रायगढ़ जिले के कर्जत तालुका में टोरेंट पावर के 3,000 मेगावाट क्षमता वाले पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट के लिए जंगल में 32 हजार से ज्यादा पेड़ काटने की मंजूरी पर महाराष्ट्र की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (शरद पवार) और मनसे ने इसका विरोध किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे विपक्ष का “झूठा नैरेटिव” बताते हुए प्रोजेक्ट को स्वच्छ ऊर्जा के लिए जरूरी करार दिया है। मनसे प्रमुख राज ठाकरे के 28 अक्तूबर को प्रोजेक्ट स्थल का दौरा करने की जानकारी सामने आई है।
क्या है पूरा मामला?
यह प्रोजेक्ट सैदोंगर-1 (साई डोंगर) पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट के नाम से प्रस्तावित है। पंप्ड स्टोरेज तकनीक में सौर और पवन जैसे स्रोतों से बनने वाली अतिरिक्त बिजली के जरिए पानी को ऊंचाई पर बने जलाशय में पहुंचाया जाता है। मांग बढ़ने पर वही पानी छोड़कर बिजली बनाई जाती है। यानी 3,000 मेगावाट का आंकड़ा इस प्रोजेक्ट की क्षमता है।
टोरेंट पावर ने 2023 में राज्य सरकार के साथ तीन पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट के लिए समझौता किया था। इनकी कुल क्षमता 5,700 मेगावाट और अनुमानित निवेश करीब 27,000 करोड़ रुपये बताया गया था। इनमें कर्जत का 3,000 मेगावाट वाला प्रोजेक्ट सबसे बड़ा है। कर्जत प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 13,500 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
वन विभाग के दस्तावेजों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, प्रोजेक्ट के लिए करीब 233 हेक्टेयर वन भूमि के उपयोग की मंजूरी है और 32,490 पेड़ काटे जाने हैं। इसमें लगभग 197 हेक्टेयर आरक्षित वन, 26 हेक्टेयर निजी वन और करीब 10 हेक्टेयर संरक्षित वन भूमि बताई गई है। प्रभावित इलाके में पाली, खलाटी, सैदोंगर और ढाक जैसे गांव आते हैं। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि 14 अक्तूबर के एक पत्र के बाद कटाई शुरू हुई। इस पत्र की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
विपक्ष और स्थानीय संगठनों का विरोध
शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे और कर्जत के विधायक रोहित पवार (एनसीपी-शरद पवार) ने हजारों पेड़ों की कटाई पर सवाल उठाए हैं। रोहित पवार ने आरोप लगाया है कि यह जंगल भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य से सटा है और यहां वन्यजीवों व औषधीय वनस्पतियों का आवास है।
आदित्य ठाकरे सोमवार को संजय राउत और सुषमा अंधारे के साथ सैदोंगर पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि एक कंपनी के फायदे के लिए राज्य की वन संपदा को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उनका दावा है कि पेड़ों की अवैध कटाई एक दिन पहले शिवसैनिकों ने रुकवाई। स्थानीय रिपोर्टों में भी कटाई रुकने की बात कही गई है, लेकिन इसे लेकर कोई आधिकारिक आदेश सामने नहीं आया है।
कर्जत तालुका पर्यावरण बचाओ समिति और स्थानीय कार्यकर्ता भी आंदोलन की चेतावनी दे चुके हैं। समिति ने पूछा है कि कटाई की अनुमति किसने दी और वन भूमि हस्तांतरण सहित सभी मंजूरियां पूरी हैं या नहीं। अभिनेता सयाजी शिंदे के नेतृत्व में पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने भी सोमवार को एकजुट विरोध की अपील की। मनसे नेता संदीप देशपांडे ने आंदोलन की चेतावनी देते हुए लोगों से आवाज उठाने को कहा है। कांग्रेस की मांग है कि अगर प्रोजेक्ट जरूरी है तो ऐसी जगह चुनी जाए जहां जंगल को कम नुकसान हो।
विपक्ष का कहना है कि वह विकास का विरोधी नहीं है, लेकिन विकास के नाम पर जंगल काटना स्वीकार्य नहीं है। उसकी मांग है कि प्रोजेक्ट की जरूरत और पर्यावरण पर उसके असर की समीक्षा हो और स्थानीय लोगों की चिंताओं को ध्यान में रखा जाए।
मुख्यमंत्री फडणवीस का पक्ष
मुख्यमंत्री ने रविवार को विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। उनका कहना है कि प्रोजेक्ट तय प्रक्रिया से मंजूर हुआ है और राज्य के लिए जरूरी है। उन्होंने तीन तर्क रखे:
- अगर यह 3,000 मेगावाट स्वच्छ बिजली न मिले, तो उतनी ही बिजली कोयले से चलने वाले थर्मल प्लांट से लेनी होगी। मुख्यमंत्री के दावे के अनुसार, उससे होने वाले प्रदूषण को संतुलित करने के लिए 28 करोड़ पूरी तरह विकसित पेड़ लगाने पड़ेंगे।
- उनके मुताबिक, इतनी थर्मल बिजली से उतना उत्सर्जन होता है जितना करीब 40 लाख वाहन सड़क पर चलने से होता है।
- मुख्यमंत्री के अनुसार, थर्मल बिजली के लिए सालभर में करीब 19 अरब घनफुट पानी लगेगा, जो लगभग 4 लाख लोगों की सालाना जरूरत के बराबर है। उनका कहना है कि इस प्रोजेक्ट में यह पानी बचेगा।
फडणवीस ने यह भी कहा कि प्रोजेक्ट भीमाशंकर वन से करीब 16 किलोमीटर और भीमाशंकर मंदिर से करीब 20 किलोमीटर दूर है। उन्होंने बताया कि निवेश और रोजगार महाराष्ट्र में ही होगा और कंपनी जितनी जमीन इस्तेमाल करेगी, उसकी तीन गुना जमीन पर तीन गुना पेड़ लगाए जाएंगे। मुख्यमंत्री के बयान के आधार पर करीब 90 हजार पेड़ लगाने की बात कही गई है।
राज्य की ऊर्जा राज्य मंत्री मेघना बोर्डीकर और मंत्री आशीष शेलार ने भी प्रोजेक्ट का बचाव किया है। बोर्डीकर ने इसे कोयला आधारित बिजली का प्रकृति-अनुकूल विकल्प बताया और विरोध करने वाले दलों पर चुनिंदा विरोध का आरोप लगाया। शेलार ने कहा कि राज्य की सभी औद्योगिक परियोजनाएं पर्यावरण नियमों का पालन करेंगी।
कंपनी का दावा: अभयारण्य के बाहर है प्रोजेक्ट
टोरेंट पावर ने रविवार को जारी बयान में कहा कि प्रोजेक्ट भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य से करीब 16 किलोमीटर दूर है और इसके सभी हिस्से अभयारण्य व उसके इको-सेंसिटिव जोन के बाहर हैं। कंपनी ने अभयारण्य के भीतर पेड़ कटाई की खबरों को गलत जानकारी पर आधारित बताया। कंपनी के मुताबिक प्रोजेक्ट के लिए लगभग 233 हेक्टेयर वन भूमि चाहिए और वह ग्रीन बेल्ट, मलबा निपटान स्थल और अन्य जगहों पर करीब 60,000 पेड़ लगाएगी। कंपनी का यह भी कहना है कि प्रोजेक्ट के जीवनकाल में इससे बचने वाला उत्सर्जन 46.8 करोड़ टन तक हो सकता है।
वन विभाग ने भी स्पष्ट किया है कि कर्जत में हो रही कटाई का भीमाशंकर अभयारण्य से संबंध नहीं है और अभयारण्य में अवैध कटाई के आरोप गलत हैं।
आगे क्या?
मामला अब सड़क और राजनीति दोनों स्तरों पर बढ़ता दिख रहा है। 28 अक्तूबर को राज ठाकरे का प्रस्तावित दौरा, स्थानीय ग्रामीणों से उनकी मुलाकात और सभा इस विवाद को और तेज कर सकती है। कटाई रुकी है या नहीं, मंजूरियों की शर्तें क्या हैं और पेड़ लगाने की योजना कहां और कैसे लागू होगी, ये सवाल अब भी जवाब मांग रहे हैं।

