वाराणसी के दुर्गाकुंड क्षेत्र स्थित मानस नगर एक्सटेंशन निवासी पैरा निशानेबाज सुमेधा पाठक अब जापान में होने वाले पैरा एशियाई खेलों की तैयारी में जुट गई हैं। यह प्रतियोगिता 14 से 24 अक्तूबर तक आयोजित होगी, जिसमें सुमेधा 10 मीटर पिस्टल स्पर्धा में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करेंगी। ऐसा करने वाली वह उत्तर प्रदेश की पहली पैरा महिला खिलाड़ी बन गई हैं। यह उपलब्धि उन्होंने हाल ही में दक्षिण कोरिया के चांगवोन शहर में 7 से 15 सितंबर तक आयोजित वर्ल्ड पैरा शूटिंग चैंपियनशिप में 10 मीटर पिस्टल टीम स्पर्धा में रजत पदक जीतने के बाद हासिल की है। इस जीत के साथ सुमेधा के अंतरराष्ट्रीय पदकों की संख्या बढ़कर 19 हो गई है।
टीबी ने रोकी थीं टांगें, नहीं रुके हौसले
दसवीं कक्षा तक एथलेटिक्स में पदक जीत चुकीं सुमेधा को वर्ष 2013 में मल्टी ड्रग ट्यूबरक्लॉसिस (टीबी) की गंभीर बीमारी ने जकड़ लिया, जिसके चलते उनकी कमर से लेकर पैरों तक का हिस्सा काम करना बंद कर गया। इस झटके के बावजूद सुमेधा ने हार नहीं मानी। 11वीं कक्षा से उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल में अभ्यास शुरू किया और 2018 में प्री-स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर अपने नए सफर की शुरुआत की। इसके बाद से वह लगातार पदक जीतती आ रही हैं। 12वीं कक्षा में उन्होंने दिव्यांग वर्ग में नेशनल टॉप किया था और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से उन्हें लक्ष्मीबाई पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
हाल के वर्षों में लगातार शानदार प्रदर्शन
सुमेधा ने 2021 में दूसरी पैरा नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप की व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था, वहीं 2022 में फ्रांस के सेटूरेक्स वर्ल्ड कप और कोरिया की टीम स्पर्धा में भी रजत पदक अपने नाम किया था। इसी साल जून 2025 में दक्षिण कोरिया में हुई प्रतियोगिता में उन्होंने 10 मीटर पिस्टल टीम स्पर्धा में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाते हुए एकल स्पर्धा में स्वर्ण और मिश्रित वर्ग में कांस्य पदक जीता था। हाल ही में चांगवोन में जीते रजत पदक के साथ भारतीय महिला टीम ने पी-2 स्पर्धा में 18 साल बाद पदक जीतकर इतिहास रचा। इस टीम में सुमेधा के साथ दिल्ली की भक्ति शर्मा और अजमेर की सृष्टि अरोड़ा भी शामिल थीं।
पिता और कोच को देती हैं जीत का श्रेय
सुमेधा के पिता बृजेश कुमार पाठक दवा व्यवसायी हैं और बेटी की हर उपलब्धि पर उनका साथ देते रहे हैं। सुमेधा बातचीत में अपनी जीत का श्रेय बाबा काशी विश्वनाथ, माता-पिता और अपने कोच को देती हैं। अब कोरिया से पदक जीतकर लौटने के बाद उनका पूरा ध्यान अक्तूबर में जापान में होने वाले पैरा एशियाई खेलों की तैयारी पर है, जहां वह देश के लिए एक और पदक जीतने के लक्ष्य के साथ उतरेंगी।

