हैदराबाद: मानव तस्करी के 7 साल पुराने मामले में NIA कोर्ट का बड़ा फैसला, 8 बांग्लादेशी नागरिकों समेत 9 दोषियों को उम्रकैद

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हैदराबाद: मानव तस्करी के 7 साल पुराने मामले में NIA कोर्ट का बड़ा फैसला, 8 बांग्लादेशी नागरिकों समेत 9 दोषियों को उम्रकैद

हैदराबाद की विशेष NIA अदालत ने सात साल पुराने एक मानव तस्करी मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए 9 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इनमें आठ बांग्लादेशी नागरिक शामिल हैं। अदालत ने 17 सितंबर को यह फैसला सुनाते हुए सभी दोषियों पर कुल 1.37 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में दोषियों को तीन महीने की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी।

कैसे शुरू हुआ मामला

यह मामला 2019 का है, जब तेलंगाना पुलिस ने हैदराबाद के पहाड़ी शरीफ थाने में एक मानव तस्करी नेटवर्क के खिलाफ केस दर्ज किया था। सितंबर 2019 में चलाए गए एक विशेष ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने जलपल्ली गांव में संचालित एक वेश्यालय से तीन बांग्लादेशी महिलाओं को बचाया था। इसके अलावा हैदराबाद के बालापुर स्थित महिमूद कॉलोनी में एक घर से एक और महिला को सुरक्षित निकाला गया था।

जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क बांग्लादेशी महिलाओं को बेहतर नौकरी और अच्छी तनख्वाह का लालच देकर भारत लाता था, और यहां पहुंचने के बाद उन्हें उनकी इच्छा के खिलाफ जबरन देह व्यापार में धकेल दिया जाता था।

NIA ने अक्टूबर 2019 में संभाली जांच

तेलंगाना पुलिस की शुरुआती कार्रवाई के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 12 अक्टूबर 2019 को मामले की जांच अपने हाथ में ले ली और इसे RC-03/2019/NIA/HYD नंबर के तहत दोबारा दर्ज किया। जांच के दौरान एजेंसी को आरोपियों के एक संगठित मानव तस्करी नेटवर्क से जुड़े होने के पुख्ता सबूत मिले, जिसके आधार पर NIA ने 17 अक्टूबर 2020 को आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। जांच के दौरान आरोपियों को 2019 और 2020 में पश्चिम बंगाल और तेलंगाना समेत अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया गया था।

किन धाराओं में चला मुकदमा

अदालत ने जिन 9 दोषियों को सजा सुनाई है, उनमें रुहुल अमीन धाली, मोहम्मद यूसुफ खान उर्फ मोहम्मद इमरान, बिथी बेगम उर्फ खादिजा शेख, इमामुल गाजी उर्फ मोहम्मद राणा हुसैन, मोहम्मद अल मामून, सोजिब शेख, सुरेश कुमार दास उर्फ सागर, मोहम्मद अब्दुल्ला मुंशी उर्फ अब्दुल सरकार और मोहम्मद अयूब शेख शामिल हैं। इन सभी पर भारतीय दंड संहिता (IPC), विदेशी अधिनियम 1946 और अनैतिक देह व्यापार (रोकथाम) अधिनियम 1956 की अलग-अलग धाराओं के तहत मुकदमा चलाया गया।

नेटवर्क का तरीका: लालच देकर तस्करी, फिर जबरन देह व्यापार

NIA की जांच के अनुसार, गिरोह की कार्यप्रणाली महिलाओं को नौकरी और बेहतर कमाई का भरोसा देकर भारत लाने की थी, जिसके बाद उन्हें जबरन देह व्यापार में धकेला जाता था। सितंबर 2019 की कार्रवाई में चार महिलाओं का बचाया जाना इसी नेटवर्क की जांच का महत्वपूर्ण आधार बना, जिसके बाद एजेंसी ने पूरे नेटवर्क की गहन पड़ताल कर आरोपियों की भूमिका उजागर की।

हाल में सामने आए ऐसे ही अन्य मामले

गौरतलब है कि हाल के महीनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में बांग्लादेशी नागरिकों से जुड़े मानव तस्करी और अवैध घुसपैठ के कई मामले सामने आए हैं। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने जहांगीरपुरी इलाके में चार बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। इसके अलावा उत्तर प्रदेश में भी NIA की विशेष अदालत ने इसी साल एक अन्य मामले में 13 बांग्लादेशी नागरिकों और दो रोहिंग्या शरणार्थियों समेत 15 दोषियों को पांच-पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी, जो सीमा पार से अवैध घुसपैठ कराने वाले एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह से जुड़ा मामला था।

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