महाराष्ट्र के बुलढाणा से शिवसेना (शिंदे गुट) के विधायक संजय गायकवाड के किसान आत्महत्या पर दिए बयान पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। बुधवार, 28 अक्तूबर को बुलढाणा में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि आत्महत्या करने वाले किसानों के अंतिम संस्कार में किसी को नहीं जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जब जानवर शरीर को खाएंगे, तभी इसके नतीजे का एहसास होगा और लोग यह कदम उठाने से रुकेंगे। विपक्ष ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
किस सवाल पर आया बयान
रिपोर्टों के अनुसार, मीडिया ने गायकवाड से वंचित बहुजन आघाड़ी के नेता प्रकाश आंबेडकर की कथित टिप्पणी पर सवाल पूछा था, जिसमें किसानों को लेकर विवादित बात कही गई थी। रिपोर्टों में उस टिप्पणी के शब्द अलग-अलग बताए गए हैं। गायकवाड ने इसी सवाल का जवाब देते हुए किसान आत्महत्या का मुद्दा उठाया।
गायकवाड ने क्या कहा
विधायक ने कहा कि किसानों को आत्महत्या करने के बजाय अपनी समस्याएं सरकार, स्थानीय विधायक और सांसद के सामने रखनी चाहिए। उनके अनुसार, किसान को सरकार को चिट्ठी लिखनी चाहिए, और जनप्रतिनिधि मिलकर उसकी मदद की कोशिश कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आत्महत्या करने वाले किसान पीछे अपनी पत्नी और बच्चों को बेसहारा छोड़ जाते हैं और उन्हें यह कदम उठाने से पहले परिवार के बारे में सोचना चाहिए। उन्होंने सात फेरों के वादे का जिक्र भी किया।
विवाद का आधार
अंतिम संस्कार में न जाने और शव को जानवरों के खाने की टिप्पणी को लेकर आलोचना हो रही है। रिपोर्टों में कहा गया है कि विपक्षी नेताओं ने इस पर नाराजगी जताई और इसे संवेदनहीन बताया। एक रिपोर्ट में आरटीआई आंकड़ों के हवाले से कहा गया है कि महाराष्ट्र में 54 महीनों में 13,128 किसानों ने आत्महत्या की। इस आंकड़े की पुष्टि मैं मूल दस्तावेज से नहीं कर सका हूं। राज्य में इस साल सूखे और कर्ज के संकट को लेकर भी चिंता जताई जाती रही है।
गायकवाड पहले भी अपने बयानों के कारण विवादों में रहे हैं। सितंबर 2024 में राहुल गांधी को लेकर दिए बयान पर उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ था और जुलाई 2025 में एक कैंटीन कर्मचारी से मारपीट का मामला चर्चा में आया था।
आगे क्या
इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक गायकवाड या शिवसेना (शिंदे गुट) की ओर से बयान पर कोई स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

