उत्तर प्रदेश में चिकित्साधिकारी (सामुदायिक स्वास्थ्य), यानी एमओसीएच को समयबद्ध उच्च वेतनमान (एसीपी) का लाभ वर्षों से नहीं मिल पाया है। तीसरे एसीपी का इंतजार करते हुए 21 एमओसीएच सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जिनमें से पांच का निधन हो गया। चिकित्सकों के संघ का आरोप है कि इनकी फाइलें आयुर्वेद निदेशालय में अटकी हैं। संघ ने दिसंबर तक सभी एसीपी जारी न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
दो विभागों के बीच फंसा कॅरिअर
जानकारी के अनुसार प्रदेश में एमओसीएच की नियुक्ति आयुर्वेद विभाग में होती है, लेकिन वे काम एलोपैथ विभाग में मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) के अधीन करते हैं। इसी वजह से इनका कॅरिअर दोनों विभागों के बीच उलझा रहता है। एमओसीएच पूरी तरह एलोपैथ विभाग में जाने की मांग कर रहे हैं। इस पर दोनों विभागों के बीच कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं, पर अब तक फैसला नहीं हुआ है।
कितने चिकित्सक प्रभावित
बताया गया है कि प्रदेश के 350 एमओसीएच को वर्ष 2025 में दूसरे एसीपी का लाभ मिल जाना चाहिए था, लेकिन उन्हें अभी पहला एसीपी भी नहीं मिला है। इनकी सभी पत्रावलियां करीब एक साल पहले आयुर्वेद निदेशालय को भेजी जा चुकी हैं, फिर भी मामला लंबित है। तीसरे एसीपी के दावेदार 21 एमओसीएच बिना यह लाभ पाए सेवानिवृत्त हो चुके हैं और इनमें पांच का निधन हो चुका है।
क्या कहता है नियम
एसीपी के नियमों के मुताबिक, 10 वर्ष की नियमित सेवा पूरी होने पर पहला, 16 वर्ष पर दूसरा और 26 वर्ष पर तीसरा एसीपी मिलना चाहिए। एमओसीएच का कहना है कि इन अवधियों के बाद भी उन्हें यह लाभ नहीं मिला।
निदेशालय का पक्ष
आयुर्वेद विभाग के निदेशक डॉ. नारायण दास के अनुसार, एमओसीएच को एसीपी देने की प्रक्रिया चल रही है और इसमें कई स्तर की बैठकें होती हैं। उनका कहना है कि कुछ चिकित्सकों का विवरण सीएमओ कार्यालय से देर से मिला, इसलिए थोड़ी देरी हुई।
संघ की चेतावनी
सामुदायिक स्वास्थ्य चिकित्साधिकारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रवि भारती का कहना है कि एसीपी न मिलने से चिकित्सकों में आक्रोश है और फाइलें निदेशालय में लंबित पड़ी हैं। उनके मुताबिक, दिसंबर तक सभी एसीपी जारी नहीं हुईं तो आंदोलन शुरू करना मजबूरी होगी, और इसकी जिम्मेदारी विभाग की होगी।
आगे क्या
एमओसीएच की मांग है कि सभी लंबित एसीपी दिसंबर तक जारी हों। संघ की चेतावनी और निदेशालय के जवाब के बीच अब देखना होगा कि दोनों विभाग इस साल के आखिर तक लंबित फाइलों पर क्या फैसला लेते हैं।

