गायक मिका सिंह ने ‘बातें दिल से विद नविका कुमार’ पॉडकास्ट में पाकिस्तान से अपने निजी जुड़ाव का जिक्र करते हुए सवाल उठाया है कि भारत में पाकिस्तान के मुसलमानों को लेकर नजरिया अलग क्यों है, जबकि दुबई के मुसलमानों को लेकर ऐसी धारणा नहीं दिखती। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान या वहां के लोगों को स्वभाव से खराब मानना उन्हें सही नहीं लगता। इस बातचीत में उन्होंने पाकिस्तानी कलाकारों के भारत आने और ननकाना साहिब व पंजा साहिब से अपने भावनात्मक रिश्ते पर भी बात की। उनकी टिप्पणी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
पाकिस्तान और वहां के लोगों पर क्या कहा
मिका सिंह के मुताबिक पाकिस्तान को पूरी तरह खराब बताना ठीक नहीं है। उन्होंने 2019 की अपनी पाकिस्तान यात्रा को याद करते हुए वहां की मेहमाननवाजी और लोगों के व्यवहार की बात की। उनके अनुसार उन्हें वहां कई मुस्लिम लोग मिले, जिन्होंने गुरुद्वारों की देखभाल और सफाई जैसे कामों में सहयोग किया। उन्होंने ऐसे कई लोगों को अपने भाई जैसा बताया।
इसी संदर्भ में मिका ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि पाकिस्तान के मुसलमानों को लेकर लोगों में नकारात्मकता क्यों दिखती है, जबकि दुबई के मुसलमानों के प्रति वैसा रवैया नहीं देखा जाता। यह उनकी निजी राय है।
पाकिस्तानी कलाकारों पर राय
पॉडकास्ट में जब उनसे पाकिस्तानी कलाकारों के साथ काम करने और उनके भारत आने के बारे में पूछा गया, तो मिका ने कहा कि उन्हें पाकिस्तानी गायकों के भारत आने से कोई आपत्ति नहीं है। उनके अनुसार बॉलीवुड ऐसे कलाकारों का सम्मान करता रहा है और इंडस्ट्री ने कई पाकिस्तानी गायकों का स्वागत किया है।
मिका ने यह अंतर भी रखा कि किसी कलाकार का निजी समारोह में प्रस्तुति के लिए पाकिस्तान जाना और उस यात्रा का सार्वजनिक प्रचार करना दो अलग बातें हैं। उनका कहना था कि अगर कोई कलाकार निजी कार्यक्रम में प्रस्तुति देकर अपनी फीस लेकर लौटता है और यात्रा छिपाता नहीं है, तो उसे सीधे राजनीतिक गतिविधि की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान में अगर किसी भारतीय कलाकार को सम्मान मिलता है, तो उसे सकारात्मक ढंग से देखा जाना चाहिए।
ननकाना साहिब और पंजा साहिब से रिश्ता
मिका के अनुसार पाकिस्तान से उनका जुड़ाव केवल काम या कमाई का नहीं है। उन्होंने बताया कि वहां सिख धर्म के प्रमुख तीर्थस्थल होने के कारण उनका भावनात्मक रिश्ता है और उन्होंने ननकाना साहिब व पंजा साहिब का खास तौर पर जिक्र किया। उनके मुताबिक जब उन्हें पाकिस्तान में प्रस्तुति का निमंत्रण मिला, तो सबसे पहले यही विचार आया कि इस बहाने गुरुद्वारे जाया जा सकता है।
2019 का विवाद क्या था
अगस्त 2019 में मिका सिंह ने कराची में एक शादी से जुड़े समारोह में प्रस्तुति दी थी। कार्यक्रम का संबंध पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ से जुड़े परिवार से बताया गया था। उस समय जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण थे। प्रस्तुति के वीडियो सामने आने के बाद भारत में उनकी आलोचना हुई।
इसके बाद ऑल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन और फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (एफडब्ल्यूआईसीई) ने उनके बहिष्कार का ऐलान किया। मिका ने बाद में सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। उन्होंने कहा था कि प्रस्तुति की प्रतिबद्धता पहले से तय थी और उसका समय संयोगवश अनुच्छेद 370 के घटनाक्रम से टकरा गया। 21 अगस्त 2019 की प्रेस कॉन्फ्रेंस में माफी के बाद एफडब्ल्यूआईसीई ने पाबंदी वापस ले ली और वे फिर भारतीय मनोरंजन उद्योग में काम करने लगे।
पहले भी रख चुके हैं अलग तरह की राय
भारत-पाकिस्तान और सीमा पार के कलाकारों के मुद्दे पर मिका की राय पहले भी सामने आती रही है। जून 2025 में उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था कि सीमा पार के कलाकारों से जुड़ा कंटेंट जारी करने से पहले दो बार सोचना चाहिए, खासकर देश की गरिमा के संदर्भ में। उसी विवाद में उन्होंने ‘सरदार जी 3’ में पाकिस्तानी कलाकार को लेने पर दिलजीत दोसांझ की आलोचना भी की थी।
अब आगे क्या
मिका सिंह का ताजा बयान उनकी निजी राय है और भारत-पाकिस्तान संबंधों व कलाकारों के आवागमन जैसे संवेदनशील विषय से जुड़ा है। इस पर राजनीतिक या फिल्म उद्योग के संगठनों की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया अब तक सामने नहीं आई है।

