आगरा रेल मंडल (उत्तर मध्य रेलवे) के नियंत्रण कार्यालय में तैनात सेक्शन कंट्रोलरों ने ड्यूटी रोस्टर में मनमानी और 30 घंटे का साप्ताहिक विश्राम न मिलने का आरोप लगाया है। कर्मचारियों के अनुसार 23 कंट्रोलरों के हस्ताक्षर वाला सामूहिक शिकायती पत्र वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक (सीनियर डीओएम) को सौंपा गया है। हालांकि सीनियर डीओएम कुलदीप मीणा का कहना है कि उन्हें ऐसा कोई पत्र नहीं मिला।
क्या हैं आरोप
कंट्रोलरों का आरोप है कि लगातार शिकायतों के बावजूद कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हुआ। शिकायत के अनुसार इंटेंसिव श्रेणी के सेक्शन कंट्रोलरों को रेलवे नियमों के तहत हर सप्ताह 30 घंटे का लगातार विश्राम मिलना चाहिए, लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा। कर्मचारियों का कहना है कि इससे उनकी नींद और स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है और उन्हें लगातार मानसिक दबाव में काम करना पड़ता है। उन्होंने इसे रेल संचालन की सुरक्षा के लिए भी चिंता का विषय बताया है।
कर्मचारियों की मांगें
शिकायत में ये मांगें रखी गई हैं:
- ड्यूटी रोस्टर नियमित किया जाए।
- ग्रेड पे 4800 के पात्र कर्मचारियों को वरिष्ठता के आधार पर डिप्टी गुड्स और डिप्टी पंक्चुअलिटी पदों पर अवसर दिया जाए।
- प्रशिक्षण कराया जाए और पदोन्नति की स्पष्ट नीति बनाई जाए।
- कर्मचारियों से नियमित संवाद बैठकें हों।
अधिकारी का पक्ष
सीनियर डीओएम कुलदीप मीणा ने बताया कि ऐसा कोई पत्र उन्हें नहीं दिया गया है, और इस तरह का कोई मामला उनके संज्ञान में नहीं आया है। कर्मचारियों के दावे और अधिकारी के बयान में अंतर है, और अब तक पत्र की प्राप्ति या उस पर किसी कार्रवाई के बारे में प्रशासन की ओर से और जानकारी सामने नहीं आई है।
क्या कहता है नियम
रेलवे सर्वेंट्स (आवर्स ऑफ वर्क एंड पीरियड ऑफ रेस्ट) रूल्स, 2005 के अनुसार इंटेंसिव और कंटीन्यूअस श्रेणी के कर्मचारियों को हर सप्ताह कम से कम 30 घंटे का लगातार विश्राम दिया जाना चाहिए। रेलवे के दस्तावेजों में सेक्शन कंट्रोलर को इंटेंसिव श्रेणी में रखा गया है। सेक्शन कंट्रोलर अपने खंड में ट्रेनों की आवाजाही की निगरानी और नियंत्रण करते हैं, इसलिए उनकी ड्यूटी और विश्राम का सीधा असर परिचालन पर माना जाता है।

