिव ऋषि भंडारी के हवाले से बाद में यह आंकड़ा 10 बताया गया, जिनमें दो लोग इमेजिन नेपाल प्राइवेट लिमिटेड से और आठ हिमालयन हॉलिडेज नेपाल से जुड़े थे। कुछ रिपोर्टों में यह संख्या आगे बढ़कर 14 तक पहुंचने की बात भी कही गई है। चूंकि यह घटना अभी घटनाक्रम के दौर में है, इसलिए लापता लोगों की सटीक और अंतिम संख्या की पुष्टि होना अभी बाकी है।

अभियान आयोजक मिंगमा ग्याल्जे शेरपा ने पुष्टि की कि उनकी टीम के दो रसोई कर्मचारी भी लापता लोगों में शामिल हैं। उनके मुताबिक, हिमस्खलन रविवार सुबह हुआ। शेरपा और अन्य सहयोगी कर्मी संयुक्त अरब अमीरात से आने वाले एक दल के 1 अक्तूबर को पहुंचने की तैयारी में रस्सियां लगाने और टेंट व्यवस्थित करने का काम कर रहे थे, तभी पहाड़ से बर्फ और मलबे का सैलाब बेस कैंप की ओर बढ़ आया।

असामान्य घटना, राहत कार्य में अड़चन

हिमालयन हॉलिडेज के महाप्रबंधक बरुण भंडारी ने इसे असामान्य घटना बताते हुए कहा कि इस सटीक इलाके में इससे पहले कभी ऐसा हिमस्खलन नहीं हुआ, क्योंकि बेस कैंप का जमीन काफी समतल है। उनकी कंपनी लापता लोगों की सटीक संख्या की पुष्टि के लिए नेपाल पर्यटन बोर्ड के साथ समन्वय कर रही है और बचाव हेलीकॉप्टर बेस कैंप तक भेजने का प्रयास जारी है। हालांकि खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर की पहुंच में दिक्कतें आ रही हैं। उल्लेखनीय है कि 7,126 मीटर ऊंचे हिमलुंग हिमाल के लिए हेलीकॉप्टर उड़ानों को अतिरिक्त परमिट की जरूरत होती है, जिससे पहाड़ तक पहुंचना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

भारी बर्फबारी और खराब मौसम बना वजह

इलाके में बीते कई दिनों से लगातार भारी बर्फबारी हो रही थी, जिसके चलते पर्वतारोहण दलों को चढ़ाई से पीछे हटना पड़ा था। मिंगमा ग्याल्जे शेरपा के अनुसार, पिछले सप्ताह मौसम चेतावनी जारी होने के बाद ज्यादातर अभियान और रस्सी बिछाने वाली टीमों ने पहाड़ की ढलानें खाली कर दी थीं, जबकि कुछ लोग वहीं रुके रह गए थे। बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने दबाव के असर से नेपाल के पहाड़ी इलाकों में भारी बर्फबारी और मैदानी क्षेत्रों में लगातार बारिश हो रही है, जिससे देश के कई हिस्सों में यातायात प्रभावित हुआ है और स्थानीय प्रशासन को कई मार्ग बंद करने पड़े हैं। पर्यटन अधिकारियों और पर्यटन विभाग ने ट्रेकर्स व पर्वतारोहियों से मौसम की स्थिति में सुधार होने तक अपनी गतिविधियां रोकने की सलाह दी है।

पिछली आपदा की पृष्ठभूमि

यह हिमस्खलन ऐसे समय आया है जब नेपाल पिछले महीने रासुवा में आई विनाशकारी बाढ़ से अभी पूरी तरह उबरा भी नहीं था। ग्लेशियर टूटने और भूस्खलन से जुड़ी उस आपदा में 1,300 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और 5,000 से ज्यादा लोग लापता हो गए थे। त्रिशूली नदी किनारे बसी बस्तियां उस बाढ़ में बह गई थीं, जिसने नेपाल के पर्यटन उद्योग को गहरा झटका दिया था। हिमलुंग हिमाल पर ताजा हिमस्खलन ने एक बार फिर नेपाल के पर्वतीय पर्यटन क्षेत्र की सुरक्षा चुनौतियों को उजागर किया है।

फिलहाल बचाव अभियान जारी है और मौसम में सुधार होते ही हेलीकॉप्टर के जरिये बेस कैंप तक पहुंचने का प्रयास किया जाएगा। लापता लोगों की पहचान और उनकी सही संख्या को लेकर आधिकारिक पुष्टि की प्रतीक्षा है।

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