सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) ने भारतीय सेना को नागास्त्र-1R लोइटरिंग म्यूनिशन की 450 इकाइयों की आपूर्ति एक ही खेप में पूरी कर दी है। कंपनी के अनुसार, किसी भी निर्माता द्वारा सेना को एक बार में दी गई लोइटरिंग म्यूनिशन की यह सबसे बड़ी खेप है। सेना ने यह ऑर्डर इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट के तहत दिया था। कंपनी के इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
परीक्षणों में कंपनी के खरा उतरने का दावा
कंपनी के मुताबिक, मार्च 2025 में हुए तकनीकी परीक्षणों में चार कंपनियों ने हिस्सा लिया था। इनमें केवल SDAL ही सभी ऑपरेशनल मानकों पर खरी उतरी। कंपनी का कहना है कि सिस्टम की सटीकता को कई लाइव ट्रायल में लक्ष्य पर निशाना लगाने की क्षमता के आधार पर परखा गया।
क्या है नागास्त्र-1R की खासियत
कंपनी के अनुसार, नागास्त्र-1R को सेना की विशेष जरूरतों के हिसाब से तैयार किया गया है। इसका इस्तेमाल कम दूरी के अभियानों में कामिकाजे हमले के लिए किया जा सकता है, यानी ऐसा हमला जिसमें म्यूनिशन लक्ष्य से टकराकर खुद नष्ट हो जाता है। इसमें मिशन को बीच में रद्द करने और ड्रोन को सुरक्षित वापस हासिल करने का विकल्प भी दिया गया है।
नागास्त्र-1 की पृष्ठभूमि
स्वदेशी लोइटरिंग म्यूनिशन नागास्त्र-1 को सोलर इंडस्ट्रीज नागपुर की सहायक कंपनी इकोनॉमिक एक्सप्लोसिव्स लिमिटेड (EEL) ने बेंगलुरु की कंपनी जेड-मोशन की मदद से डिजाइन और विकसित किया है। कंपनी का दावा है कि इसमें 75 फीसदी से ज्यादा स्वदेशी सामग्री है।
आगे की योजना
कंपनी अब अपनी लोइटरिंग म्यूनिशन प्रणालियों की तैनाती का विस्तार करने और भारतीय सशस्त्र बलों के साथ दीर्घकालिक सहयोग बढ़ाने पर ध्यान दे रही है।
ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी संघर्षों के संदर्भ में इस स्वदेशी प्रणाली को कम लागत में सटीक हमले की क्षमता वाला विकल्प बताया जा रहा है। हाल के संघर्षों में ड्रोन तकनीक की भूमिका अहम रही है, खासकर आर्मेनिया-अजरबैजान, सीरिया, सऊदी अरब के तेल क्षेत्रों और रूस-यूक्रेन के मामलों में।

