केदारताल हिमस्खलन: लखनऊ की दो सगी बहनों वर्तिका और दीपिका वर्मा की मौत, शव पहुंचे घर; चार ट्रैकर अब भी लापता

3 Min Read
केदारताल हिमस्खलन: लखनऊ की दो सगी बहनों की मौत, शव पहुंचे घर

उत्तरकाशी के केदारताल ट्रैक पर हिमस्खलन में जान गंवाने वाली लखनऊ की दो सगी बहनों, वर्तिका और दीपिका वर्मा, के शव गुरुवार को गायत्रीपुरम स्थित उनके घर पहुंचे। घर में शोक का माहौल रहा और मौजूद लोग परिजनों को ढांढस बंधाते रहे। उत्तरकाशी प्रशासन के अनुसार हादसे के बाद लापता आठ ट्रैकरों में से अब तक चार के शव मिल चुके हैं और चार की तलाश जारी है।

कैसे सामने आया हादसा

बताया गया है कि अक्टूबर के आखिरी दिनों में केदारताल ट्रैक पर भोजखड़क और कच्ची ढांग के आसपास मौसम बिगड़ने और हिमस्खलन के बाद एक ट्रेकिंग दल के आठ सदस्य लापता हो गए। इनमें दोनों बहनें और एक स्थानीय गाइड भी शामिल थे। जानकारी मिलने पर एसडीआरएफ, पुलिस और अन्य बचाव एजेंसियों ने तलाश शुरू की। बर्फबारी और खराब मौसम के कारण अभियान में लगातार दिक्कतें आती रहीं।

उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने बताया कि दोनों मृतक महिलाओं की पहचान लखनऊ के गायत्रीपुरम निवासी दीपिका वर्मा और वर्तिका वर्मा के रूप में हुई है। शवों को हेलीकॉप्टर से मातली हेलीपैड और वहां से जिला अस्पताल लाया गया, जहां भाई अतुल वर्मा ने दोनों की शिनाख्त की।

भाई की बात

अतुल वर्मा मंगलवार को परिजनों के साथ बहनों की तलाश में उत्तरकाशी पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि ट्रेकिंग एजेंसी की ओर से परिवार को घटना की कोई जानकारी नहीं दी गई थी। सोशल मीडिया पर खबर देखने के बाद वे उत्तरकाशी पहुंचे। इस आरोप पर एजेंसी का पक्ष अब तक सामने नहीं आया है।

अतुल के अनुसार, वर्तिका फ्रीलांस इन्फ्लुएंसर थीं और दीपिका एक निजी कंपनी में ग्राफिक्स डिजाइनर के रूप में काम करती थीं। उन्होंने बताया कि दोनों बहनों को ट्रेकिंग का शौक था और वे नेपाल व भारत में कई जगह ट्रेकिंग कर चुकी थीं। दो महीने पहले ही दोनों फूलों की घाटी और हेमकुंड साहिब की ट्रेकिंग करके लौटी थीं। करीब एक साल पहले अतुल और उनकी बहनों ने दोस्तों के साथ उत्तरकाशी के केदारकांठा की ट्रेकिंग की थी।

तलाश जारी, नए परमिट पर रोक

जिलाधिकारी के अनुसार, खराब मौसम और बर्फबारी के बीच गुरुवार सुबह लापता चार लोगों की तलाश दोबारा शुरू की गई है, और बचाव दलों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर अभियान चलाया जा रहा है। उधर, गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान और उत्तरकाशी वन प्रभाग ने चार हजार मीटर से अधिक ऊंचाई वाले ट्रेक मार्गों पर नए परमिट फिलहाल जारी न करने का फैसला किया है, जिसमें केदारताल भी शामिल है। उत्तरकाशी के प्रभागीय वन अधिकारी के अनुसार, मार्ग सुरक्षित होने की पुष्टि के बाद ही इन्हें दोबारा खोलने का निर्णय होगा।

Share This Article
Exit mobile version