वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की बाघिन वायुसेना की मदद से बक्सा पहुंची, 2 अक्टूबर को जंगल में छोड़ने की तैयारी

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वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की बाघिन वायुसेना की मदद से बक्सा पहुंची, 2 अक्टूबर को जंगल में छोड़ने की तैयारी

पटना/अलीपुरद्वार: बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की तीन साल की एक बाघिन को वायुसेना की मदद से पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व पहुंचाया गया है। बक्सा में बाघों की आबादी बहाल करने की योजना के तहत यह स्थानांतरण हुआ है। फिलहाल बाघिन को बक्सा के एक विशेष एनक्लोजर में निगरानी में रखा गया है। जानकारी के अनुसार उसे 2 अक्टूबर को जंगल में छोड़ा जाएगा।

कैसे चला पूरा अभियान

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार करीब 70 सदस्यों की बचाव टीम खराब मौसम के बावजूद लगभग एक हफ्ते तक वाल्मीकि के जंगलों में बाघिन की तलाश करती रही। 29 सितंबर की शाम बाघिन को बेहोश किया गया। बेहोशी के समय को लेकर रिपोर्टों में थोड़ा अंतर है: आपके विवरण में शाम करीब 5 बजे और अन्य रिपोर्ट में 5:30 बजे का उल्लेख है। उसे रेडियो-कॉलर लगाया गया और स्वास्थ्य जांच के बाद सड़क मार्ग से करीब 125 किलोमीटर दूर गोरखपुर हवाई अड्डे ले जाया गया।

गोरखपुर से बाघिन को वायुसेना के हेलीकॉप्टर से उत्तर बंगाल के हासीमारा एयर फोर्स स्टेशन लाया गया, जहां वह बुधवार (30 सितंबर) तड़के पहुंची। ETV भारत की रिपोर्ट के मुताबिक यह वायुसेना का Mi-17 हेलीकॉप्टर था। लैंडिंग के बाद वन्यजीव पशु चिकित्सकों और विशेषज्ञों ने एक घंटे से ज्यादा समय तक उसकी विस्तृत जांच की।

हासीमारा से बक्सा की करीब 37 किलोमीटर की दूरी बाघिन ने कड़ी सुरक्षा के बीच सड़क मार्ग से तय की। बुधवार सुबह लगभग 6:45 बजे उसे राजाभातखवा गेट के रास्ते बक्सा के जंगल क्षेत्र में पहुंचाया गया। गेट पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था।

एनक्लोजर में निगरानी, 2 अक्टूबर को रिहाई की योजना

बाघिन को बक्सा में ’25 माइल’ नाम के वन विभाग के निर्धारित स्थल पर बने एनक्लोजर में रखा गया है। वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञ उसके स्वास्थ्य, व्यवहार और नए माहौल में ढलने पर नजर रख रहे हैं। रिहाई के बाद भी उसकी निगरानी की पर्याप्त व्यवस्था की गई है।

पश्चिम बंगाल के वन मंत्री मनोज कुमार उरांव ने पत्रकारों से कहा कि पुनर्स्थापन कार्यक्रम के लिए विभाग को ठीक वैसी ही युवा बाघिन चाहिए थी, जैसी मिली है। उन्होंने बताया कि बाघिन स्वस्थ है और उसका व्यवहार सामान्य है। उन्होंने इसे इस तरीके से लाए गए पहले बाघ के रूप में बताया।

क्यों अहम है यह कदम

यह स्थानांतरण बक्सा टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ाने की बड़ी पहल का हिस्सा है। बक्सा उत्तर बंगाल के अलीपुरद्वार जिले में है और भूटान व असम की सीमा से जुड़ा है। यहां बाघ बेहद कम दिखते रहे हैं, इसलिए दूसरे राज्य से बाघ लाकर आबादी बढ़ाने की योजना बनी। बाघिन को चुनने, पकड़ने और ले जाने में वन, वन्यजीव और रक्षा विभागों के बीच तालमेल रहा।

इस तरह अंतर-राज्यीय स्थानांतरण पहले भी हुए हैं। दिसंबर 2025 में मध्य प्रदेश के पेंच टाइगर रिजर्व की एक बाघिन को वायुसेना के Mi-17 हेलीकॉप्टर से जयपुर लाकर सड़क मार्ग से राजस्थान के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व पहुंचाया गया था।

आपके विवरण के अनुसार बिहार से किसी बाघ को पहली बार दूसरे राज्य के टाइगर रिजर्व में भेजा गया है। साथ ही बताया गया है कि इस अभियान में बिहार और बंगाल के वन विभागों, भारतीय वन्यजीव संस्थान और वायुसेना का समन्वय रहा। हमारे शोध में इन दोनों बातों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं मिली।

आगे क्या

अब नजर 2 अक्टूबर पर रहेगी, जब बाघिन को एनक्लोजर से खुले जंगल में छोड़ने की योजना है। रिहाई के बाद उसके रेडियो-कॉलर से उसकी गतिविधियों और नए इलाके में ढलने पर निगरानी रखी जाएगी।

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