चुनाव आयोग का फैसला: SIR पूरा हो चुके राज्यों में फॉर्म-6 के साथ नहीं देना होगा Annexure-D, आयुक्तों की आपत्ति के बाद बदलाव

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चुनाव आयोग का फैसला: SIR पूरा हो चुके राज्यों में फॉर्म-6 के साथ नहीं देना होगा Annexure-D, आयुक्तों की आपत्ति के बाद बदलाव

चुनाव आयोग ने उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ऑनलाइन वोटर एनरोलमेंट फॉर्म-6 से SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा (Annexure-D) हटा दी है, जहां मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पूरा हो चुका है। इन राज्यों में अब नए मतदाता सिर्फ वैधानिक फॉर्म-6 भरकर आवेदन कर सकेंगे। जहां SIR चल रहा है, वहां यह घोषणा पहले की तरह जारी रहेगी। यह बदलाव 30 सितंबर से ECINET पर लागू हुआ है, हालांकि द वायर ने इसे 29 सितंबर की रात हटाया गया बताया है। इस मुद्दे पर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की खबरें आने के बाद विवाद खड़ा हुआ था।

क्या बदला

आयोग के फैसले के मुताबिक यह अतिरिक्त घोषणा ECINET ऐप और पोर्टल के साथ संबंधित मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के पोर्टल से भी हटाई गई है। इस घोषणा में नए आवेदकों को खुद को, या अपने माता-पिता या दादा-दादी/नाना-नानी को, पिछले गहन पुनरीक्षण के दौरान बनी मतदाता सूची से जोड़ने वाली जानकारी देनी होती थी। अब SIR पूरा हो चुके राज्यों में आवेदक को निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के तहत तय फॉर्म-6 और उम्र व निवास से जुड़े जरूरी दस्तावेज ही देने होंगे। IANS के अनुसार आयोग के पोर्टल पर यह घोषणा फिलहाल 13 राज्यों के लिए उपलब्ध है, जहां SIR चल रहा है।

बदलाव के पीछे की पृष्ठभूमि

यह कदम 26 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी की पूर्ण आयोग बैठक के बाद उठाया गया। बैठक के बाद आयोग ने कहा था कि फॉर्म-6 से जुड़ी घोषणा केवल SIR के लिए थी और गैर-SIR अवधि में नियमों के तहत तय फॉर्म का ही इस्तेमाल होगा।

विवाद तब बढ़ा जब इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट किया कि संधू और जोशी ने इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी। रिपोर्टों के अनुसार जोशी की आपत्ति यह थी कि नियमों में संशोधन किए बिना कानूनी रूप से तय फॉर्म में बदलाव नहीं किया जा सकता, और संधू उनसे सहमत थे। ECINET पर ऑनलाइन फॉर्म-6 की प्रक्रिया में यह घोषणा जोड़े जाने के बाद संधू ने इसे “अनधिकृत/गैर-कानूनी” बताते हुए हटाने की मांग की। इंडियन एक्सप्रेस ने यह भी दावा किया कि संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े फैसलों पर कम से कम 14 बार आधिकारिक तौर पर आपत्ति दर्ज कराई थी और कहा था कि ये फैसले उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना लिए गए। ये दावे मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं।

आयोग का पक्ष

आयोग का सार्वजनिक रुख यह रहा है कि फॉर्म-6 में खुद कोई बदलाव नहीं हुआ और Annexure-D एक अतिरिक्त जरूरत थी, जो SIR के दौरान लागू की गई। आयोग के अनुसार बिहार SIR पर सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में इस घोषणा को सही ठहराया था। 26 सितंबर के बयान में आयोग ने कहा कि SIR से जुड़े आदेशों को तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से मंजूरी मिली थी।

फॉर्म-6 वही वैधानिक फॉर्म है, जिसे योग्य नागरिक मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए भरते हैं।

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