कांग्रेस नेतृत्व की आपत्ति के बावजूद हरीश रावत ने निकाली यात्रा, वेणुगोपाल से मुलाकात के बाद अब शैलजा से मिलेंगे

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हरीश रावत की जनसंवाद यात्रा पर कांग्रेस हाईकमान की आपत्ति, शैलजा-वेणुगोपाल से मुलाकात

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने पार्टी नेतृत्व की आपत्ति के बावजूद सोमवार को उधमसिंह नगर के जसपुर से अपनी ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ शुरू की। इससे पहले उत्तराखंड कांग्रेस की प्रभारी कुमारी शैलजा ने पत्र लिखकर उनसे यात्रा रोकने को कहा था। रावत एक दिन पहले दिल्ली में संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से मिल चुके थे और अब आने वाले दिनों में शैलजा से मुलाकात कर अपना पक्ष रखेंगे।

पत्र में क्या कहा गया

कुमारी शैलजा ने रावत को लिखे पत्र में कहा कि यात्रा को लेकर न उनसे और न ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष से चर्चा की गई। रिपोर्टों के अनुसार शैलजा का तर्क था कि चुनाव से कुछ महीने पहले किसी भी तरह का समानांतर कार्यक्रम पार्टी के हित में नहीं होगा। सूत्रों के हवाले से यह भी बताया गया है कि यह पत्र वेणुगोपाल से चर्चा के बाद लिखा गया।

वेणुगोपाल से मुलाकात और पार्टी का संदेश

हरीश रावत रविवार को दिल्ली पहुंचे और वेणुगोपाल से मिले। इस मुलाकात के बाद वेणुगोपाल की ओर से स्पष्ट संदेश दिया गया कि उत्तराखंड में सभी अभियान शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी से चलाए जाएंगे और किसी का व्यक्तिगत अभियान या यात्रा पार्टी को स्वीकार नहीं होगी। सोमवार को शैलजा ने कहा कि रावत से उनका पत्र के जवाब में संपर्क हुआ है और वह सात या आठ अक्टूबर को उनसे मिलकर स्पष्टीकरण देंगे। आमने-सामने बात होने पर स्थिति साफ हो जाएगी।

यात्रा का मार्ग और रावत का रुख

रावत की यात्रा हरिद्वार से शुरू हुई थी और अब कुमाऊं तक पहुंच गई है। सोमवार को यह यात्रा जसपुर से शुरू होकर काशीपुर, रामनगर और कालाढूंगी होते हुए देर रात हल्द्वानी पहुंची। उनके साथ विधायक प्रीतम सिंह समेत कई नेता और समर्थक मौजूद थे। सूत्रों के अनुसार रावत की योजना यात्रा पूरी कर मंगलवार को देहरादून लौटने और सात अक्टूबर को दिल्ली जाकर वेणुगोपाल और शैलजा से मिलने की है।

यात्रा शुरू होने से पहले रावत ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यात्रा अब रुकेगी नहीं। उन्होंने कहा कि वह लंबी बीमारी के बाद स्वस्थ होकर लौटे हैं और लोगों को धन्यवाद देने निकले हैं। शैलजा की नाराजगी के सवाल पर उन्होंने सीधा जवाब नहीं दिया। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार रावत ने खुद को कांग्रेस का सिपाही बताते हुए कहा कि वह राहुल गांधी के आदेश पर काम करते हैं।

रावत का स्पष्टीकरण

रावत ने बाद में कहा कि उन्होंने 10 चरणों की यात्रा की योजना बनाई थी, लेकिन अब पार्टी कोई नया अभियान शुरू करती है तो वह उसी के साथ आगे बढ़ेंगे। उनके मुताबिक यात्रा का शुरुआती मकसद उत्तराखंड कांग्रेस में हलचल पैदा करना था, जो पूरा हो गया है, और अब उन्हें 8-10 यात्राओं की ज्यादा जरूरत नहीं लगती। उन्होंने कहा कि पार्टी की भविष्य की यात्राओं की योजना बनेगी तो वह उसका हिस्सा होंगे।

रावत ने यह भी कहा कि उन्हें दिखा कि कांग्रेस केवल एसआईआर जैसे मुद्दों को लेकर सचिवालय तक जा रही थी, जबकि सड़कों, मोहल्लों, कस्बों और ब्लॉकों में आम लोगों तक उसकी पहुंच नहीं बन पा रही थी। यात्रा के दो-तीन दिन बाद उन्हें इसकी जरूरत महसूस हुई और इसका असर जमीन पर दिखेगा।

कौन हैं हरीश रावत

रावत उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्य में कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ चेहरों में गिने जाते हैं। उनकी उम्र 78 साल है और माना जाता है कि वह आज भी राज्य में पार्टी के सबसे प्रमुख नेताओं में हैं।

अब आगे क्या

अब सबकी नजर रावत की सात या आठ अक्टूबर को दिल्ली में वेणुगोपाल और शैलजा से होने वाली मुलाकात पर है। उसी बातचीत से तय होगा कि यात्रा के आगे के चरणों और पार्टी के नए अभियान पर क्या सहमति बनती है।

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