नीट-यूजी 2026 पेपर लीक के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में सुधारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को अहम सुनवाई हुई, जिसमें अदालत ने खुद NTA के मुख्यालय का दौरा करने की मंशा जताई। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि वे यह देखना चाहते हैं कि सुधार व्यवस्था वास्तव में जमीन पर लागू है या नहीं।
कोर्ट खुद जाकर करेगा जांच
सुनवाई के दौरान जस्टिस नरसिम्हा ने कहा, “हम एक दिन वहां आएंगे, मैं और मेरे भाई जज।” उन्होंने कहा कि अदालत यह देखना चाहती है कि दिल्ली के मिंटो रोड स्थित NTA के नए कार्यालय में सिस्टम वास्तव में काम कर रहा है या नहीं, और वहां मैनपावर व इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं किस हद तक मौजूद हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि NTA में कम से कम आधा स्टाफ स्थायी होना चाहिए, न कि पूरी तरह अन्य विभागों से प्रतिनियुक्ति पर निर्भर।
नंदन नीलेकणि कमेटी से मांगी रिपोर्ट
सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अगुआई वाली हाई-पावर्ड टास्क फोर्स ने डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली पूर्ववर्ती एक्सपर्ट कमेटी (HLCE) के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया है और उम्मीद है कि वह सितंबर के अंत तक अपनी पहली अंतरिम रिपोर्ट सौंप देगी। सुप्रीम कोर्ट ने हाई-पावर्ड कमेटी के साथ तालमेल बिठाने वाले डीओपीटी के संयुक्त सचिव को कमेटी की प्रगति पर दो हफ्तों के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है और मामले की अगली सुनवाई तीन हफ्ते बाद तय की है।
कोर्ट ने साफ किया कि कमेटी की सिफारिशें केवल रिपोर्ट तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें वास्तव में लागू किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा, “प्रगति एक बात है, लेकिन सबसे अहम है इसका संस्थागतकरण।” अदालत ने पहले की राधाकृष्णन कमेटी की सिफारिशों का हवाला देते हुए कहा कि विशेषज्ञ सुझावों को सिर्फ कागजों पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
लिखित से डिजिटल परीक्षा की ओर बदलाव पर भी चर्चा
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लिखित परीक्षा से डिजिटल यानी कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली की ओर बदलाव चरणबद्ध तरीके से किया जाना चाहिए। कोर्ट ने वकीलों और राज्यों से कहा कि वे अपने सुझाव एक निर्धारित ईमेल आईडी के जरिए भेज सकते हैं। गौरतलब है कि यह सुनवाई फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) और यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट की उन याचिकाओं पर हो रही है, जिनमें NTA में ढांचागत सुधार की मांग की गई है। FAIMA ने प्रश्नपत्रों की डिजिटल लॉकिंग, नीट-यूजी को कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली में बदलने और केंद्रवार परिणाम प्रकाशित करने जैसे सुझाव दिए हैं, जबकि यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट ने संसद के प्रति जवाबदेह एक सांविधिक (स्टैच्युटरी) नेशनल टेस्टिंग अथॉरिटी बनाने की मांग की है।
NTA में अब तक हुए बड़े बदलाव
नीट 2026 परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी, जिसके बाद से NTA लगातार आलोचनाओं के घेरे में रहा है। एजेंसी ने परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के तहत अपने 50 से अधिक कर्मचारियों को हटाया था और महत्वपूर्ण पदों पर पेशेवरों की नियुक्ति के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी। हाल ही में एनटीए में दो निदेशकों और एक संयुक्त निदेशक की नियुक्ति की गई है — IPS अधिकारी रवि कुमार सिंह और IAS अधिकारी प्रसन्ना वेंकटेश वी को निदेशक, जबकि भारतीय राजस्व सेवा (सीमाशुल्क एवं अप्रत्यक्ष कर) के अधिकारी अमित समदरिया को संयुक्त निदेशक नियुक्त किया गया है। कोर्ट को यह भी बताया गया कि NTA को अब दिल्ली के मिंटो रोड के पास एक स्थायी कार्यालय भी आवंटित कर दिया गया है।
अब आगे की सुनवाई नए हलफनामे के दाखिल होने के बाद होगी, जिसमें कमेटी की सिफारिशों और उनके क्रियान्वयन की स्थिति पर विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

