बरेली में रिंग रोड के समानांतर बिछेगी तीसरी-चौथी रेल लाइन, जंक्शन को बाइपास करेगी; रामगंगा के पास नए स्टेशन पर विचार

3 Min Read
बरेली में रिंग रोड के समानांतर बिछेगी तीसरी-चौथी रेल लाइन, जंक्शन को बाइपास करेगी; रामगंगा के पास नए स्टेशन पर विचार

गाजियाबाद-सीतापुर तीसरी और चौथी रेल लाइन परियोजना में बरेली से गुजरने वाले हिस्से का रास्ता तय हो गया है। फाइनल लोकेशन सर्वे के बाद तय हुआ है कि बरेली में दोनों नई लाइनें झुमका तिराहा-रजऊ परसपुर रिंग रोड के समानांतर गुजरेंगी। ये लाइनें सीबीगंज, बरेली जंक्शन और कैंट स्टेशन को बाइपास करेंगी। रेलवे रामगंगा के आसपास “न्यू बरेली जंक्शन” नाम से नया स्टेशन बनाने की संभावनाएं भी तलाश रहा है।

बरेली में कहां से गुजरेंगी लाइनें

रेलवे के अनुसार नई पटरियां परसाखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र से टिसुआ के बीच बिछाई जाएंगी। यह रास्ता शहर के बाहर रहेगा, जिससे बरेली जंक्शन और आसपास के स्टेशनों पर ट्रेनों का दबाव घटने की उम्मीद है। झुमका तिराहा-रजऊ परसपुर रिंग रोड करीब 29.20 किलोमीटर लंबी है और उसका निर्माण तेजी से चल रहा है।

परसाखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र को इसका सबसे सीधा लाभ मिलने की बात कही गई है। रिंग रोड के समानांतर लाइन होने से औद्योगिक इकाइयों तक कच्चा माल और वहां से तैयार उत्पाद भेजना आसान हो सकेगा।

न्यू बरेली जंक्शन की संभावना

रामगंगा के पास प्रस्तावित न्यू बरेली जंक्शन बनने पर यहां बरेली-चंदौसी-अलीगढ़ और बरेली-कासगंज-मथुरा रेल लाइनों को भी जोड़ने की संभावना है। अभी इस स्टेशन के लिए केवल विकल्पों की तलाश चल रही है और इसकी अंतिम मंजूरी या स्थान तय नहीं हुआ है।

परियोजना कितनी बड़ी है

केंद्र सरकार ने अप्रैल में 14,926 करोड़ रुपये की लागत से गाजियाबाद-सीतापुर के बीच 403 किलोमीटर लंबी तीसरी और चौथी रेल लाइन परियोजना को मंजूरी दी थी। यह रूट अभी दोहरी लाइन का है और दिल्ली-गुवाहाटी हाई डेंसिटी नेटवर्क का अहम हिस्सा है। परियोजना में कुल 859 किलोमीटर ट्रैक बिछाने की बात कही गई है। बताया गया है कि नई लाइनें बरेली के अलावा हापुड़, मुरादाबाद, रामपुर, शाहजहांपुर और सीतापुर के स्टेशनों को भी बाइपास करेंगी।

गाजियाबाद-मुरादाबाद-बरेली-रोजा के बीच मौजूदा लाइन पर दबाव बहुत ज्यादा बताया गया है। आंकड़ों के अनुसार इसका उपयोग क्षमता के 168 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।

अब आगे क्या

मुरादाबाद मंडल के सीनियर डीसीएम महेश यादव ने बताया कि परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है और सर्वे लगभग पूरा हो गया है। इसके बाद भूमि अधिग्रहण होना है। स्थानीय रेलवे अधिकारियों के अनुसार सर्वे और नक्शे का काम पूरा होने के बाद रिपोर्ट मंडल मुख्यालय भेज दी गई है। परियोजना को 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

Share This Article
Exit mobile version