विपक्षी नेताओं की एहतियातन हिरासत पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिरासत में न लेने का निर्देश, मंगलवार को अगली सुनवाई

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विपक्षी नेताओं की हिरासत पर सुप्रीम कोर्ट: शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी हिरासत में नहीं, मंगलवार को सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ ने रविवार, 11 अक्तूबर को दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं और प्रदर्शनकारियों की एहतियातन हिरासत से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई की। जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने निर्देश दिया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों को हिरासत में नहीं लिया जाएगा और शहर में आवाजाही कानून के अनुसार जारी रहेगी। पीठ ने केंद्र सरकार से याचिकाओं पर संक्षिप्त जवाब मांगा है और अगली सुनवाई मंगलवार को होगी।

क्या थी याचिका

वरिष्ठ अधिवक्ता और तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद मेनका गुरुस्वामी ने शनिवार, 10 अक्तूबर को दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं की हिरासत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने अनुच्छेद 32 के तहत बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) की मांग करते हुए रिट याचिका दायर की। यह प्रदर्शन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बुलाया गया था।

याचिका के अनुसार हिरासत में लिए गए नेताओं में चार पूर्व मुख्यमंत्री शामिल हैं: पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी, दिल्ली के अरविंद केजरीवाल, केरल के पिनराई विजयन और त्रिपुरा के माणिक सरकार। गुरुस्वामी ने कहा है कि शांतिपूर्ण विरोध के मौलिक अधिकार को दबाने के लिए एहतियातन हिरासत का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, खासकर उन नेताओं के खिलाफ जो पहले राज्यों का नेतृत्व कर चुके हैं। याचिका में यह भी आरोप है कि प्रदर्शनकारियों को सड़कों से और कई नेताओं को उनके आवासों से उठाया गया। कुछ को प्रदर्शन स्थल पहुंचने से पहले ही अज्ञात जगहों पर ले जाया गया, यह भी याचिका में कहा गया है।

इसी के साथ वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की अवमानना याचिका भी सुनी गई। उसमें आरोप है कि दिल्ली मेट्रो स्टेशनों को बंद करना और ट्रेनों को रद्द करना अदालत के 9 अक्तूबर के आदेश का उल्लंघन है।

अदालत ने क्या कहा

उपलब्ध जानकारी के अनुसार पीठ ने निर्देश दिया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों को हिरासत में नहीं लिया जाएगा। दिल्ली मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रूप से चलनी चाहिए, और इंटरनेट सेवाओं में रुकावट नहीं होनी चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य पेशेवरों के काम में बाधा नहीं आएगी। साथ ही पीठ ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन उसका तरीका कानून के अनुरूप होना चाहिए।

हिरासत और सुरक्षा इंतजाम

रिपोर्टों के अनुसार शनिवार को हजारों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या अलग-अलग रिपोर्टों में अलग बताई गई है, इसलिए कोई एक आंकड़ा पुष्ट नहीं है। बताया गया कि पिनराई विजयन समेत कुछ नेताओं को छत्रसाल स्टेडियम में बने अस्थायी निरोध केंद्र ले जाया गया।

प्रदर्शन से निपटने के लिए पुलिस, अर्धसैनिक बल और बीएसएफ के करीब 30 हजार जवान तैनात किए जाने की जानकारी दी गई। जंतर-मंतर की ओर आने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई और सीसीटीवी व ड्रोन से निगरानी हुई।

CJP नेताओं की रिहाई और ताजा आरोप

रिपोर्टों के अनुसार कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरभ दास को रविवार को कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत के आदेश के बाद रिहा किया गया। CJP ने रविवार को दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के कुछ देर बाद कनॉट प्लेस में पुलिस ने फिर प्रदर्शनकारियों को बस में बैठाकर हिरासत में लिया। यह दावा CJP का है और पुलिस की ओर से इस पर पक्ष हमारे पास उपलब्ध नहीं है।

अब तक की स्थिति

मामले में केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस का विस्तृत जवाब मंगलवार की सुनवाई में आने की उम्मीद है। अदालत ने अभी हिरासत को अवैध घोषित करने या किसी पर कार्रवाई का अंतिम आदेश नहीं दिया है। नई जानकारी आने पर खबर अपडेट की जाएगी।

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