चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर छिड़े विवाद के बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने रविवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी से देश की जनता से माफी मांगने की मांग की। यह बयान आयोग की ओर से 26 सितंबर को जारी उस स्पष्टीकरण के एक दिन बाद आया, जिसमें आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े सभी फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिया गया बताया था।
हिमंत बिस्वा सरमा का आरोप क्या है
दिल्ली में मीडिया से बातचीत में हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि कांग्रेस लगातार यह आरोप लगाती रही कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अकेले फैसले ले रहे हैं, जबकि आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि SIR से जुड़े सभी निर्णय सामूहिक रूप से लिए गए। उन्होंने कहा कि अब राहुल गांधी और कांग्रेस के लिए जनता से माफी मांगने का समय आ गया है। सरमा ने यह भी दावा किया कि ज्ञानेश कुमार के मुख्य चुनाव आयुक्त बनने से पहले भी राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस को करीब 90 चुनावों में हार का सामना करना पड़ा था और पार्टी को अपनी हार के कारणों पर आत्मचिंतन करने के बजाय संस्थाओं पर आरोप लगाने की आदत छोड़नी चाहिए। उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव का हवाला देते हुए कहा कि उस समय का चुनाव आयोग तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार के दौरान नियुक्त हुआ था, फिर भी कांग्रेस चुनाव हार गई थी। सरमा ने आगामी इंडिया गठबंधन की बैठक पर भी टिप्पणी करते हुए इसे “हारे हुए और निराश लोगों” का गठबंधन बताया।
राहुल गांधी और कांग्रेस का पक्ष
दूसरी ओर, कांग्रेस चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है। राहुल गांधी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर पहले से ही “वोट चोरी” में संरक्षण देने का आरोप लगाते रहे हैं और उन्होंने आयोग के हालिया फैसलों को लेकर केंद्र सरकार पर “मैच फिक्सिंग” कराने का आरोप लगाया है। आयोग की ओर से 26 सितंबर को जारी स्पष्टीकरण के बाद भी कांग्रेस संतुष्ट नहीं दिखी। पार्टी का कहना है कि आयोग का बयान अस्पष्ट है और इससे आयोग की मंशा, ईमानदारी, निष्पक्षता तथा विश्वसनीयता को लेकर सवाल और गहरे हुए हैं। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई है। वहीं आयोग पहले भी राहुल गांधी के आरोपों को निराधार और तथ्यात्मक रूप से गलत बता चुका है।
भाजपा का जवाबी हमला
भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि SIR को लेकर जनता को गुमराह करने की कोशिश अब बेनकाब हो चुकी है और कांग्रेस झूठ के सहारे संवैधानिक संस्थाओं पर हमला कर रही है।
चुनाव आयोग की बैठक और स्पष्टीकरण
गौरतलब है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर बीते कुछ दिनों से चल रही अटकलों के बीच 26 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त एस.एस. संधू और विनीत जोशी की मौजूदगी में आयोग की एक हाईलेवल बैठक हुई थी। विवाद खड़ा होने के बाद यह पहली बार था जब पूर्ण चुनाव आयोग की बैठक हुई। बैठक के बाद तीनों आयुक्तों की सहमति से जारी प्रेस नोट में कुल नौ फैसलों की जानकारी दी गई, जिनमें से पांच सीधे तौर पर SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं को हो रही दिक्कतों को दूर करने से जुड़े थे। इस नोट के जरिये SIR से जुड़े फैसलों, नए मतदाताओं के लिए फॉर्म-6 में संशोधन और दो चुनाव आयुक्तों की ओर से कैबिनेट सचिव को लिखे गए पत्र को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम को दूर करने का प्रयास किया गया।
पृष्ठभूमि
चुनाव आयोग की कार्यशैली को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच टकराव नया नहीं है। इससे पहले भी राहुल गांधी वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने जैसे मुद्दों पर आयोग को घेर चुके हैं, जबकि आयोग हर बार इन आरोपों को सिरे से खारिज करता रहा है। इसी राजनीतिक तनाव के बीच हिमंत बिस्वा सरमा ने पवन खेड़ा से जुड़े एक अन्य मामले पर पहले कहा था कि कानून अपना काम करेगा।
यह स्पष्ट है कि चुनाव आयोग की सर्वसम्मति वाले स्पष्टीकरण के बावजूद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच यह विवाद फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा। दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच अभी तक किसी स्वतंत्र जांच या न्यायिक निकाय से इन दावों की पुष्टि नहीं हुई है।

