आठवले का दावा: फडणवीस और उद्धव ठाकरे को हमेशा के लिए साथ ला सकता हूं, महायुति में खटपट के बीच आया बयान

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रामदास आठवले का दावा: फडणवीस-उद्धव ठाकरे को साथ ला सकता हूं | महायुति में खटपट

केंद्रीय राज्य मंत्री और RPI (आठवले) के प्रमुख रामदास आठवले ने शुक्रवार को मुंबई में कहा कि वे भविष्य में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना (यूबीटी) अध्यक्ष उद्धव ठाकरे को हमेशा के लिए एक साथ लाने की कोशिश कर सकते हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद महायुति के घटक दलों में आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं।

क्या कहा आठवले ने

आठवले ने मंच साझा करने की घटना पर चुटकी लेते हुए कहा कि फडणवीस और उद्धव ठाकरे का एक मंच पर आना कभी सोचना भी मुश्किल था, लेकिन राज ठाकरे ने दोनों को एक दिन के लिए साथ ला दिया। उनके मुताबिक नेता शादियों और सामाजिक आयोजनों में अक्सर एक साथ दिखते हैं, और वे भी भविष्य में दोनों को स्थायी रूप से साथ लाने का प्रयास कर सकते हैं। यह प्रयास कब होगा, इस सवाल का उन्होंने सीधा जवाब नहीं दिया।

दादर के कार्यक्रम में क्या हुआ था

गुरुवार, 29 अक्टूबर को मुंबई के दादर में मराठी कार्टून के सौ साल के सफर पर आधारित एक पुस्तक का विमोचन हुआ। इस कार्यक्रम में फडणवीस, उद्धव ठाकरे और मनसे प्रमुख राज ठाकरे एक ही मंच पर नजर आए। फडणवीस ने कहा कि इसमें किसी को हैरानी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि अलग-अलग दलों के नेताओं का साथ बैठना, हंसना और चाय पीना महाराष्ट्र की राजनीतिक परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने मुंबई में कार्टूनिस्टों के लिए एक गैलरी बनवाने की पहल करने की बात भी कही और इसमें दोनों ठाकरे बंधुओं का सहयोग मांगने का भरोसा दिया।

कार्यक्रम से पहले तीनों नेताओं की बंद कमरे में संक्षिप्त मुलाकात की भी खबरें आईं, जिसे सहयोगियों ने शिष्टाचार भेंट बताया। यह एक सांस्कृतिक आयोजन था, और इससे किसी राजनीतिक गठजोड़ की पुष्टि नहीं होती।

विधान परिषद चुनाव के नतीजे

महाराष्ट्र की पांच सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था। नतीजों में महा विकास अघाड़ी को तीन और महायुति को दो सीटें मिलीं। नागपुर स्नातक क्षेत्र में कांग्रेस ने अपनी सीट बचा ली, जिसे मुख्यमंत्री फडणवीस के गृह क्षेत्र में भाजपा के लिए बड़ा झटका माना गया। चार राज्यों की कुल 28 सीटों में एनडीए को 16 सीटें मिलीं, जिनमें कर्नाटक की सभी चार सीटें शामिल हैं।

आठवले ने भी माना कि एनडीए पांचों सीटें जीतना चाहता था, लेकिन महाराष्ट्र में आंतरिक मतभेदों के कारण नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि गठबंधन जनादेश स्वीकार करता है।

महायुति में आरोप-प्रत्यारोप

नतीजों के बाद भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता नवनाथ बन ने आरोप लगाया कि शिवसेना ने पुणे और नागपुर में गठबंधन धर्म नहीं निभाया। उनका दावा था कि पुणे में एक निर्दलीय उम्मीदवार को शिवसेना के आखिरी वक्त के समर्थन से महायुति को नुकसान हुआ और शिवसेना साथ देती तो पांचों सीटें जीती जा सकती थीं।

शिवसेना ने इन आरोपों को खारिज किया। पार्टी प्रवक्ता आनंद परांजपे ने कहा कि पुणे स्नातक सीट पर भाजपा ने ऐसी उम्मीदवार उतारीं, जो नामांकन के समय पार्टी की सदस्य नहीं थीं, और भाजपा को आत्ममंथन करना चाहिए। शिवसेना के अब्दुल सत्तार ने एकनाथ शिंदे को फिर से मुख्यमंत्री बनाने की बात भी कही।

इन आरोपों पर आठवले ने कहा कि राजनीति में बयानबाजी आम है, महायुति और महा विकास अघाड़ी दोनों के नेता एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे हैं। भाजपा और शिवसेना के मतभेद बातचीत से सुलझ जाएंगे और इसमें चिंता की कोई बड़ी बात नहीं है।

पृष्ठभूमि

भाजपा और अविभाजित शिवसेना का गठबंधन 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर टूट गया था। उसके बाद उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ सरकार बनाई। 2022 में शिवसेना में हुई बगावत के बाद एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री बने, और 2024 के विधानसभा चुनाव में महायुति की जीत के बाद फडणवीस ने यह पद संभाला। 2025 में मराठी भाषा के मुद्दे पर एक संयुक्त रैली में उद्धव और राज ठाकरे करीब 20 साल बाद एक मंच पर आए थे।

फिलहाल फडणवीस और उद्धव ठाकरे के बीच किसी राजनीतिक समीकरण की आधिकारिक पुष्टि नहीं है। आठवले का बयान उनकी अपनी इच्छा और चुटकी के रूप में सामने आया है।

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