अलीगढ़ में 12 दिसंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन होगा। जिला न्यायालय से लेकर तहसील स्तर तक होने वाली इस लोक अदालत में लंबित मामलों का आपसी सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण किया जाएगा। इसका उद्देश्य लंबित मुकदमों का बोझ कम करना और वादकारियों को त्वरित न्याय दिलाना है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव साक्षी गर्ग ने इसकी जानकारी दी।
किन मामलों का होगा निस्तारण
साक्षी गर्ग के अनुसार, लोक अदालत में फौजदारी के शमनीय वाद, चेक बाउंस से जुड़े निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के मामले, धन वसूली, मोटर दुर्घटना प्रतिकर, श्रम विवाद तथा बिजली और जलकर से संबंधित वादों का निस्तारण किया जाएगा। इसके अलावा पारिवारिक और वैवाहिक विवाद, भूमि अधिग्रहण, सेवा संबंधी और अन्य दीवानी मामले भी लोक अदालत में रखे जाएंगे।
सचिव ने सभी न्यायालयों, कार्यालयों और विभागीय अधिकारियों को अधिक से अधिक मामले चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं।
कैसे मिलता है लाभ
लोक अदालत में आपसी सहमति से हुए समझौते पर आधारित फैसले अंतिम माने जाते हैं और सामान्यतः उनके खिलाफ अपील का प्रावधान नहीं होता। जो वादकारी अपने मामले को लोक अदालत में रखवाना चाहते हैं, वे संबंधित न्यायालय या जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क कर सकते हैं।
इस साल की आखिरी
अन्य जिलों की रिपोर्टों के अनुसार, 12 दिसंबर की यह लोक अदालत इस वर्ष की चौथी और आखिरी राष्ट्रीय लोक अदालत है। अलीगढ़ में इससे पहले सितंबर में भी जिला न्यायालय से तहसील स्तर तक राष्ट्रीय लोक अदालत हुई थी।

