पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध के पक्ष में नहीं सुप्रीम कोर्ट, पर पूरे दिन आतिशबाजी की छूट भी नहीं; 15 अक्टूबर को अगली सुनवाई

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पटाखों पर सुप्रीम कोर्ट: पूर्ण बैन नहीं, 24 घंटे छूट भी नहीं, 15 अक्टूबर को सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली से पहले पटाखों के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के प्रति अनिच्छा जताई है, लेकिन पूरे दिन पटाखे चलाने की अनुमति देने से भी इनकार किया है। बुधवार, 30 सितंबर को सुनवाई के दौरान जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ ने कहा कि वह ऐसा रास्ता खोजेगी जिसमें पटाखे चलाने के लिए एक तय समय और स्वीकृत किस्में निर्धारित हों। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।

ये पीठ की मौखिक टिप्पणियां हैं। अभी कोई अंतिम आदेश नहीं आया है। इस साल दिवाली पर कौन-से पटाखे चल सकेंगे और किस समय, यह अगली सुनवाई के बाद ही साफ होगा।

सुनवाई में क्या कहा गया

पीठ ने संकेत दिया कि पटाखों पर पूर्ण रोक से दिवाली मनाने वालों की भावनाएं आहत हो सकती हैं। साथ ही उसने कहा कि पूरे दिन आतिशबाजी की छूट से बुजुर्गों, मरीजों और बच्चों पर बुरा असर पड़ेगा। इसी वजह से अदालत एक निश्चित समय-सीमा वाले समाधान पर विचार कर रही है।

सुनवाई में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बेरियम आधारित पटाखों पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) का जवाब रिकॉर्ड पर लाने के लिए 15 अक्टूबर तक का समय मांगा। उन्होंने बताया कि बेरियम वाले पटाखों का खुले वातावरण में परीक्षण अभी होना है। कोर्ट ने CPCB और केंद्र सरकार को बेरियम की मौजूदगी और पटाखों के शोर के स्तर (डेसिबल) की जांच पूरी करने के लिए इसी तारीख तक का समय दिया है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार सरकार की ओर से कुछ शर्तों के साथ जॉइंट पटाखों (लड़ी) के निर्माण की अनुमति का सुझाव भी रखा गया, जिस पर पीठ ने सहमति के संकेत दिए।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील पूजा धर ने दलील दी कि 2018 में सुप्रीम कोर्ट बेरियम और उसके लवणों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा चुका है, क्योंकि ये सांस की सेहत के लिए हानिकारक हैं। वहीं पटाखा निर्माताओं की ओर से पूरे देश के लिए एक समान नियम बनाने की मांग की गई। उनका आग्रह था कि सख्त पाबंदियां सिर्फ दिल्ली तक सीमित न रखी जाएं।

पृष्ठभूमि

यह सुनवाई 2015 के उस मामले से जुड़ी है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट अक्टूबर से जनवरी के बीच दिल्ली और वायु प्रदूषण से प्रभावित अन्य राज्यों में पटाखों पर रोक के आदेश देता रहा है। अक्टूबर 2025 में कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में दिवाली के लिए पटाखा प्रतिबंध में ढील दी थी और दिवाली के दिन ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति दी थी।

दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के मौसम और दिवाली के आसपास वायु गुणवत्ता अक्सर बिगड़ जाती है, इसलिए हर साल इस मुद्दे पर बहस तेज होती है। अदालत के सामने चुनौती स्वास्थ्य और पर्यावरण की चिंता, त्योहार की परंपरा और पटाखा उद्योग से जुड़ी आजीविका के बीच संतुलन बनाने की है।

आगे क्या

15 अक्टूबर की सुनवाई में CPCB और केंद्र की जांच रिपोर्ट अहम होगी। उसी के आधार पर तय हो सकेगा कि किस किस्म के पटाखे चल सकेंगे और किस समय-सीमा में।

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