नई दिल्ली। केंद्र सरकार की सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) ने भारतीय नौसेना के लिए आठ नेक्स्ट जनरेशन कॉर्वेट (NGC) बनाने की परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना की लागत 40,000 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली समिति ने बुधवार को हुई बैठक में इसे हरी झंडी दी। शीर्ष सरकारी अधिकारियों के अनुसार इन युद्धपोतों का निर्माण कोलकाता की गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) करेंगी।
अनुबंध पर जल्द हस्ताक्षर की उम्मीद
अधिकारियों ने बताया कि आठ युद्धपोतों के लिए दोनों शिपयार्ड के साथ अनुबंध अगले कुछ दिनों में हो सकता है। दोनों कंपनियों के बीच कितने पोत बांटे जाएंगे, इसका ब्योरा अभी सामने नहीं आया है। अनुबंध पर हस्ताक्षर के बाद नौसेना को पहला पोत 2030 तक मिलने की उम्मीद है। बताया गया है कि शिपयार्ड निर्माण प्रक्रिया तेज करने और जहाज जल्दी सौंपने के रास्ते भी तलाश रहे हैं।
कैसे होंगे ये युद्धपोत
कॉर्वेट अपेक्षाकृत छोटे और तेज गति वाले युद्धपोत होते हैं। अधिकारियों के अनुसार ये पोत करीब 2,000 टन के होंगे और इनकी गति लगभग 30 नॉट (करीब 55 किलोमीटर प्रति घंटा) होगी। इनमें नौसेना का अपना विकसित किया हुआ नया स्टेल्थ डिजाइन अपनाया जाएगा, यानी ये दुश्मन के रडार की पकड़ में कम आने के लिए बनाए गए हैं। निर्माण में जहाज बनाने की नई तकनीकों का इस्तेमाल होगा।
इन्हें निगरानी, एस्कॉर्ट, प्रतिरोधक तैनाती, सरफेस एक्शन ग्रुप के अभियान, खोज और हमले तथा तटीय रक्षा जैसे कामों के लिए तैयार किया जा रहा है। सरकार इस परियोजना को ‘सागर’ (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) पहल से भी जोड़कर देख रही है।
पृष्ठभूमि
नेक्स्ट जनरेशन कॉर्वेट परियोजना नौसेना की लंबी योजना का हिस्सा रही है। इसे प्रोजेक्ट 28A के नाम से भी जाना जाता है। रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 2022 में इन कॉर्वेट की खरीद को लगभग 36,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर शुरुआती मंजूरी दी थी। अब CCS की मंजूरी के बाद परियोजना अनुबंध के चरण में पहुंच रही है। जानकारी के अनुसार ये पोत नौसेना के पुराने खुकरी और कोरा श्रेणी के कॉर्वेट की जगह लेंगे।
यह मंजूरी ऐसे समय में आई है जब हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 26 अक्टूबर को थल सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए करीब 2.12 लाख करोड़ रुपये के खरीद प्रस्तावों को आवश्यकता की स्वीकृति दी थी। यह स्वीकृति खरीद प्रक्रिया का शुरुआती चरण है और अंतिम अनुबंध नहीं है।
आगे क्या
अब नजर अनुबंध पर होगी। अनुबंध में कीमत, पोतों का बंटवारा और समय-सीमा तय होगी। पहला पोत 2030 तक मिलने की बात अभी नौसेना की अपेक्षा है। इसे अनुबंध की अंतिम शर्तों के बाद ही पक्का माना जा सकेगा।

