दिल्ली हाईकोर्ट ने अदालत में झूठा जवाब दाखिल करने के आरोप में सीबीआई के छह तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया है। जस्टिस मधु जैन की पीठ ने भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के पूर्व अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल की याचिका पर सुनवाई के बाद इन अधिकारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 191, 193 और 209 के तहत लिखित शिकायत दर्ज कराने का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने राऊज एवेन्यू कोर्ट के विशेष जज का वह आदेश भी रद्द कर दिया, जिसमें अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही शुरू करने से इनकार किया गया था। रिपोर्टों के अनुसार हाईकोर्ट ने पाया कि सीबीआई की ओर से अदालत में तथ्यात्मक रूप से गलत जानकारी रखी गई थी। यह हाईकोर्ट का निर्देश है, अधिकारियों पर आरोप अदालत में साबित नहीं हुए हैं।
क्या है मामला
सीबीआई ने अशोक कुमार अग्रवाल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने 13 जनवरी 2016 को इस मामले में सीबीआई की अभियोजन स्वीकृति को अमान्य ठहरा दिया था। इसके बाद विशेष अदालत ने 10 मार्च 2016 को अग्रवाल को बरी कर दिया। अग्रवाल ने इसके बाद अपने जब्त दस्तावेज वापस मांगने के लिए अर्जी दी।
सीबीआई के जवाब पर विवाद
सीबीआई ने 2 अगस्त 2016 को अदालत में जवाब दाखिल कर कहा कि आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर कानून एवं न्याय मंत्रालय और संबंधित प्रशासनिक मंत्रालय से बातचीत जारी है। रिपोर्टों के अनुसार हाईकोर्ट ने पाया कि कानून मंत्रालय 8 जून 2016 को ही अपनी राय दे चुका था कि सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का कोई ठोस आधार नहीं है। यानी कोई बातचीत लंबित नहीं थी, केवल आंतरिक विचार-विमर्श चल रहा था।
रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि हाईकोर्ट ने पाया कि कानूनी राय की बात फाइल से हटाकर उसकी जगह यह दावा रखा गया कि बातचीत जारी है। आदेश के अनुसार इस जानकारी को अदालत से दबाया और छिपाया गया। रिपोर्टों के अनुसार एक आंतरिक ड्राफ्ट पत्र पर नीली स्याही से की गई कटिंग का स्क्रीनशॉट भी अब अदालती रिकॉर्ड का हिस्सा है।
अग्रवाल की याचिका और निचली अदालत का फैसला
अशोक अग्रवाल ने सीआरपीसी की धारा 340 के तहत झूठा हलफनामा या बयान देने के आरोप में सीबीआई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। विशेष अदालत ने 25 अक्टूबर 2025 को यह आवेदन खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ अग्रवाल हाईकोर्ट पहुंचे, जिसने अब विशेष अदालत का आदेश रद्द कर दिया।
किन अधिकारियों के नाम
हाईकोर्ट के आदेश में जिन छह लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने का निर्देश है, उनमें तत्कालीन जॉइंट डायरेक्टर विनीत विनायक, तत्कालीन डीआईजी अमित कुमार, तत्कालीन एसपी रमन त्यागी और प्रेम कुमार गौतम, तत्कालीन सब इंस्पेक्टर सुशील दीवान और तत्कालीन विशेष लोक अभियोजक मोहम्मद आजाद शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार विनीत विनायक वर्तमान में एनसीबी में एडीजी हैं। इन अधिकारियों या सीबीआई की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अब आगे क्या
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद संबंधित अदालत के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराई जाएगी और आगे की कार्यवाही उसी के अनुसार होगी। अधिकारियों के दोषी या निर्दोष होने का फैसला सक्षम अदालत करेगी। सीबीआई या संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने पर खबर में जोड़ा जाएगा।

