यूपी राज्यसभा चुनाव: सपा और भाजपा ने नहीं उतारे अतिरिक्त प्रत्याशी, नाथवानी की पीएम मोदी की सराहना पर बढ़ी सियासी चर्चा

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यूपी राज्यसभा चुनाव 2026: सपा-भाजपा ने नहीं उतारे अतिरिक्त प्रत्याशी, नाथवानी की पोस्ट चर्चा में

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) ने तीसरा और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने नौवां प्रत्याशी नहीं उतारा है। राजनीतिक आकलन के मुताबिक, दोनों दलों ने क्रॉस वोटिंग के जोखिम से बचने के लिए यह रणनीति अपनाई है। इसी बीच सपा के प्रत्याशी धनराज परिमल नाथवानी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना वाली सोशल मीडिया पोस्ट से प्रदेश की राजनीति में चर्चा तेज हो गई है। राज्यसभा की इन सीटों के लिए मतदान 16 अक्टूबर को प्रस्तावित बताया गया है।

पीएम मोदी के 25 साल पर नाथवानी की पोस्ट

नाथवानी ने बुधवार, 7 अक्टूबर को सोशल मीडिया मंच X पर पोस्ट कर प्रधानमंत्री मोदी को उनके 25 साल के नेतृत्व के लिए बधाई दी। उन्होंने लिखा कि मोदी ने 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी और उसके बाद शासन प्रमुख के रूप में 25 साल पूरे किए हैं। पोस्ट में उन्होंने इस सफर को नेतृत्व, समर्पण और सेवा के संकल्प से जोड़ा। नाथवानी ने गुजरात की सेवा से लेकर देश का नेतृत्व करने तक की यात्रा को उल्लेखनीय बताया और प्रधानमंत्री को राष्ट्र सेवा के लिए शुभकामनाएं दीं।

रिपोर्टों के अनुसार, भाजपा की ओर से इस पर कहा गया कि यह प्रशंसा राजनीतिक मजबूरी नहीं, बल्कि दिल से कही गई बात है। इन्हीं रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री को इस अवसर पर बधाई नहीं दी है। नाथवानी या सपा नेतृत्व की ओर से इस पर और क्या कहा गया, यह जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।

कौन हैं धनराज नाथवानी

नाथवानी रिलायंस समूह में वरिष्ठ पद पर कार्यरत हैं। सपा ने उन्हें अपने दूसरे प्रत्याशी के रूप में रामगोपाल यादव के साथ उतारा है। उनके पिता परिमल नाथवानी राज्यसभा सदस्य हैं। रिपोर्टों में बताया गया है कि वे इसी वर्ष झारखंड से भाजपा समर्थित प्रत्याशी के रूप में राज्यसभा पहुंचे हैं। इसी वजह से नाथवानी की उम्मीदवारी पहले से ही चर्चा में रही है।

अतिरिक्त प्रत्याशी न उतारने के पीछे क्या है आकलन

राजनीतिक आकलन के मुताबिक, विधानसभा में मौजूदा संख्याबल के आधार पर भाजपा आठ और सपा दो सीटें आसानी से जीत सकती है। शुरुआत में सपा के तीसरे और भाजपा के नौवें प्रत्याशी को लेकर कयास थे, लेकिन दोनों दलों ने ऐसा नहीं किया।

सपा के लिए तीसरी सीट जीतने के लिए करीब 10 से 11 अतिरिक्त विधायकों के वोट जुटाने की जरूरत बताई जा रही थी। पिछले राज्यसभा चुनाव में विधायकों की बगावत और क्रॉस वोटिंग के अनुभव को देखते हुए पार्टी ने जोखिम नहीं लिया, यह आकलन है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संभावित हार से कार्यकर्ताओं के मनोबल पर असर की आशंका भी जताई गई। भाजपा के बारे में भी कहा जा रहा है कि कुछ विधायकों के टिकट कटने की चर्चाओं के बीच निष्ठा बदलने की आशंका को देखते हुए उसने सुरक्षित रणनीति अपनाई।

इस बारे में दोनों दलों की ओर से आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

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