एक्सप्रेसवे पर 12 दिन में स्लीपर बसों में आग की दूसरी घटना, यात्रियों ने कूदकर बचाई जान; फिटनेस जांच और सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल

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एक्सप्रेसवे पर 12 दिन में स्लीपर बस में आग की दूसरी घटना, फिटनेस जांच पर सवाल

ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के एक्सप्रेसवे पर मंगलवार को आगरा की ओर जा रही एक स्लीपर बस में आग लग गई। यात्रियों ने बस से कूदकर और बाहर निकलकर जान बचाई और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। यह घटना ठीक 12 दिन पहले यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में लगी उस आग के बाद हुई है, जिसमें नौ यात्रियों की मौत हो गई थी। लगातार दो घटनाओं के बाद स्लीपर बसों की फिटनेस जांच और सुरक्षा मानकों पर सवाल उठ रहे हैं।

मंगलवार की घटना

रिपोर्टों के अनुसार मंगलवार को नोएडा से आगरा की ओर जा रही स्लीपर बस में आग लगी, जो ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क थाना क्षेत्र में नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर बताई जा रही है। आग तेजी से फैली और पूरी बस उसकी चपेट में आ गई। एक रिपोर्ट के अनुसार बस दिल्ली से बिहार के मुजफ्फरपुर जा रही थी और उसमें सवार 32 यात्री सुरक्षित बाहर निकल आए। आग लगने का कारण अभी स्पष्ट नहीं है।

12 दिन पहले की घटना

इससे पहले 23-24 सितंबर की रात दिल्ली से महोबा जा रही एक निजी स्लीपर बस में यमुना एक्सप्रेसवे पर जेवर के पास भीषण आग लग गई थी। इसमें नौ यात्रियों की जलकर मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक यात्रियों को सुरक्षित निकाला गया। इस मामले में बस के चालक और परिचालक की गिरफ्तारी की जानकारी भाषा समाचार एजेंसी की रिपोर्ट में दी गई है।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार उस घटना की शुरुआती जांच में एसी में शॉर्ट सर्किट की चिंगारी से आग लगने की आशंका जताई गई थी। उसी रिपोर्ट में कहा गया है कि बस का आपातकालीन दरवाजा काम नहीं कर रहा था और सामान के कारण बाहर निकलने का रास्ता भी बाधित था। आधिकारिक जांच रिपोर्ट सामने आने तक आग के कारण को लेकर निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

फिटनेस जांच पर क्या हैं सवाल

फिटनेस जांच में ब्रेक, टायर, स्टीयरिंग, लाइट, इंडिकेटर, हॉर्न, शीशे, वाइपर, रिफ्लेक्टर, स्पीडोमीटर, स्पीड गवर्नर, प्रदूषण और सुरक्षा उपकरणों की जांच शामिल है। लोगों का आरोप है कि वायरिंग, एसी सिस्टम, आपातकालीन दरवाजों और बस के भीतर यात्रियों के निकलने के रास्ते की असल जांच में केवल खानापूर्ति होती है और कई बसें मानकों की अनदेखी कर चल रही हैं। ये आरोप परिवहन विभाग की जांच प्रक्रिया पर हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है।

विभाग का पक्ष

आगरा के एआरटीओ प्रशासन विनय कुमार सिंह के अनुसार घटिया वायरिंग और यात्रियों द्वारा ज्वलनशील सामान ले जाने से शॉर्ट सर्किट का खतरा रहता है। उन्होंने बताया कि स्लीपर बसों के केबिन संकरे होते हैं, इसलिए किसी खतरनाक घटना की स्थिति में यात्रियों को पता ही नहीं चल पाता। उनके मुताबिक आगरा में करीब 50 स्लीपर बसें पंजीकृत हैं और नियमों का उल्लंघन मिलने पर उन्हें बंद कराया जाता है।

अब आगे क्या

मंगलवार की घटना में आग के कारण और बस की फिटनेस की जांच होना बाकी है। यमुना एक्सप्रेसवे की घटना की आधिकारिक जांच रिपोर्ट आने पर ही शॉर्ट सर्किट या अन्य कारणों की पुष्टि होगी। परिवहन विभाग की ओर से स्लीपर बसों की विशेष जांच अभियान की घोषणा की जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।

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