अमेरिका ने इंग्लैंड के आरएएफ फेयरफोर्ड बेस से सभी बमवर्षक विमान वापस बुलाए, संदिग्ध आतंकी साजिश की जांच के बीच उठाया कदम

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अमेरिका ने इंग्लैंड के आरएएफ फेयरफोर्ड बेस से सभी बमवर्षक विमान वापस बुलाए, संदिग्ध आतंकी साजिश की जांच के बीच उठाया कदम

अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन ने कहा है कि इंग्लैंड के आरएएफ फेयरफोर्ड एयर बेस पर तैनात सभी अमेरिकी बमवर्षक विमान अमेरिका में अपने मूल ठिकानों पर लौट गए हैं। रविवार को जारी बयान में पेंटागन ने कहा कि अभियानगत सुरक्षा के कारण विमानों की आवाजाही की पुष्टि उस समय नहीं की जा सकती थी, लेकिन अब मान्य किया जाता है कि सभी विमान वापस भेजे जा चुके हैं। यह कदम बेस के पास पिछले हफ्ते हुई एक संदिग्ध आतंकी साजिश की जांच के बाद सामने आया है। पेंटागन ने इस वापसी की वजह स्पष्ट रूप से उस घटना से नहीं जोड़ी है।

क्या कहा पेंटागन ने

पेंटागन के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बमवर्षक विमानों को वापस भेज दिया गया है। उन्हें संवेदनशील सैन्य गतिविधियों पर बात करने का अधिकार नहीं था, इसलिए उन्होंने नाम बताने से मना किया। एक अन्य बयान में कहा गया कि अमेरिकी वायुसेना के बमवर्षक दुनिया भर में नियमित रूप से तैनात होते हैं। रिपोर्टों के अनुसार फेयरफोर्ड से करीब एक दर्जन बी-1 बमवर्षक वापस भेजे गए। विमान ट्रैक करने वाले समूहों ने रविवार को कई बी-1 बमवर्षकों को बेस से उड़ान भरते देखा। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने इस पर टिप्पणी से इनकार किया है।

फेयरफोर्ड पर क्या हुआ था

आरएएफ फेयरफोर्ड ग्लॉस्टरशायर में स्थित है और ईरान युद्ध की शुरुआत से अमेरिकी बी-52 और बी-1 बमवर्षकों के संचालन में इस्तेमाल होता रहा है। पिछले सप्ताहांत बेस के पास तीन संदिग्ध वैन देखी गई थीं। ब्रिटिश आतंकवाद-रोधी पुलिस के अनुसार वैन से कुछ मात्रा में पेट्रोल मिला, लेकिन कोई विस्फोटक उपकरण नहीं मिला।

इस घटना की जांच के सिलसिले में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। आतंकवाद-रोधी पुलिस की राष्ट्रीय समन्वयक विकी इवांस ने जांच को “बेहद जटिल” बताया है और कहा है कि विशेष टीमें कई पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने कहा है कि इस घटना में ईरान की भूमिका के “मजबूत संकेत” हैं। ईरान ने इसमें किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है। इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया था कि इस्राइल ने साजिश से जुड़ी खुफिया जानकारी ब्रिटेन को दी थी। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

ब्रिटिश अधिकारी पहले भी कह चुके हैं कि ईरान से जुड़े प्रॉक्सी ब्रिटेन और दूसरे देशों में आगजनी और अन्य हमलों के पीछे रहे हैं, जिनमें कई यहूदी समुदाय को निशाना बनाने वाले थे। ईरान पहले कह चुका है कि वह अपने इलाके पर हमले के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले किसी भी बेस को जायज निशाना मानता है।

ईरान युद्ध की पृष्ठभूमि

अमेरिका और इस्राइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला शुरू किया था। इसके बाद ब्रिटेन की पिछली सरकार ने “रक्षात्मक” कार्रवाई के लिए अमेरिका को ब्रिटिश ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति दी थी। शनिवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान को लेकर उन्हें कुछ फैसले लेने हैं और सवाल यह है कि रास्ता आसान होगा या मुश्किल। राष्ट्रपति ने शुरू में कहा था कि यह अभियान कुछ ही हफ्तों का होगा। ट्रंप ईरान के खिलाफ नए हमलों समेत कई विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।

अब आगे क्या

फेयरफोर्ड से विमानों की वापसी के बाद अमेरिका अपने बमवर्षकों को कहां से संचालित करेगा, इस बारे में पेंटागन ने कोई जानकारी नहीं दी है। ब्रिटेन में जांच जारी है और अब तक किसी पर आरोप तय नहीं हुए हैं।

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