SIR के दौरान फॉर्म 7 से वोट कटवाने की साजिश का आरोप, CM डीके शिवकुमार ने मांगी आपराधिक जांच

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SIR के दौरान फॉर्म 7 से वोट कटवाने की साजिश का आरोप, CM डीके शिवकुमार ने मांगी आपराधिक जांच

बेंगलुरु: कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने आरोप लगाया है कि राज्य में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान फॉर्म 7 के जरिए बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम कटवाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने इस मामले में व्यापक और आपराधिक जांच की मांग की है। बीजेपी की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक हमें नहीं मिली।

शिवकुमार ने वीडियो संदेश में दावा किया कि फॉर्म 7 थोक में जमा कराए जा रहे हैं और निशाने पर अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के मतदाता हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नाते हर नागरिक के वोट के अधिकार की रक्षा करना उनकी जिम्मेदारी है।

आरोप क्या हैं

शिवकुमार के मुताबिक कांग्रेस नेताओं ने उन्हें ऐसे मामलों के दस्तावेज सौंपे हैं, जिनमें उनके विधानसभा क्षेत्रों में फर्जी तरीके से फॉर्म 7 भरे गए। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस विधायकों के क्षेत्रों में ऐसा हो रहा है, तो यह पूरे राज्य में चल रही बड़ी साजिश का संकेत है।

गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने आरोपों का दायरा और बढ़ाया। उनके अनुसार:

  • फॉर्म 7 की थोक फाइलिंग 22, 23 और 24 सितंबर को हुई।
  • जो लोग दूसरों की ओर से नाम हटवाने के लिए फॉर्म 7 भर रहे हैं, वे बूथ लेवल एजेंट नहीं, बल्कि बीजेपी कार्यकर्ता हैं।
  • कई जगह अलग-अलग नामों से कई आवेदन दाखिल हुए हैं। उन्होंने 45 लाख वोट हटाने के आवेदनों का दावा किया और कहा कि अकेले विजयपुरा में 14,000 आवेदन दिए गए।
  • बेलगावी, भालकी, मैसूरु और अन्य जगहों पर अवैध तरीके से नाम हटाने के खिलाफ कई FIR दर्ज होने की बात भी उन्होंने कही।
  • उन्होंने बीजेपी और जेडीएस पर 50-60 लाख मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश का आरोप भी लगाया।

ये सभी आंकड़े और आरोप मुख्यमंत्री के दावे हैं। इन्हें स्वतंत्र रूप से या चुनाव आयोग की ओर से पुष्ट नहीं किया गया है।

जांच, FIR और धरने की चेतावनी

शिवकुमार ने चेतावनी दी कि जब तक जांच के आदेश नहीं होते, वे मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अंबुकुमार के कार्यालय में धरने पर बैठेंगे। उन्होंने चुनाव आयोग से “वोट चोरी” और चुनावी अपराध के मामले में FIR दर्ज करने की भी मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने पुलिस अधिकारियों, उपायुक्तों और राज्य निर्वाचन अधिकारी से इस संबंध में आंकड़े मांगे हैं।

उन्होंने बूथ लेवल एजेंट, विधायकों, पार्टी कार्यकर्ताओं और आम मतदाताओं से अपील की कि वे फॉर्म 7 के ऐसे आवेदनों की जानकारी तुरंत उनके कार्यालय को भेजें, ताकि मामला चुनाव आयोग के सामने रखा जा सके।

मंत्री रिजवान अरशद की शिकायत

राज्य के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रिजवान अरशद ने गुरुवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय में याचिका देकर थोक में फॉर्म 7 दाखिल किए जाने पर कार्रवाई की मांग की। अरशद ने सवाल उठाया कि चुनाव आयोग के घर-घर सत्यापन के बाद इतनी बड़ी संख्या में आपत्तियां कैसे स्वीकार की जा रही हैं। उनका दावा है कि आयोग ने माना है कि इससे समाज में भ्रम पैदा होगा। यह बात आयोग की ओर से अलग से सामने नहीं आई है।

क्या है फॉर्म 7 और SIR की मौजूदा स्थिति

फॉर्म 7 के जरिए मतदाता सूची से किसी का नाम हटाने का अनुरोध किया जाता है। इसके आधार मृत्यु, स्थायी रूप से दूसरी जगह जाना, दोहरा पंजीकरण या अपात्रता हो सकते हैं। कर्नाटक में SIR अब दावा-आपत्ति के चरण में है और भालकी व बाबलेश्वर समेत कई क्षेत्रों में थोक आवेदनों की खबरें सामने आ चुकी हैं। आयोग की प्रक्रिया में सत्यापन और सुनवाई के बाद अंतिम मतदाता सूची तैयार होती है।

फॉर्म 7 के दुरुपयोग का मुद्दा कर्नाटक में नया नहीं है। पहले मंत्री प्रियांक खड़गे ने आलंद विधानसभा क्षेत्र में 6,018 वोट हटाने की कोशिश का आरोप लगाया था।

आगे क्या

शिवकुमार ने कहा कि वे चुनाव अधिकारियों से मिलकर दस्तावेज सौंपेंगे। अब देखना होगा कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय इन आरोपों पर क्या कार्रवाई करता है और बीजेपी इस पर क्या जवाब देती है। खबर विकासशील है और नई जानकारी आने पर अपडेट की जाएगी।

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