लखनऊ: उत्तर रेलवे की कई इकाइयों में कर्मचारी स्वच्छता ही सेवा अभियान 2026 के तहत बेकार पड़े सामान से कलाकृतियां बना रहे हैं। “कबाड़ से जुगाड़ / कबाड़ से कला” थीम पर चल रहे इस कार्यक्रम में आलमबाग, लुधियाना, तुगलकाबाद और गाजियाबाद के शेड के कर्मचारियों ने दरियाई घोड़ा, घड़ी और फूलदान जैसी चीजें तैयार की हैं। कार्यक्रम का मकसद स्वच्छता और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सामान के दोबारा इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।
किस शेड में क्या बना
जानकारी के अनुसार लखनऊ के आलमबाग डीजल शेड और लुधियाना के इलेक्ट्रिक लोको शेड में रेलकर्मियों ने कबाड़ से दरियाई घोड़ा, घड़ी और ऐसी ही कई कलाकृतियां बनाई हैं।
दिल्ली के तुगलकाबाद डीजल शेड और गाजियाबाद के इलेक्ट्रिक लोको शेड में कर्मचारियों ने फूलदान और अन्य सजावटी कलाकृतियां तैयार की हैं। बताया गया है कि इन इकाइयों में अलग-अलग अनुभागों के कर्मचारियों ने मिलकर काम किया।
कार्यक्रम का मकसद
इस पहल के जरिए “वेस्ट टू आर्ट” की अवधारणा को बढ़ावा दिया जा रहा है, यानी अनुपयोगी माने जाने वाले सामान को नई शक्ल देकर उपयोगी या सजावटी रूप में इस्तेमाल करना। जानकारी के अनुसार कर्मचारियों में पर्यावरण और स्वच्छता को लेकर जागरूकता बढ़ाना भी इसका उद्देश्य है। साथ ही पुनः उपयोग और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल का संदेश दिया जा रहा है।
स्वच्छता ही सेवा अभियान 2026 क्या है
स्वच्छता ही सेवा हर साल स्वच्छ भारत दिवस (2 अक्टूबर) से पहले चलने वाला राष्ट्रव्यापी स्वच्छता अभियान है, जो 2017 से मनाया जा रहा है। इस साल यह 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक चल रहा है। अभियान की थीम “स्वच्छता में सहभाग; स्वच्छ भारत, विकसित भारत” है। इसके पांच प्रमुख स्तंभों में “स्वच्छता से समृद्धि” शामिल है, जो कचरे से संसाधन निकालने और रिड्यूस, रीयूज व रीसायकल (3R) के सिद्धांत को बढ़ावा देता है।
रेलवे की अन्य इकाइयां भी इस अभियान में कबाड़ से उपयोगी वस्तुएं बना रही हैं। उदाहरण के लिए, दक्षिण तटीय रेलवे के विजयवाड़ा मंडल ने भी अभियान के तहत कबाड़ से उपयोगी वस्तुएं और प्रदर्शन सामग्री तैयार की है।
आगे क्या
अभियान 2 अक्टूबर को स्वच्छ भारत दिवस पर समाप्त होगा। उत्तर रेलवे की ओर से इन कलाकृतियों की संख्या, उनमें इस्तेमाल सामग्री या किसी प्रतियोगिता और पुरस्कार की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

