खरगे के ‘सभी चुनाव अवैध’ बयान पर शिवराज का पलटवार: ‘हार के बाद जनादेश का अपमान कांग्रेस की पुरानी आदत’

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खरगे के 'सभी चुनाव अवैध' बयान पर शिवराज का पलटवार: 'हार के बाद जनादेश का अपमान कांग्रेस की पुरानी आदत'

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें खरगे ने देश के सभी चुनावों को “अवैध” बताया था। चौहान ने कहा कि चुनाव हारने के बाद जनादेश का अपमान करना और चुनाव आयोग पर सवाल उठाना कांग्रेस की पुरानी आदत है। खरगे ने शनिवार को कर्नाटक के कलबुर्गी में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं को भंग कर मतपत्रों से नए चुनाव कराने की मांग की थी।

खरगे ने क्या कहा था

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, 3 अक्तूबर को कलबुर्गी में पत्रकारों से बातचीत में खरगे ने कहा कि देश अवैध चुनावों के जरिए चलाया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी “अवैध” बताया। खरगे ने ईवीएम के दुरुपयोग का आरोप लगाया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर भी सवाल उठाए। उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून का भी जिक्र किया।

कानूनी रास्ता अपनाने के सवाल पर खरगे ने कहा कि कानून, न्यायपालिका और चुनाव आयोग पर “उनका” नियंत्रण है। ये सभी बातें खरगे के आरोप हैं, जिनके समर्थन में उन्होंने कोई सबूत सार्वजनिक नहीं किया।

शिवराज का जवाब

चौहान ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि खरगे का बयान हताशा और हार की मानसिकता को दर्शाता है और प्रधानमंत्री व गृह मंत्री को “अवैध” कहना संवैधानिक संस्थाओं और जनादेश का अपमान है। उन्होंने यह भी दावा किया कि बयान राहुल गांधी के निर्देश पर दिया गया। इस दावे का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है। चौहान ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट कई बार ईवीएम की विश्वसनीयता पर मुहर लगा चुका है।

रविवार को उन्होंने कांग्रेस के रुख पर और सवाल उठाए। चौहान ने कहा कि कांग्रेस जीतती है तो चुनाव आयोग उसे ठीक लगता है और हारने पर खराब। उन्होंने पूछा कि अगर व्यवस्था गलत है तो कांग्रेस कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में चुनाव कैसे जीत गई।

मतपत्र से चुनाव की मांग पर चौहान ने कहा कि कांग्रेस देश को 80 और 90 के दशक में ले जाना चाहती है। उनके अनुसार तकनीक के इस्तेमाल से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता आई है। उन्होंने कांग्रेस पर आपातकाल का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि चुनाव आयोग को बदनाम करना और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करना पार्टी के “DNA” में है। चौहान ने इसे देश को अराजकता की ओर ले जाने वाला कदम बताया और कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए सभी दलों को जिम्मेदारी से काम करना चाहिए।

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर भी आरोप-प्रत्यारोप

चौहान ने यह भी कहा कि खरगे ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर जनता को गुमराह करने की कोशिश की। उनके मुताबिक कांग्रेस सरकारों ने दशकों तक बिना किसी कानून या पारदर्शी चयन प्रक्रिया के नियुक्तियां कीं। खरगे ने 2023 के कानून पर सवाल उठाया था, जिसमें चयन समिति में प्रधान न्यायाधीश की जगह केंद्रीय मंत्री को रखा गया। यह इस पूरे विवाद का एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है।

अब तक की स्थिति

खरगे के बयान और चौहान की प्रतिक्रिया के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गया है। शिवराज सिंह चौहान के बयान पर कांग्रेस की ओर से जवाब की जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है।

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