हाथरस जिले के सिकंदराराऊ क्षेत्र के गांव टोगलपुर निवासी हरी सिंह के आधार और पैन कार्ड का दुरुपयोग कर उनके नाम पर बाइक फाइनेंस कराए जाने का मामला सामने आया है। पीड़ित को इसकी जानकारी तब हुई, जब वे पांच साल बाद बैंक से कर्ज लेने पहुंचे और उन्हें बताया गया कि वे पहले से ही कर्जदार और डिफॉल्टर हैं।
हरी सिंह के मुताबिक करीब पांच वर्ष पहले दस्तावेज ठीक कराने के दौरान किसी व्यक्ति ने उनके आधार और पैन कार्ड की प्रतियां अपने पास रख ली थीं। आरोप है कि इन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल कर एक बाइक एजेंसी के मैनेजर से मिलीभगत करते हुए उनके नाम पर बाइक फाइनेंस कराई गई और वह बाइक एक महिला को सौंप दी गई। हरी सिंह का कहना है कि उन्होंने बाइक फाइनेंस के लिए एजेंसी को कोई दस्तावेज नहीं दिए थे।
बैंक जाने पर हुआ खुलासा
मामले का खुलासा तब हुआ जब हरी सिंह गांव अगसौली स्थित ग्रामीण बैंक ऑफ आर्यावर्त में ऋण लेने पहुंचे। बैंक ने उन्हें बताया कि उनके नाम पर पहले से ही कर्ज दर्ज है और वे डिफॉल्टर की श्रेणी में हैं, जबकि उन्होंने कभी कोई ऋण लिया ही नहीं था। इसके बाद उन्होंने सिकंदराराऊ कोतवाली पहुंचकर तहरीर दी और कार्रवाई की मांग की।
पुलिस जांच शुरू
थाना प्रभारी शिवकुमार शर्मा ने बताया कि पीड़ित की तहरीर मिल गई है और मामले की जांच की जा रही है। अभी तक किसी नामजद आरोपी के खिलाफ औपचारिक मुकदमा दर्ज होने या गिरफ्तारी की जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है।
दस्तावेजों के दुरुपयोग से जुड़े ऐसे मामले हाल के महीनों में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से सामने आते रहे हैं, जिनमें पहचान दस्तावेजों की प्रतियां जमा कराने के दौरान उनका दुरुपयोग कर फर्जी तरीके से लोन या फाइनेंस कराया गया। ऐसे मामलों में पीड़ितों को अक्सर महीनों या सालों बाद, बैंक या क्रेडिट स्कोर जांच के दौरान ही असलियत का पता चलता है।

