कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान फॉर्म-7 आवेदनों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। एनडीए के घटक भाजपा और जेडीएस के नेताओं ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया है कि कांग्रेस सरकार पुलिस का दुरुपयोग कर फॉर्म-7 के जरिए आपत्ति दर्ज कराने वालों पर झूठे आपराधिक मामले दर्ज करा रही है और SIR प्रक्रिया में अनुचित हस्तक्षेप कर रही है। कांग्रेस का आरोप इसके उलट है कि भाजपा कार्यकर्ता बड़ी संख्या में फॉर्म-7 भरकर वैध मतदाताओं के नाम सूची से कटवाने की कोशिश कर रहे हैं।
ज्ञापन में क्या कहा गया
भाजपा और जेडीएस नेताओं के ज्ञापन के अनुसार SIR की प्रक्रिया अवैध घुसपैठ के कारण मतदाता सूची में अयोग्य लोगों के नाम शामिल होने से रोकने के लिए की जा रही है। ज्ञापन में कहा गया है कि मतदाता सूची में किसी नाम को लेकर आपत्ति दर्ज कराना वैधानिक अधिकार है, जो चुनाव अधिकारियों की जांच और कानून में तय अपील प्रक्रिया के दायरे में आता है। यह भी बताया गया कि मसौदा सूचियों में सुधार की पहचान के लिए थोक में आवेदन देने का प्रावधान है, निपटारे से पहले ईआरओ और एईआरओ सभी आपत्तियों का क्रॉस-सत्यापन करते हैं, और एक बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) कई फॉर्म-7 आवेदन दे सकता है।
नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस सरकार के सदस्य और केपीसीसी से जुड़े पार्टी कार्यकर्ता SIR के कामकाज को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर रहे हैं। आरोप के मुताबिक फॉर्म-7 से आपत्ति दर्ज कराने वालों पर धोखाधड़ी, जालसाजी, डराने-धमकाने और शांति भंग जैसी भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं में मामले दर्ज कराने के लिए पुलिस पर दबाव बनाया जा रहा है, जिससे आपत्ति दर्ज करने वालों में भय का माहौल है। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि फर्जी आपत्ति दर्ज करना लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत दंडनीय है, लेकिन ऐसे मामलों में बीएनएस के तहत गंभीर धाराएं लगवाई जा रही हैं। ज्ञापन के मुताबिक भाजपा कार्यकर्ताओं और भाजपा के प्रति सहानुभूति रखने वालों को निशाना बनाया जा रहा है।
एफआईआर और 1 अक्टूबर के प्रदर्शन का जिक्र
ज्ञापन में भालकी (बीदर), मार्केट एरिया (बेलगावी), व्यालिकावल (बेंगलुरु), बल्लारी और नरसिम्हाराजा (मैसूरु) में छह एफआईआर दर्ज होने की खबरों का जिक्र है। नेताओं ने इसे भारत निर्वाचन आयोग जैसी स्वतंत्र संस्था के कामकाज में पुलिस शक्ति के दुरुपयोग के जरिए हस्तक्षेप बताया है।
ज्ञापन में यह आरोप भी है कि 1 अक्टूबर को मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने निषेधाज्ञा के बावजूद चुनाव अधिकारी के कार्यालय परिसर में प्रदर्शन किया, जिससे मुख्य निर्वाचन कार्यालय के काम पर दबाव पड़ा। इसमें कहा गया है कि मुख्य निर्वाचन कार्यालय ऐसे दबाव के आगे झुकता दिख रहा है। नेताओं ने राज्यपाल से अपील की है कि वे सरकार को निर्देश दें कि फॉर्म-7 से आपत्ति दर्ज कराने वालों, भाजपा कार्यकर्ताओं समेत किसी के खिलाफ झूठे और अनधिकृत मामले दर्ज न किए जाएं। ये सभी बातें भाजपा-जेडीएस के आरोप हैं और ज्ञापन की बातों के रूप में रखी गई हैं।
कांग्रेस का पक्ष
कांग्रेस का दावा है कि भाजपा कार्यकर्ता बूथवार बड़ी संख्या में फॉर्म-7 जमा कर रहे हैं। कांग्रेस के आरोप के अनुसार एक-एक कार्यकर्ता 80 से 200 फॉर्म-7 जमा कर रहा है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार 1 अक्टूबर को पार्टी नेताओं के साथ मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय पहुंचे, सबूत सौंपे और थोक में फॉर्म-7 जमा कराने वालों के खिलाफ एफआईआर की मांग की। चुनाव आयोग ने कानूनी राय लेने के बाद कार्रवाई का भरोसा दिया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी भाजपा और चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। ये कांग्रेस के आरोप हैं और स्वतंत्र रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं।
चुनाव अधिकारी का बयान और भाजपा की मांग
कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अंबुकुमार के हवाले से बताया गया है कि केवल फॉर्म-7 पर आपत्ति के आधार पर किसी मतदाता का नाम नहीं हटाया गया है और सुनवाई चल रही है। उनके अनुसार आयोग ने पुलिस में कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। कांग्रेस कार्यकर्ताओं की शिकायतों पर पुलिस ने फॉर्म-7 जमा कराने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की हैं। बल्लारी और भालकी में एफआईआर के बाद संबंधित लोगों की गिरफ्तारी की भी खबरें हैं, जिसके विरोध में स्थानीय भाजपा इकाइयों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालयों के सामने प्रदर्शन किया।
इससे पहले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने डीजी-आईजीपी एम.ए. सलीम से मिलकर फॉर्म-7 जमा करने के कारण भाजपा कार्यकर्ताओं पर दर्ज एफआईआर वापस लेने की मांग की थी। उनका कहना था कि फॉर्म-7 जमा करना नागरिकों का कानूनी अधिकार है और अगर आपत्ति गलत पाई जाती है तो चुनाव आयोग उसे खारिज कर देता है। भाजपा का यह भी आरोप है कि 1 अक्टूबर को मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के बाहर मुख्यमंत्री और मंत्रियों का प्रदर्शन कर्नाटक हाई कोर्ट के एक आदेश का उल्लंघन था।
अब आगे क्या
राज्यपाल की ओर से ज्ञापन पर प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है। फॉर्म-7 आपत्तियों की सुनवाई जारी है और आयोग की जांच तथा पुलिस की कार्रवाई पर आगे का घटनाक्रम निर्भर करेगा।

