आगरा पुलिस नौ साल से ज्यादा समय से फरार 50 हजार रुपये के इनामी करतार सिंह की तलाश में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद ले रही है। करतार सिंह पर 14 साल की किशोरी के अपहरण और बाद में जोड़ी गई दुष्कर्म की धाराओं का मामला दर्ज है। पुलिस उसकी अलग-अलग उम्र और हुलिए की काल्पनिक तस्वीरें तैयार करवा रही है और इन्हें पुलिस के आंतरिक पोर्टलों, सोशल मीडिया समूहों और अन्य राज्यों की पुलिस के साथ साझा कर रही है। पुलिस के मुताबिक नगर जोन में ऐसे 22 इनामी अपराधी हैं, जिनकी तलाश में डिजिटल तरीके अपनाए जा रहे हैं।
क्या है मामला
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार करतार सिंह मूल रूप से फिरोजाबाद के टूंडला का रहने वाला है और आगरा के नरायच क्षेत्र में रहता था। फरवरी 2013 में थाना एत्मादुद्दौला में 14 वर्षीय किशोरी के अपहरण का मामला दर्ज हुआ। पुलिस ने किशोरी को बरामद किया और उसके बयान के बाद मामले में दुष्कर्म की धाराएं जोड़ी गईं। आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
मुकदमे की सुनवाई के बाद अप्रैल 2016 में अदालत ने उसे अपहरण के मामले में साढ़े तीन साल की सजा सुनाई। सजा पूरी होने पर वह 1 सितंबर 2016 को जेल से रिहा हो गया।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद फरार
पुलिस के अनुसार रिहाई के बाद अभियोजन पक्ष ने दुष्कर्म के मामले में सजा बढ़ाने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया। दिसंबर 2016 में हाईकोर्ट ने करतार सिंह को अदालत में तलब करने के निर्देश दिए। पुलिस जब उसे तलाशने पहुंची तो वह फरार हो चुका था। पुलिस का कहना है कि वह अविवाहित है और परिजनों के संपर्क में नहीं था, इसलिए कोई सुराग नहीं मिल सका। 21 जनवरी 2018 को पुलिस ने उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया।
छह राज्यों में दबिश
पुलिस के मुताबिक उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत छह राज्यों में दबिश दी गई। आगरा की सीमा मध्य प्रदेश और राजस्थान से लगती है, जबकि दिल्ली, हरियाणा और पंजाब भी ज्यादा दूर नहीं हैं, इसलिए पुलिस को आशंका थी कि वह इन्हीं राज्यों में छिपा हो सकता है। कई जिलों के रेलवे और बस स्टेशनों पर उसके पोस्टर लगाए गए। दिल्ली और लखनऊ में छिपे होने की सूचना पर पुलिस टीमों ने कई दिन डेरा डाला, लेकिन उसका सुराग नहीं मिला।
अब एआई से तलाश
डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास ने बताया कि नगर जोन में 22 इनामी अपराधी हैं और उनकी गिरफ्तारी के लिए पारंपरिक पुलिसिंग के साथ डिजिटल साधन भी इस्तेमाल हो रहे हैं। करतार सिंह के मामले में एआई से अलग-अलग उम्र और हुलिए की काल्पनिक तस्वीरें बनाई जा रही हैं, जिन्हें पुलिस के आंतरिक पोर्टलों, सोशल मीडिया समूहों और दूसरे राज्यों की पुलिस के साथ साझा किया जा रहा है। इसके अलावा उसके बैंक खातों, टोल प्लाजा से आवाजाही, गैस कनेक्शन और सिम कार्ड पर भी नजर रखी जा रही है।
एसीपी छत्ता श्वेता वर्मा ने बताया कि करतार सिंह की तलाश में टीम लगी है और कई राज्यों में खोज की जा चुकी है। एआई से तैयार फोटो पोर्टल पर डाली जा रही है, ताकि उसकी पहचान के प्रयास किए जा सकें।
ध्यान रखने वाली बात
एआई से बनाई गई तस्वीरें अनुमान पर आधारित काल्पनिक चित्र हैं, उसकी असली तस्वीर नहीं। इसलिए ऐसी तस्वीर के आधार पर किसी व्यक्ति को करतार सिंह बताना ठीक नहीं होगा। किसी के पास वास्तविक जानकारी हो तो उसे पुलिस को देनी चाहिए।

