नई दिल्ली। दिल्ली की हवा मंगलवार सुबह और बिगड़ गई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, सुबह 7 बजे राजधानी का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 331 रहा, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। सोमवार सुबह यह 307 था। आठ निगरानी केंद्रों पर AQI 400 के पार चला गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी है। हवा बिगड़ने पर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने पूरे दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का दूसरा चरण लागू कर दिया है।
कहां कितना AQI
सीपीसीबी के आंकड़ों के अनुसार, 58 निगरानी केंद्रों में से 57 पर AQI 200 से ऊपर और 41 पर 300 से ऊपर रहा। सबसे खराब हवा इन इलाकों में रही:
- जहांगीरपुरी: 449
- रोहिणी: 429
- पंजाबी बाग: 424
- अलीपुर: 413
- विवेक विहार: 410
- बवाना: 408
- डीटीयू: 407
- नरेला: 406
सबसे कम आंकड़ा आईजीएनओयू-मैदान गढ़ी का 195 रहा। नोएडा में AQI 307, गुरुग्राम में 284 और गाजियाबाद में 259 दर्ज हुआ। प्रमुख प्रदूषक पीएम 2.5 रहा। केंद्रों के आंकड़े समय के साथ बदलते रहते हैं।
दो दिन में तेज गिरावट
सीएक्यूएम के अनुसार, 31 अक्तूबर को दिल्ली का AQI 117 था, जो 1 नवंबर को 261 और 2 नवंबर को 324 तक पहुंच गया। आयोग ने प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों को कारण बताया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में भी हवा ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रह सकती है। सोमवार शाम चार बजे AQI 324 पहुंचने पर GRAP-2 तत्काल प्रभाव से लागू किया गया।
GRAP-2 में क्या होगा
GRAP-2 में सड़कों की मशीनों से सफाई बढ़ाने, धूल रोकने वाले रसायनों के साथ पानी का छिड़काव करने और भीड़भाड़ वाले मार्गों पर एंटी-स्मॉग गन तैनात करने के निर्देश हैं। इसके तहत निजी वाहनों के उपयोग को हतोत्साहित करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाया जाएगा और सरकारी व नगरीय कार्यालयों के समय में बदलाव किया जाएगा। डीजल जनरेटर पर पाबंदी सख्ती से लागू होगी और सार्वजनिक परिवहन मजबूत किया जाएगा। GRAP-1 के उपाय भी जारी रहेंगे, जिनमें निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण और खुले में कचरा जलाने पर कार्रवाई शामिल है।
बाहरी वाहनों पर रोक और पीयूसी नियम
दिल्ली में 1 नवंबर से शीतकालीन प्रदूषण नियंत्रण पाबंदियां भी लागू हैं। इनके तहत दिल्ली से बाहर पंजीकृत उन पेट्रोल-डीजल वाहनों के राजधानी में प्रवेश पर रोक है जो बीएस-6 मानक के नहीं हैं। इलेक्ट्रिक और सीएनजी वाहनों व कुछ तय श्रेणियों को छूट है। साथ ही ‘नो पीयूसी, नो फ्यूल’ नियम लागू है, जिसके तहत वाहनों के पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र होना जरूरी है। जानकारी के अनुसार, दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर ट्रैफिक पुलिस वाहनों के प्रदूषण प्रमाणपत्र और मानकों की जांच कर रही है।
GRAP के चरण
GRAP प्रदूषण स्तर के आधार पर लगने वाले आपात उपायों का सिलसिला है। AQI 201 से 300 पर पहला चरण, 301 से 400 पर दूसरा, 401 से 450 पर तीसरा और 450 से ऊपर पहुंचने पर चौथा चरण लागू होता है। सीपीसीबी के वर्गीकरण के अनुसार, 301 से 400 ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 ‘गंभीर’ श्रेणी है। ‘गंभीर’ हवा स्वस्थ लोगों को भी प्रभावित कर सकती है और सांस या हृदय रोगियों के लिए ज्यादा जोखिम भरी होती है।

