आयकर विभाग की इन्वेस्टीगेशन विंग ने बहुजन समाज पार्टी के दिवंगत विधायक उमाशंकर सिंह से जुड़ी कंपनियों के मामले में 400 करोड़ रुपये से अधिक की कर देनदारी का आकलन किया है। रिपोर्टों के अनुसार छापेमारी में मिले साक्ष्यों और कर चोरी के प्रमाणों के विश्लेषण के बाद तैयार रिपोर्ट को अंतिम निर्धारण के लिए नई दिल्ली स्थित आयकर मुख्यालय भेजा जाएगा। इसके बाद विभाग संबंधित कंपनियों से यह रकम वसूलने की कार्रवाई करेगा। यह आकलन अभी अंतिम नहीं है और इन आरोपों पर किसी अदालत का फैसला नहीं आया है।
क्या है मामला
रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि उमाशंकर सिंह से जुड़ी कंपनियों ने बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया, जिससे राज्य सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ। इसी के साथ आयकर विभाग को भी कर नहीं मिला। विभाग के अनुसार ये आरोप उसकी जांच का आधार हैं। रसड़ा (बलिया) से विधायक उमाशंकर सिंह का इस साल 6 अगस्त को निधन हो गया था।
फरवरी में हुई थी छापेमारी
आयकर विभाग की इन्वेस्टीगेशन विंग ने इसी साल फरवरी में उमाशंकर सिंह के ठिकानों पर कार्रवाई की थी। रिपोर्टों के अनुसार 50 से अधिक अधिकारियों की टीम ने लखनऊ, बलिया, सोनभद्र, मिर्जापुर, प्रयागराज और कौशांबी में 30 से अधिक जगहों पर एक साथ छापेमारी की थी। इसमें अवैध खनन और संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों के साथ करीब 10 करोड़ रुपये नकद बरामद होने की बात सामने आई थी।
यह कार्रवाई उनकी छात्रशक्ति कंस्ट्रक्शन कंपनी और साईं राम इंटरप्राइजेज से जुड़ी बताई गई थी, जो सड़क निर्माण और खनन से जुड़े कार्य करती हैं। विभाग को इन कंपनियों के जरिए बड़े पैमाने पर कर चोरी के ठोस सुराग मिलने की बात कही गई थी।
जांच की शुरुआत कैसे हुई
विभाग ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की उस रिपोर्ट के बाद जांच शुरू की थी, जिसमें सोनभद्र में अवैध खनन से करीब 60 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का जिक्र था। इसके बाद विभाग ने मिर्जापुर और सोनभद्र में ड्रोन और सैटेलाइट इमेजिंग के जरिए भी अवैध खनन के साक्ष्य जुटाए।
वसूली को लेकर क्या स्थिति
फिलहाल जिन कंपनियों के नाम सामने आए हैं, उन्हीं के खिलाफ देनदारी का आकलन किया गया है। उमाशंकर सिंह के निधन के बाद परिजनों से वसूली को लेकर विभाग की ओर से कोई सार्वजनिक जानकारी नहीं है। आयकर कानून में आमतौर पर मृतक की कर देनदारी की वसूली उसके कानूनी उत्तराधिकारियों से उन्हें मिली संपत्ति की सीमा तक किए जाने का प्रावधान है, लेकिन इस मामले में ऐसा होगा या नहीं, यह विभाग के अंतिम निर्धारण पर निर्भर करेगा। मामले में सिंह के परिजनों या कंपनियों का पक्ष अभी सामने नहीं आया है।
अब आगे क्या
मुख्यालय से अंतिम निर्धारण होने के बाद ही देनदारी की सही रकम तय होगी। इसके बाद कंपनियों को नोटिस जारी होने और उनके जवाब या अपील की प्रक्रिया शुरू होगी।

