फतेहपुर में बाढ़ से कटे रास्ते पर नाव पलटी, बच्चों समेत 12 लोग सुरक्षित निकाले गए; एसडीएम ने जांच के आदेश दिए

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फतेहपुर में बाढ़ से कटे रास्ते पर नाव पलटी, बच्चों समेत 12 लोग सुरक्षित निकाले गए; एसडीएम ने जांच के आदेश दिए

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में गंगा की बाढ़ से कटे आशापुर और अवसेरी खेड़ा के बीच के रास्ते पर शुक्रवार, 2 अक्तूबर को एक नाव बीच धारा में पलट गई। नाव में बच्चों समेत 12 लोग सवार थे, जो गलाथा गांव में दंगल और मेला देखकर लौट रहे थे। पुलिस और ग्रामीणों ने सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। हादसे में किसी की जान जाने की सूचना नहीं है। एसडीएम बिंदकी ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

कैसे हुआ हादसा

जानकारी के अनुसार अवसेरी खेड़ा और जाड़े का पुरवा के ग्रामीण दोपहर में गलाथा गांव का दंगल और मेला देखने गए थे। लौटते समय वे आशापुर में बाढ़ से कटी सड़क के किनारे पहुंचे। रिपोर्टों के अनुसार नाव में पांच बच्चे और सात युवक सवार थे। यह नाव करीब 10 फीट गहरे पानी में बीच धारा में पलट गई और सभी लोग पानी में डूबने लगे। चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए।

ग्रामीणों का आरोप है कि आशापुर घाट पर नाव तो खड़ी थी, लेकिन नाविक मौजूद नहीं था। उनका दावा है कि नाव चलाने वाली पतवार को नाविक अपने साथ ले गया था। मेले से लौटने वालों की संख्या सैकड़ों में थी, इसलिए ग्रामीणों ने खुद ही पतरा और बल्ली के सहारे नाव चलाने का फैसला किया। यह ग्रामीणों का दावा है। नाविक या प्रशासन का पक्ष इस बारे में नहीं मिल सका है।

पुलिस और ग्रामीणों ने किया रेस्क्यू

रात होने के कारण बचाव कार्य में दिक्कत आई। पुलिस टीम ने ग्रामीणों के साथ मिलकर टॉर्च और मोबाइल की रोशनी में लोगों को निकाला। औंग थाना प्रभारी दिनेश कुमार शुक्ला के नेतृत्व में पुलिस ने रेस्क्यू अभियान चलाया। सामने आए वीडियो में वर्दी पहने एक पुलिसकर्मी कमर तक पानी में उतरकर एक बच्चे को गोद में उठाकर किनारे तक लाते दिख रहा है। यह वीडियो हमारी तरफ से स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं है।

प्रशासन का पक्ष और ग्रामीणों की मांग

एसडीएम बिंदकी निशांत तिवारी ने बताया कि मौके पर नाव और नाविक तैनात करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद हादसा कैसे हुआ, इसकी गहन जांच कराई जाएगी। जिलाधिकारी से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन जवाब नहीं मिला।

गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर होने के कारण जाड़े का पुरवा और अवसेरी खेड़ा को जोड़ने वाली सड़क का बड़ा हिस्सा बह गया है। प्रशासन की ओर से यहां नाव की व्यवस्था की जा रही थी, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि पर्याप्त नावें और नाविक मौजूद नहीं हैं। उनका कहना है कि सामान खरीदने जैसी जरूरतों के लिए उन्हें छोटी डोंगी या नाव से ही शहर जाना पड़ता है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि हर साल बाढ़ में यही स्थिति बनती है और यहां स्थायी पुल या ऊंची सड़क की जरूरत है।

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