आगरा के ताजगंज में 30 लाख का धोबीघाट उद्घाटन के एक साल बाद भी बंद, रजक समाज ने नगर आयुक्त से की मशीनीकृत घाट की मांग

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आगरा ताजगंज धोबीघाट एक साल बाद भी बंद, रजक समाज ने नगर आयुक्त से की मांग

आगरा के ताजगंज में नगर निगम का 30 लाख रुपये की लागत से बना धोबीघाट लोकार्पण के करीब एक साल बाद भी चालू नहीं हो सका है। रजक समाज ने इस पर आपत्ति जताते हुए नगर आयुक्त को ज्ञापन सौंपा है और ताजगंज में मशीनीकृत धोबीघाट शुरू करने की मांग की है। उधर, नगर निगम छलेसर में 200 किलो प्रति घंटे की क्षमता वाले आधुनिक मशीनीकृत धोबीघाट का ट्रायल कर रहा है।

समाज की मांग और आपत्ति

ज्ञापन में समाज के राजेश सिंह ने कहा कि यमुना किनारे कैलाश मंदिर से ताजगंज तक लोग कपड़े धोने का काम करते हैं। उनके अनुसार, प्रशासन ने यमुना की तलहटी में खंदारी, दयालबाग और ताजगंज में धोबीघाट के लिए जगह तय की थी। ताजगंज के धोबीघाट का लोकार्पण भी हो चुका है, लेकिन समाज का कहना है कि इसे चालू नहीं किया गया और वहां केवल लोकार्पण का पत्थर लगा है।

छलेसर पर सवाल

मंडल अध्यक्ष योगेश दिवाकर ने कहा कि नगर निगम ने समाज से बातचीत किए बिना छलेसर में 1.90 करोड़ रुपये से आधुनिक धोबीघाट बनवा दिया। उनके अनुसार, शहर के अधिकतर बजट श्रेणी के होटल, कॉलोनियां और बहुमंजिला इमारतें फतेहाबाद रोड क्षेत्र में हैं, जहां से छलेसर आना-जाना कठिन है। उन्होंने पहले तय स्थानों पर ही धोबीघाट चलाने की मांग की।

नगला मेवाती की पार्षद गीता देवी ने कहा कि परंपरागत धुलाई की जगह ताजगंज में अत्याधुनिक मशीनें और ड्रायर लगाए जाएं, तभी लोग वहां कपड़े धुलवाने आएंगे। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में होटलों की संख्या सबसे ज्यादा है, इसलिए मांग भी अधिक है।

नगर निगम का पक्ष

नगर आयुक्त संतोष कुमार वैश्य ने बताया कि ताजगंज में मैनुअल धोबीघाट बनाया गया है, जहां पानी के टैंक और परंपरागत धुलाई की व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि समाज के लोगों से बातचीत कर इसे शुरू कराया जाएगा। उनके अनुसार, छलेसर और ताजगंज के धोबीघाट अलग-अलग पैटर्न के हैं।

छलेसर का मशीनीकृत धोबीघाट

नगर निगम के अनुसार, छलेसर में करीब 800 वर्ग मीटर क्षेत्र में बने धोबीघाट में तीन बड़ी धुलाई मशीनें, हाइड्रो एक्सट्रैक्टर, 60 किलो क्षमता का टंबल ड्रायर और आयरनिंग की सुविधाएं हैं। यमुना में कपड़ों की धुलाई और रंगाई के अपशिष्ट से प्रदूषण रोकने के लिए यह बनाया गया है। निगम इसका शुल्क नो प्रॉफिट-नो लॉस की नीति पर तय करेगा। ट्रायल की दिक्कतें दूर कर इसे दिवाली पर शुरू करने की योजना है। नगर आयुक्त के अनुसार, पांच बार निविदा के बाद ही इसके संचालन का रास्ता निकला।

आगे क्या

ताजगंज का धोबीघाट कब शुरू होगा, इसकी कोई समय-सीमा नगर निगम की ओर से नहीं बताई गई है। रजक समाज की मांग पर निगम की ओर से बातचीत और अंतिम निर्णय की जानकारी आना बाकी है।

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