कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास के आसपास भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 अगले 60 दिनों तक लागू रहेगी। यह निषेधाज्ञा पहले से 13 अक्टूबर से लागू थी। अब प्रशासन ने शुक्रवार-शनिवार की रात उनके आवास के बाहर तृणमूल और भाजपा समर्थकों के बीच हुई झड़प के बाद इसे जारी रखने का फैसला किया है। कोलकाता पुलिस ने कहा कि दो गुटों के बीच झड़प हुई थी।
रात में क्या हुआ
रिपोर्टों के अनुसार, शनिवार तड़के करीब ढाई बजे अभिषेक बनर्जी के जन्मदिन के आयोजन की तैयारी के सिलसिले में उनके आवास के बाहर तृणमूल कार्यकर्ता जमा थे। आरोप है कि कुछ भाजपा समर्थकों ने “चोर-चोर” के नारे लगाए और अभिषेक के कटआउट और बैनर तोड़ दिए। रोकने पर दोनों पक्षों में धक्का-मुक्की और झड़प हुई, जिसमें तृणमूल के कई समर्थकों के घायल होने की बात कही गई है। इसके बाद दोनों पक्षों में पुलिस की मौजूदगी में आमने-सामने नारेबाजी हुई।
अभिषेक बनर्जी के आरोप
अभिषेक बनर्जी ने शनिवार को सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनके आवास पर हमला किया, जो उनकी जान लेने की साजिश थी। उन्होंने दावा किया कि घटना से पहले दो दिन तक उनके कार्यालय और आवास की रेकी की गई। उनके अनुसार हमलावरों ने कांटेदार छड़ियों का इस्तेमाल किया और पार्टी के स्थानीय कार्यालय में तोड़फोड़ की। उन्होंने कहा कि चार-पांच समर्थक गंभीर रूप से घायल हुए, जिनमें एक की प्लास्टिक सर्जरी करानी होगी और एक को फ्रैक्चर हुआ है। उन्होंने पुलिस पर मौके पर होने के बावजूद हमला न रोकने का आरोप लगाया और कहा कि यह पिछले छह महीनों में उनकी जान लेने का सातवां प्रयास है। रिपोर्टों के अनुसार वे रात ढाई बजे से सुबह करीब छह बजे तक घर के बाहर बैठे रहे और पुलिस के अनुरोध पर ही अंदर गए। उनके आवास पर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी पहुंचीं।
भाजपा का जवाब
भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया है और तृणमूल समर्थकों पर टकराव के लिए उकसाने का आरोप लगाया है। पश्चिम बंगाल के पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि सत्ता हाथ से निकलने पर ऐसे आरोप लगाना आम बात है। रिपोर्टों के अनुसार भाजपा अभी राज्य की सत्ताधारी पार्टी है।
धारा 163 क्या है
बीएनएसएस की धारा 163, पहले की सीआरपीसी की धारा 144 की जगह लेने वाली निषेधाज्ञा है, जिसके तहत प्रशासन किसी क्षेत्र में लोगों के जमा होने और सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका वाली गतिविधियों पर रोक लगा सकता है। इस आदेश में किन गतिविधियों पर रोक है, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी है। घटना में किसी एफआईआर या गिरफ्तारी की जानकारी भी अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।

