एएमयू का 36वां मौसम गुब्बारा 28 किमी ऊंचाई पर फटा, रेडियोसोंड बरेली के मीरगंज में मिला

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एएमयू मौसम गुब्बारा: 36वां गुब्बारा 28 किमी ऊंचाई पर फटा, बरेली में गिरा

अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के भूगोल विभाग ने रविवार को अपना 36वां मौसम गुब्बारा छोड़ा। गुब्बारा करीब 28 किलोमीटर की ऊंचाई पर पहुंचकर फट गया। इसके बाद गुब्बारा और उसमें लगा उपकरण रेडियोसोंड बरेली के मीरगंज क्षेत्र में गिरा। रेडियोसोंड वायुमंडल की ऊपरी परतों में तापमान, नमी और हवा का डेटा जुटाता है।

सुबह 10:30 बजे छोड़ा गया गुब्बारा

गुब्बारा विभाग की छत से रविवार सुबह 10:30 बजे छोड़ा गया। विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सैयद कौसर शमीम ने बताया कि इसके लिए पहले एयर ट्रैफिक कंट्रोल से अनुमति ली गई थी। अनुमति मिलने के बाद ही गुब्बारा छोड़ा गया।

जमीन और ऊंचाई के आंकड़ों में बड़ा अंतर

डॉ. शमीम के अनुसार, गुब्बारा जब अपनी उच्चतम ऊंचाई पर था, तब वहां आर्द्रता 11.24 प्रतिशत और वायुदाब 30.3 मिलीबार दर्ज हुआ। जमीन पर उस समय आर्द्रता 81 प्रतिशत और दबाव 1016 मिलीबार था।

कैसे मिलता है डेटा

डॉ. शमीम ने बताया कि गुब्बारे में करीब छह मीटर की रस्सी बंधी होती है। उसके सिरे पर रेडियोसोंड उपकरण लगा होता है। उसके दाहिनी ओर लगा जीपीएस उपकरण की लोकेशन बताता है। बायीं ओर लगा सेंसर तापमान, आर्द्रता, दबाव और हवा की दिशा व गति का डेटा जुटाकर ट्रांसमीटर को भेजता है। ट्रांसमीटर यह डेटा भूगोल विभाग की छत पर लगे रिसीवर तक पहुंचाता है, जहां वह स्क्रीन पर लगातार दिखता रहता है।

साल भर का डेटा, पूर्वानुमान में उपयोग

भूगोल विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अहमद मुज्तबा सिद्दीकी ने बताया कि महीने में दो गुब्बारे छोड़े जा रहे हैं और साल में 24 गुब्बारे छोड़े जाएंगे। हर महीने के तापमान, आर्द्रता और दबाव के आंकड़ों के आधार पर आने वाले वर्ष के मौसम का पूर्वानुमान लगाया जाएगा।

पृष्ठभूमि

एएमयू में इस परियोजना का पहला गुब्बारा 11 जुलाई 2024 को छोड़ा गया था। उसके बाद से विभाग की छत से समय-समय पर गुब्बारे छोड़े जाते रहे हैं। सितंबर 2024 में पांचवां गुब्बारा करीब 36.8 किमी की ऊंचाई तक पहुंचा था। जुलाई 2025 में 25वां गुब्बारा छोड़ने के दौरान अलीगढ़, जेवर और इंदिरा गांधी हवाई अड्डे के अधिकारियों से अनुमति ली गई थी। उस समय करीब तीन घंटे तक उड़ानें डायवर्ट रही थीं।

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