भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन: दिल्ली में 23-25 अक्तूबर को सजेगा दुनिया भर की 200 किस्मों का ‘ग्लोबल राइस आर्काइव’

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भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन: दिल्ली में 23-25 अक्तूबर को सजेगा दुनिया भर की 200 किस्मों का 'ग्लोबल राइस आर्काइव'

भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन (BIRC) 2026 में इस बार दुनिया भर से व्यावसायिक महत्व की चावल की करीब 200 किस्मों को एक ही मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा। अपनी तरह का यह पहला वैश्विक संग्रह 23 से 25 अक्तूबर तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाले तीन दिवसीय सम्मेलन का हिस्सा होगा। इसका मकसद अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को एक ही स्थान पर चावल की अलग-अलग किस्मों की तुलना करने और संभावित आपूर्तिकर्ताओं की पहचान करने में मदद करना है।

‘200 वैरायटीज, वन कल्चरल लैंडस्केप’ थीम पर आधारित होगा संग्रह

आयोजकों के अनुसार, इस ग्लोबल राइस आर्काइव में इटली के आर्बोरियो, थाईलैंड के जैस्मीन और ग्लूटीनस आरडी6 तथा जापान के सुशी चावल से लेकर भारत के बासमती, सुगंधित पारंपरिक अनाज, काले और लाल चावल तथा क्षेत्रीय खास किस्में शामिल होंगी। ‘दो सौ किस्में, एक सांस्कृतिक परिदृश्य’ थीम पर तैयार यह संग्रह सम्मेलन के नौ अनुभव क्षेत्रों (एक्सपीरियंस जोन) में से एक होगा।

इस प्रदर्शनी का उद्देश्य चावल को केवल एक व्यावसायिक वस्तु के रूप में नहीं, बल्कि भूगोल, जैव विविधता, खान-पान परंपराओं और खेती के तौर-तरीकों से जुड़े उत्पाद के रूप में पेश करना है। खरीदार दाने की लंबाई, रंग, बनावट, प्रोसेसिंग फॉर्मेट, मूल स्थान और श्रेणी के आधार पर विभिन्न किस्मों की सीधी तुलना कर सकेंगे।

भारत की व्यावसायिक बासमती किस्में होंगी प्रदर्शित

भारत की व्यावसायिक पेशकशों में बासमती की 1121, 1718, 1509 और 1401 जैसी किस्मों के साथ-साथ पूसा बासमती, सुगंधा और शरबती भी शामिल होंगी। इसके अलावा गैर-बासमती किस्मों में पीआर-11, पीआर-14, परमल और सोना मसूरी को कच्चे (रॉ), स्टीम, सेला और गोल्डन-सेला जैसे अलग-अलग प्रोसेसिंग फॉर्मेट में प्रदर्शित किया जाएगा।

देशभर की क्षेत्रीय और पारंपरिक किस्में भी होंगी शामिल

संग्रह में क्षेत्रीय और पारंपरिक किस्में भी प्रमुखता से दिखेंगी। इनमें केरल से नवारा और रक्तशाली, तमिलनाडु से सीरागा सांबा, मपिल्लई सांबा और करुप्पु कावुनी, छत्तीसगढ़ से दुबराज, पश्चिम बंगाल से तुलाईपंजी, मणिपुर से चाक-हाओ काला चावल, असम से जोहा चावल, उत्तर प्रदेश से काला नमक, मध्य प्रदेश से चिन्नौर, महाराष्ट्र से आंबेमोहर और कश्मीर से मुश्कबुदजी शामिल हैं।

चावल निर्यातकों को उम्मीद, मिलेंगे नए बाजार

भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (IREF) के देव गर्ग ने कहा कि पहली बार सम्मेलन में आने वाला कोई भी वैश्विक खरीदार एक ही जगह पर व्यावसायिक रूप से प्रासंगिक किस्मों की विस्तृत शृंखला देख सकेगा, उनकी तुलना कर सकेगा और फिर तुरंत आपूर्तिकर्ताओं से संपर्क साध सकेगा। उनके अनुसार, यह संग्रह नए उत्पादों की खोज का एक महत्वपूर्ण जरिया बन सकता है।

आयोजकों के मुताबिक, BIRC 2026 में इस बार 200 चावल किस्मों के साथ-साथ 50 वैश्विक व्यंजन भी प्रदर्शित किए जाएंगे। यह आयोजन भारतीय चावल निर्यातक महासंघ द्वारा कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के सहयोग से कराया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, इस साल के सम्मेलन के लिए 138 देशों से 3,317 से अधिक खरीदारों ने पंजीकरण कराया है।

पिछले साल हुए BIRC 2025 को अर्न्स्ट एंड यंग (EY) की एक आकलन रिपोर्ट में भागीदारी और पैमाने के लिहाज से दुनिया के सबसे बड़े समर्पित चावल सम्मेलन के रूप में मान्यता मिली थी। उस आयोजन में 90 से अधिक देशों के 1,083 अंतरराष्ट्रीय खरीदारों समेत कुल 10,854 आगंतुक पहुंचे थे और करीब 3.02 अरब डॉलर (लगभग 33,453 करोड़ रुपये) मूल्य के व्यापार समझौते हुए थे।

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