आगरा में सहकारी समितियों पर ताले, नियमित वेतन के लिए लखनऊ धरने में गए कर्मचारी; बुवाई के बीच खाद के लिए भटके किसान

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आगरा में सहकारी समितियों पर ताले, खाद के लिए किसान परेशान, वेतन की मांग पर हड़ताल

नियमित वेतन और बकाया भुगतान की मांग को लेकर लखनऊ में चल रहे आंदोलन के चलते बुधवार, 28 अक्तूबर को आगरा जिले की सहकारी समितियों पर पूरे दिन ताले लटके रहे। रबी की बुवाई के बीच किसानों को समितियों से उर्वरक नहीं मिल सका। आज भी खाद मिलने की संभावना कम बताई जा रही है।

कितनी समितियां और कर्मचारी

जिले की 96 समितियों में सचिव समेत कुल 92 कर्मचारी कार्यरत हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से करीब 70 कर्मचारी बुधवार सुबह लखनऊ धरने में शामिल होने के लिए रवाना हो गए। इसके बाद इरादतनगर, किरावली, सैंया, लादूखेड़ा, बाह और अकोला समेत जिलेभर में समितियां बंद रहीं।

बुवाई पर असर

इस समय आलू, सरसों और गेहूं जैसी रबी फसलों की बुवाई चल रही है। जिले में करीब 80 हजार हेक्टेयर में आलू की खेती होती है। रिपोर्ट के अनुसार, महंगे बीज और खाद की किल्लत के कारण बुवाई पहले ही पिछड़ी है और अभी 40 प्रतिशत से कम हो पाई है, जबकि करीब 80 प्रतिशत किसान आमतौर पर अक्तूबर में बुवाई पूरी कर लेते हैं।

सैंया के किसान छीतर प्रसाद ने बताया कि उन्होंने आलू का बीज चार दिन पहले उपचारित कर रखा है, पर खाद के बिना बुवाई नहीं हो पा रही। फतेहाबाद के किसान दुर्ग सिंह के अनुसार, वे चार दिन पहले समिति पर कागज जमा कर चुके थे, लेकिन आज पहुंचे तो ताला लटका मिला।

बाजार में महंगी खाद

लादूखेड़ा समिति से जुड़े किसान शंकर सिंह और विजय सिंह ने बताया कि पिछले चार दिनों से समिति पर खाद नहीं है। उनके अनुसार, निजी दुकानदारों से 1,350 रुपये की डीएपी का कट्टा 1,700 से 1,800 रुपये में खरीदना पड़ रहा है। इरादतनगर और अकोला समिति पर पहुंचे किसानों ने इस समय हड़ताल से फसल को नुकसान की आशंका जताई है।

कर्मचारी संगठनों का पक्ष

उत्तर प्रदेश सहकारी समिति कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष नरसिंह भदौरिया ने बताया कि आगरा के करीब 70 कर्मचारी लखनऊ गए हैं। उनके अनुसार, सहकारिता मंत्री ने मामले के समाधान के लिए 20 दिन का समय मांगा है और हड़ताल खत्म करने की अपील की है। गुरुवार सुबह शीर्ष नेतृत्व की बैठक में हड़ताल पर आगे का निर्णय होगा।

उत्तर प्रदेश संयुक्त सहकारी समिति कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष मुकेश चौधरी ने कहा कि जब तक सरकार नियमित वेतन और बकाया भुगतान की व्यवस्था नहीं करती, समितियों में तालाबंदी और कार्य बहिष्कार जारी रहेगा।

प्रदेश में कब से आंदोलन

अन्य जिलों की रिपोर्टों के अनुसार, कर्मचारी 22 अक्तूबर से लखनऊ में धरना दे रहे हैं। बस्ती और सिद्धार्थनगर जैसे जिलों में भी समितियों पर ताले लगे हैं। अंबेडकरनगर के संगठन ने बताया था कि 7 सितंबर को आयुक्त और निबंधक सहकारिता को मांगपत्र दिया गया था। उनके अनुसार, 21 सितंबर और 6 अक्तूबर की बैठकों में आश्वासन मिला, लेकिन कोई आदेश जारी नहीं हुआ। मांगपत्र में कैडर और नॉन कैडर सचिव, आंकिक लिपिक, विक्रेता और चौकीदारों के वेतन भुगतान की बात है।

आगे क्या

अब गुरुवार को होने वाली संगठन की बैठक पर नजर रहेगी। इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक सहकारिता विभाग या सरकार का आधिकारिक पक्ष और खाद की वैकल्पिक व्यवस्था की जानकारी उपलब्ध नहीं थी।

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