बरेली के महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय (एमजेपीआरयू) की उपाधियों पर अब ‘इंडिया’ की जगह ‘भारत’ अंकित होगा। कुलपति प्रो. अनिल कुमार राय की अध्यक्षता में बुधवार, 28 अक्तूबर को हुई विद्या परिषद की बैठक में यह निर्णय लिया गया। विश्वविद्यालय की ओर से दावा किया गया है कि वह उत्तर प्रदेश में ऐसा कदम उठाने वाला पहला विश्वविद्यालय है।
बैठक में और क्या फैसले हुए
कुलपति के अनुसार, बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर रहा। परिषद ने ये प्रस्ताव मंजूर किए:
- चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के चौथे वर्ष के लिए ऑनर्स और ऑनर्स विद रिसर्च कार्यक्रम
- संस्कृत, उर्दू और अंग्रेजी समेत कई विषयों के संशोधित पाठ्यक्रम
- एमएससी पादप विज्ञान, माइक्रोबायोलॉजी और एनिमल साइंस में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का समावेश
- बीटेक इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग और बीएससी माइक्रोबायोलॉजी के संशोधित पाठ्यक्रम
बीएड की मूल्यांकन प्रणाली में बदलाव
बीएड कार्यक्रम में अब 70 प्रतिशत बाह्य और 30 प्रतिशत आंतरिक मूल्यांकन होगा। विश्वविद्यालय के अनुसार, इससे विद्यार्थियों का मूल्यांकन अधिक निष्पक्ष होगा।
फैसला कितना नया
रिपोर्टों के मुताबिक, प्रो. राय बरेली आने से पहले राजस्थान के पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय के कुलगुरु थे, जहां प्रमाणपत्रों और आधिकारिक दस्तावेजों पर ‘इंडिया’ की जगह ‘भारत’ लिखने का निर्णय हुआ था। इसलिए उत्तर प्रदेश के लिहाज से पहल का दावा विश्वविद्यालय की ओर से है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संविधान के अनुच्छेद एक में देश का नाम ‘इंडिया, अर्थात भारत’ दर्ज है।
आगे क्या
कुलपति ने कहा कि सभी प्रस्ताव समयबद्ध तरीके से लागू किए जाएंगे। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि नई उपाधियां किस सत्र से छपेंगी और पहले जारी डिग्रियों पर यह नियम लागू होगा या नहीं। विश्वविद्यालय की ओर से इस पर जानकारी आने पर तस्वीर साफ होगी।

