INS ब्रह्मपुत्र हादसे में नौसेना की कार्रवाई: कैप्टन और लेफ्टिनेंट कमांडर के खिलाफ कोर्ट मार्शल शुरू

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INS ब्रह्मपुत्र हादसा: नौसेना ने कैप्टन और लेफ्टिनेंट कमांडर पर शुरू किया कोर्ट मार्शल

मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में जुलाई 2024 में युद्धपोत INS ब्रह्मपुत्र के आग लगने के बाद पलटने की घटना में भारतीय नौसेना ने दो अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट मार्शल की कार्यवाही शुरू कर दी है। अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्टों के अनुसार कार्रवाई जहाज के कमांडिंग ऑफिसर (कैप्टन) और ऑफिसर ऑफ द डे (लेफ्टिनेंट कमांडर) के खिलाफ है। दोनों पर ड्यूटी में लापरवाही का आरोप है। कैप्टन पर इसके अलावा युद्धपोत को खतरे में डालने (हैजार्डिंग ए नेवल वेसल) का आरोप भी है।

क्या हैं आरोप

रिपोर्टों के मुताबिक कमांडिंग ऑफिसर पर लापरवाही और युद्धपोत को खतरे में डालने के आरोप हैं, जबकि ऑफिसर ऑफ द डे पर लापरवाही का आरोप है। एक अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि सैन्य अदालत की कार्यवाही 12 अक्टूबर को मुंबई में शुरू हुई। रिपोर्टों में दोनों अधिकारियों के नाम नहीं बताए गए हैं। ये अभी सिर्फ आरोप हैं और कार्यवाही जारी है। कोर्ट मार्शल नौसेना की सैन्य न्याय व्यवस्था का हिस्सा है, जिसमें आरोपी अधिकारियों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलता है।

21 जुलाई 2024 को क्या हुआ था

21 जुलाई 2024 की शाम मरम्मत (रिफिट) के दौरान INS ब्रह्मपुत्र में आग लगी थी। नौसेना के बयान के अनुसार डॉकयार्ड के दमकलकर्मियों और बंदरगाह में मौजूद अन्य जहाजों की मदद से अगली सुबह तक आग पर काबू पा लिया गया। इसके बाद 22 जुलाई की दोपहर जहाज बंदरगाह की ओर (पोर्ट साइड) बुरी तरह झुकने लगा। सीधा करने की तमाम कोशिशों के बावजूद वह आंशिक रूप से पलट गया और उसका मस्तूल घाट पर टिक गया।

हादसे में लीडिंग सीमैन सितेंद्र सिंह की जान चली गई। कई दिनों की गोताखोरी के बाद उनका शव बरामद हुआ। नौसेना ने घटना की जांच के आदेश दिए थे।

उस समय उप नौसेना प्रमुख वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने कहा था कि आग बुझाने में बहुत पानी इस्तेमाल हुआ और संभवतः उसी से जहाज का संतुलन बिगड़ा। यह उनकी शुरुआती टिप्पणी थी, जांच का अंतिम निष्कर्ष नहीं। बाद में एक CAG रिपोर्ट के हवाले से सामने आया कि जांच बोर्ड ने आग बुझाने की विशेषज्ञता की कमी, नागरिक दमकल सेवा की मदद न लेने और पश्चिमी नौसैनिक कमान मुख्यालय, डॉकयार्ड तथा जहाज के स्टाफ के बीच तालमेल की कमी जैसी बातें दर्ज की थीं।

जहाज की मौजूदा स्थिति

INS ब्रह्मपुत्र ब्रह्मपुत्र श्रेणी का पहला स्वदेशी निर्देशित मिसाइल युद्धपोत है। इसे अप्रैल 2000 में नौसेना में शामिल किया गया था। हादसे के बाद विदेशी विशेषज्ञों की मदद से सल्वेज अभियान चला और नवंबर-दिसंबर 2024 तक जहाज को सीधा करके ड्राई डॉक में पहुंचाया गया। अब मरम्मत और समुद्री परीक्षण जारी हैं। जहाज को औपचारिक रूप से सेवा में वापस शामिल नहीं किया गया है, और 2027 में इसके संचालन के लिए तैयार होने की उम्मीद जताई जा रही है।

पहले भी हुआ ऐसा हादसा

इसी श्रेणी का युद्धपोत INS बेतवा दिसंबर 2016 में उसी डॉकयार्ड में डॉक से बाहर निकलते समय पलट गया था। रिपोर्टों के अनुसार उस मामले में तीन अधिकारियों को कोर्ट मार्शल कार्यवाही के बाद वरिष्ठता में चार से छह महीने की कमी की सजा मिली थी। दोनों घटनाओं के हालात अलग बताए गए हैं।

अब नजर कोर्ट मार्शल की कार्यवाही और उसके नतीजे पर है। कार्यवाही पूरी होने पर ही आरोपों पर फैसला आएगा।

अपडेट: यह खबर 4 नवंबर 2026 की दोपहर तक उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। नई जानकारी आने पर इसे अपडेट किया जाएगा।

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